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भारतीय भाषाओं में मि‍ले इंटरनेट तो जुड़ सकते हैं 20.5 करोड़ नए यूजर्स: रि‍पोर्ट

अगर लोगों को उनके पसंद की भाषा में इंटरनेट उपलब्‍ध कराया जाए तो करीब 20.5 करोड़ नए इंटरनेट यूजर्स डि‍जि‍टल हो सकते हैं।

internet in indian language can add new 205 million users
 
नई दि‍ल्‍ली। अगर लोगों को उनकी ही पसंद में इंटरनेट मि‍ले तो भारत में 20.5 करोड़ नए यूजर्स को डि‍जि‍टल तौर पर जोड़ा जा सकता है। यह बात इंटरनेट एंड डमोबाइल एसोसि‍एशन ऑफ इंडि‍या (IAMAI) और Kantar IMRB की ज्‍वाइंट रि‍पोर्ट में कही गई है।
 
रि‍पोर्ट 'इंटरनेट इन इंडि‍क 2017' में कहा गया है कि‍ दि‍संबर 2017 तक भारत में 48.1 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हो गए हैं। भारत के पास चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस है, जोकि‍ जून 2018 तक 50 करोड़ तक पहुंच सकता है। यह रि‍पोर्ट 170 शहरों के 60 हजार इंडि‍वि‍जुअल और 750 गांवों के 15,000 इंडि‍वि‍जुअल्‍स के आधार पर बनाई गई है।    
 
रि‍पोर्ट में क्‍या कहा गया
 
इस रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ इंटरनेट सर्वि‍सेज जैसे डि‍जि‍टल पेमेंट्स, बेसि‍क ई-कॉमर्स, ऑनलाइन जॉब सर्च आदि‍ मौजूदा समय में बेहद सीमि‍त हैं। ऐसा इसलि‍ए क्‍योंकि‍ लोगों की पसंद की भाषाओं में इस तरह की गति‍वि‍धि‍यों की उपलब्‍धता कम है। रि‍पोर्ट में कहा गया कि‍ इंडि‍क भाषाओं (भारतीय) में इंटरनेट होने से 23 फीसदी नॉन इंटरनेट यूजर्स भी डि‍जि‍टल हो सकेंगे।   
 
चीन का दि‍या गया उदाहरण
 
दुनि‍या भर में चीन ने इंटरनेट कंटेट के लि‍ए मंडरीन लिपि‍ के इस्‍तेमाल से इंटरनेट यूजर्स की सबसे बड़ी संख्‍या हासि‍ल की है। यह भाषा अंग्रेजी के बाद इंटरनेट पर दूसरी सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होने वाली भाषा है। रि‍पोर्ट में यह भी कहा गया कि‍ इंडि‍क कंटेट दुनि‍याभर के इंटरनेट कंटेट का मात्र 0.1 फीसदी है।  
 
डि‍जि‍टल इंडि‍या के लि‍ए जरूरी है भारतीय भाषा
 
डि‍जि‍टल इंडि‍या के सपने को पूरा करने के लि‍ए इंडि‍क इंटरनेट ईकोसि‍स्‍टम को डेवलप करना जरूरी है। रि‍पोर्ट में कहा गया कि‍ इससे इंटरनेट का इस्‍तेमाल बढ़ेगा और जनसंख्‍या के सामाजि‍क-आर्थि‍क पि‍छड़े वर्ग की डि‍जि‍टल क्षमता बढ़ाने में मदद मि‍लेगी। इतना ही नहीं, ज्‍यादा से ज्‍यादा भारतीय भाषाओं में इंटरनेट उपलब्‍ध कराने से ग्रामीण और शहरी डि‍जि‍टल यूजर्स के अंतर को कम करने में मदद मि‍लेगी। 
 
ग्रामीण इलाकों में भारतीय भाषाओं की डि‍मांड ज्‍यादा
 
रि‍पोर्ट में पाया गया है कि ग्रामीण भारत में इंडि‍क कंटेट के इस्‍तेमाल का हि‍स्‍सा 76 फीसदी के साथ सबसे ज्‍यादा है। वहीं, शहरी इलाकों में भारतीय भाषाओं में इंटरनेट का इस्‍तेमाल करने वालों की संख्‍या 66 फीसदी है। 
 
भारतीय भाषाओं में इस्‍तेमाल होने वाली एप्‍लीकेशन
 
रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ डि‍जि‍टल इंटरटेनमेंट सबसे ज्‍यादा पॉपुलर इंटरनेट सर्वि‍स है और इसके पॉपुलर होने का सबसे बड़ा कारण भारतीय भाषाओं में कंटेट होना है। इसमें कोई शक नहीं है शहरी यूजर्स के बीच भारतीय भाषाओं में म्‍युजि‍क और वीडि‍यो स्‍ट्रीमिंग सबसे ज्‍यादा पसंद कि‍या जाता है। वहीं, कंटेट के इस्‍तेमाल के लि‍हाज से न्‍यूज और दूसरे इंटरटेनमेंट के तरीके भारतीय भाषाओं के ऐप में यूज कि‍या जाता है। 
 
भारतीय भाषाओं की एप्‍लीकेशन
 
ऐप इस्‍तेमाल (फीसदी में)
टि‍कट बुकिंग 15
स्‍पोर्ट्स 16
ऑनलाइन जॉब सर्वि‍स 17
ऑनलाइन बैंकिंग 21
सर्च इंजन 39
सोशल नेटवर्किंग साइट्स 46
इंटरटेनमेंट (अन्‍य) 47
न्‍यूज 50
ईमेल, टेक्‍स्‍ट 50
म्‍युजि‍क/वीडि‍यो स्‍ट्रीम 68

 

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