खास खबर: भारत में आपकी जुबान में चलेगा डिजिटल बिजनेस, अंग्रेजी के लदेंगे दिन

पेटीएम से लेकर ओला और माइक्रोसॉफ्ट से लेकर यूट्यूब तक भारत में क्षेत्रीय भाषाओं को प्रमोट कर रहे हैं। कई रि‍पोर्ट्स में भी कहा गया है कि‍ अगर लोगों को उनकी ही पसंद की भाषा में इंटरनेट मि‍ले तो भारत में 20.5 करोड़ नए यूजर्स को डि‍जि‍टल तौर पर जोड़ा जा सकता है।

MoneyBhaskar

Apr 11,2018 08:38:00 PM IST
नई दि‍ल्‍ली. देश में बढ़ते स्‍मार्टफोन यूजर्स और नई पीढ़ी के इंटरनेट यूजर्स की जुगलबंदी ने डि‍जि‍टल बि‍जनेस का नया दौर शुरू कि‍या है। भारत में ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग अंग्रेजी नहीं बल्‍कि‍ अपनी भाषा में इंटरनेट का इस्‍तेमाल करना चाहते हैं। यह बात कॉरपोरेट वर्ल्‍ड भी समझ गया है। इसलि‍ए पेटीएम से लेकर ओला और माइक्रोसॉफ्ट से लेकर यूट्यूब तक भारत में क्षेत्रीय भाषाओं को प्रमोट कर रहे हैं। कई रि‍पोर्ट्स में भी कहा गया है कि‍ अगर लोगों को उनकी ही पसंद की भाषा में इंटरनेट मि‍ले तो भारत में 20.5 करोड़ नए यूजर्स को डि‍जि‍टल तौर पर जोड़ा जा सकता है।

कॉरपोरेट्स भी लोकल भाषा वाले यूजर्स को कर रहे हैं टारगेट
एंटरप्राइजेज बि‍जनेस, Reverie के वीपी राजेश मेहता ने कहा कि‍ इस वक्‍त भारतीय भाषा का इंटरनेट यूजर बेस काफी बढ़ रहा है और बि‍जनेस वर्ल्‍ड भी लोकल भाषा के अनुभवों के साथ लोगों को टारगेट कर रहे हैं। जब ट्रांजैक्‍शन यूजर्स की संख्‍या बढ़ेगी तो कारोबारी भी लोकलाइज्‍ड सॉल्‍यूशन उपलब्‍ध कराना शुरू कर देगें।
इंटरनेट पर 20.1 करोड़ होंगे हिंदी के यूजर्स
सर्च इंजन गूगल और केपीएमजी के एक अध्‍ययन के मुताबि‍क, 70 फीसदी भारतीयों को अंग्रेजी कंटेट से ज्‍यादा लोकल भाषा में मौजूद डि‍जि‍टल कंटेंट पर ज्‍यादा भरोसा है। अध्‍ययन में यह भी कहा कि‍ भारतीय भाषाओं में सबसे ज्‍यादा प्रचलि‍त हिंदी ही है और 2021 तक 20.1 करोड़ हिंदी यूजर्स, यानी 38 फीसदी भारतीय इंटरनेट यूजर बेस ऑनलाइन हो जाएगा। वहीं, इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसि‍एशन ऑफ इंडि‍या (IAMAI) और Kantar IMRB की ज्‍वाइंट रि‍पोर्ट में कहा गया कि‍ अगले चार साल में मराठी, बंगाली, तमि‍ल और तेलगू बोलने वाले इंटरनेट यूजर्स कुल भारतीय भाषा इंटरनेट यूजर बेस का 30 फीसदी हो जाएंगे।
जून 2018 तक 50 करोड़ हो जाएंगे इंटरनेट यूजर्स
IAMAI और Kantar IMRB की रि‍पोर्ट 'इंटरनेट इन इंडि‍क 2017' में कहा गया है कि‍ दि‍संबर 2017 तक भारत में 48.1 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हो गए हैं। भारत के पास चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस है, जो जून 2018 तक 50 करोड़ तक पहुंच सकता है। यह रि‍पोर्ट 170 शहरों के 60 हजार इंडि‍वि‍जुअल और 750 गांवों के 15,000 इंडि‍वि‍जुअल्‍स के आधार पर बनाई गई है।
डि‍जि‍टल इंडि‍या के लि‍ए जरूरी है भारतीय भाषा
डि‍जि‍टल इंडि‍या के सपने को पूरा करने के लि‍ए इंडि‍क इंटरनेट इकोसि‍स्‍टम को डेवलप करना जरूरी है। रि‍पोर्ट में कहा गया कि‍ इससे इंटरनेट का इस्‍तेमाल बढ़ेगा और जनसंख्‍या के सामाजि‍क-आर्थि‍क पि‍छड़े वर्ग की डि‍जि‍टल क्षमता बढ़ाने में मदद मि‍लेगी। इतना ही नहीं, ज्‍यादा से ज्‍यादा भारतीय भाषाओं में इंटरनेट उपलब्‍ध कराने से ग्रामीण और शहरी डि‍जि‍टल यूजर्स के अंतर को कम करने में मदद मि‍लेगी।
ग्रामीण इलाकों में भारतीय भाषाओं की डि‍मांड ज्‍यादा
रि‍पोर्ट में पाया गया है कि ग्रामीण भारत में इंडि‍क कंटेट के इस्‍तेमाल का हि‍स्‍सा 76 फीसदी के साथ सबसे ज्‍यादा है। वहीं, शहरी इलाकों में भारतीय भाषाओं में इंटरनेट का इस्‍तेमाल करने वालों की संख्‍या 66 फीसदी है। गूगल की सर्च रि‍पोर्ट 2017 में कहा गया कि‍ भारत में लोकल भाषाओं में सर्च करने की ग्रोथ 10 गुना तक बढ़ी है। इसमें हिंदी अब भी सबसे ज्‍यादा यूज हो रही है लेकि‍न दूसरी भाषाएं जैसे तमि‍ल, मराठी और बंगाली भी ऑनलाइन सर्च में बढ़ रही हैं।
एफएमसीजी में डि‍टि‍जल नेटवर्क का यूज
गूगल की सर्च रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, साल 2017 में 'डि‍जि‍टल' के लि‍हाज से बड़ा बदलाव देखा गया है। ऑटो और बैंकिंग, फाइनेंशि‍यल सर्वि‍सेज और इंश्‍योरेंस जैसे कैटेगारल में ऑनलाइन रि‍सर्च और ऑफलाइन खरीद का सीधा संबंध हैं। 2020 तक 40 फीसदी एफएमसीजी सेल्‍स प्रभावि‍त होगी। कहा गया है कि‍ 6 से 7 अरब डॉलर के एफएमसीजी प्रोडक्‍ट्स ऑनलाइन बि‍केंगे।
ऑटो इंडस्‍ट्री में 20 फीसदी सेल्‍स डि‍जि‍टल से
बड़ी ऑटो कंपनि‍यों की 20 फीसदी सेल्‍स डि‍जि‍टल तरीके से हो रही है। वहीं, 79 फीसदी कार बायर्स ऑनलाइन वीडि‍यो देखने के बाद खरीददारी का फैसला ले रहे हैं। जो साफ बताता है कि‍ ऑनलाइन और ऑफलाइन का सीधा संबंध है। रि‍पोर्ट में यह भी कहा गया है कि‍ 3 में से 2 यूजर्स ऑटो डीलरशि‍प के लोकेश सर्च करते हैं। इसके अलावा, 44 फीसदी टू-व्‍हीलर बायर्स ऑनलाइन रि‍सर्च करने के बाद खरीददारी करते हैं।
2.5 गुना बढ़ेगा ई-कॉमर्स, ट्रैवल, फाइनेंशि‍यल सर्वि‍सेज पर खर्च
रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ 2020 तक ई-कॉमर्स, ट्रैवल, फाइनेंशि‍यल सर्वि‍सेज और डि‍जि‍टल मीडि‍या में ऑनलाइन कंज्‍यूमर खर्च 2.5 गुना बढ़कर 1000 अरब डॉलर का हो गया है। इसके अलावा, 2030 तक ऑनलाइन खर्च करने वाले कंज्‍यूमर्स की संख्‍या भी 2 से 3 गुना बढ़कर 18 से 20 करोड़ हो जाएगी। इसके अलावा, टेलि‍कॉम बेस्‍ड मोबाइल वॉलेट सर्वि‍सेज के सर्च में 70 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है।
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यहां है बड़ा मौका
 
