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मोदी के मेक इन इंडिया ने बचाए 3 लाख करोड़, 4.5 लाख को दिया रोजगार

120 से भी ज्यादा नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाई गई हैं।

Modi and make in India saved 3 lakh crores give more than 4 lakh jobs modi make in india

नई दिल्ली. भारत में मोबाइल हैंडसेट बनाने के लिए इको सिस्टम तैयार होने के चलते देश के करीब 3 लाख करोड़ रुपए बच गए हैं। यह बात आईसीईए (इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक एसोसिएशन) की ओर से हाल ही में जारी रिपोर्ट में कही गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस बदलाव का श्रेय भारत सरकार की पॉलिसी मेक इन इंडिया का है। 
 
चीन के बाद मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग में नंबर 2 पर भारत 
 
रिपोर्ट के अनुसार पिछले 4 साल के दौरान भारत में हैंडसेट बनाने और सीबीयू आयात कर उन्हें असेंबल करने के काम में तेजी आई है। इस काम में मेक इन इंडिया के तहत तेजी से काम हुआ है। क्योंकि पिछले 3 साल में भारत में मोबाइल बनाने के काम में तेजी आई है। जबकि इससे पहले 2014-2015 के दौरान भारत बाजार में कुल डिमांड में से 80 फीसदी मोबाइल आयात करता था। लेकिन मेक इन इंडिया लॉन्च होने के बाद मोबाइल बनाने बनाने में तेजी आई है। इसके चलते भारत मोबाइल बनाने के मामले में चीन के बाद दुनिया में नंबर 2 पर आ गया है। 
 
अब सिर्फ 20 फीसदी फोन होते हैं आयात 
 
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों की बात करें तो 2017-2018 में भारत में 22.5 करोड़ मोबाइल फोन असेंबल और मैन्यूफैक्चर किए गए। जो कि इस साल के मार्केट डिमांड का करीब 80 फीसदी है। इसके चलते भारत की शुद्ध विदेशी मुद्रा बचत करीब 60 हजार करोड़ से ज्यादा रही। दूसरी ओर सीबीयू के इंपोर्ट में भी भारी गिरावट आई है। 
 
4.5 लाख से अधिक को मिला रोजगार 
 
सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' की पहल के बाद भारत में तकनीकी और दूरसंचार उद्योग का विकास हुआ है। इसके अलावा पिछले 4 साल में भारत के मोबाइल हैंडसेट और कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री में करीब 4.5 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार दिया है। जबकि अलग-अलग राज्यों में 120 से भी ज्यादा नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाई गई हैं। 

 

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