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आप के घर में रखे ई-वेस्ट का पता लगाएगी सरकार, 20 राज्यों में शुरू होगा कैंपेन

भारत में बढ़ते ई-वेस्ट से परेशान अब सरकार अब घर-घर में पड़े वेस्ट का पता लगाने जा रही है।

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नई दिल्ली। भारत में बढ़ते ई-वेस्ट से परेशान अब सरकार अब घर-घर में पड़े वेस्ट का पता लगाने जा रही है। इसके लिए सरकार देश के 20 राज्यों में एक कैंपेन  शुरू करेगी। जिसके लिए आरडब्ल्यूए से लेकर स्कूल सहित दूसरे आर्गनाइजेशन की मदद ली जाएगी। हाल ही में आई यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में भारत दुनिया में सबसे तेज ई-वेस्ट प्रोड्यूस करने वाले देशों में से एक है। साल 2016 में भारत में करीब 2 मिट्रिक टन ई-वेस्ट 

जेनरेट हुआ है।
 
20 राज्यों में शुरू होगा कैंपेन
 
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से moneybhaskar.com को मिली जानकारी के अनुसार सरकार डिजिटल इंडिया पहल के तहत दूसरे फेज का कैंपेन शुरू करने जा रही है। इसके तहत 20 राज्यों में कैंपेन शुरू किया जाएगा। अभी तक 10 राज्यों में पहले से ही सर्वे का काम शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, उड़ीसा, गोवा, बिहार, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, असम में सर्वे पहले शुरू किया जा चुका है। ऐसे में बचे राज्य और केंद्र शासित  प्रदेशों में ये कैंपेन शुरू होगा।
 
आम नागरिकों की होगी भागीदारी
 
कैंपेन में आम नागरिकों की भी भागीदारी रहेगी। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, आरडब्ल्यूए, बल्क कंज्यूमर, डीलर, रिफर्बिशर, राज्य सरकारों को शामिल किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस सर्वे और कैंपेन के जरिए जहां देश में मौजूद ई-वेस्ट का आकलन किया जाय, वहीं लोगों को इसके खतरे के प्रति जागरुक करना भी है। 
 
20 फीसदी ई-वेस्ट ही होता है रिसाइकिल
 
यूनाइटेड नेशंस के सर्वे के अनुसार पूरी दुनिया में करीब 4.5 करोड़ मीट्रिक टन ई-वेस्ट का जेनरेशन साल 2016 में हुआ है। जिसमें से केवल 20 फीसदी ही रिसाइकिल होता है। ऐसे में दुनिया भर में ई-वेस्ट के बढ़ते खतरे से गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ती जा रही है। अकेले चीन में 7.2 मिट्रिक टन ई-वेस्ट निकलता है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।
 
भारत  में ईलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट की बढ़ रही है डिमांड
दुनिया में  इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट का यूज भारत में काफी तेजी से बढ़ने वाले देशों में से एक है। यहां की 125 करोड़ आबादी और बढ़ती इकोनॉमी की वजह से मोबाइल फोन, लैपटॉप सहित दूसरे गैजेट और इलेक्ट्रॉनिक्स आयटम की लगातार डिमांड रही है। जिसकी वजह से भारत सरकार का अनुमान है कि साल 2020 तक भारत में करीब 400 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स आयटम का इंपोर्ट होगा।
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