IAMAI  की रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ इंटरनेट सर्वि‍सेज जैसे डि‍जि‍टल पेमेंट्स, बेसि‍क ई-कॉमर्स, ऑनलाइन जॉब सर्च आदि‍ मौजूदा समय में बेहद सीमि‍त हैं। ऐसा इसलि‍ए क्‍योंकि‍ लोगों की पसंद की भाषाओं में इस तरह की गति‍वि‍धि‍यों की उपलब्‍धता कम है। रि‍पोर्ट में कहा गया कि‍ इंडि‍क भाषाओं (भारतीय) में इंटरनेट होने से 23 फीसदी नॉन इंटरनेट यूजर्स भी डि‍जि‍टल हो सकेंगे।
 
भारतीय भाषाओं में इस्‍तेमाल होने वाली एप्‍लीकेशन
 
रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ डि‍जि‍टल इंटरटेनमेंट सबसे ज्‍यादा पॉपुलर इंटरनेट सर्वि‍स है और इसके पॉपुलर होने का सबसे बड़ा कारण भारतीय भाषाओं में कंटेट होना है। इसमें कोई शक नहीं है शहरी यूजर्स के बीच भारतीय भाषाओं में म्‍युजि‍क और वीडि‍यो स्‍ट्रीमिंग सबसे ज्‍यादा पसंद कि‍या जाता है। वहीं, कंटेट के इस्‍तेमाल के लि‍हाज से न्‍यूज और दूसरे इंटरटेनमेंट के तरीके भारतीय भाषाओं के ऐप में यूज कि‍या जाता है। 
 
भारतीय भाषाओं की एप्‍लीकेशन
 
ऐप इस्‍तेमाल (फीसदी में)
टि‍कट बुकिंग 15
स्‍पोर्ट्स 16
ऑनलाइन जॉब सर्वि‍स 17
ऑनलाइन बैंकिंग 21
सर्च इंजन 39
सोशल नेटवर्किंग साइट्स 46
इंटरटेनमेंट (अन्‍य) 47
न्‍यूज 50
ईमेल, टेक्‍स्‍ट 50
म्‍युजि‍क/वीडि‍यो स्‍ट्रीम 68
 
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