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नाक रगड़ कर रह गई थी FBI, डाटा लीक पर एप्‍पल से सीखे फेसबुक

फेसबुक डाटा लीक मामले में मंगलवार को कंपनी के सीईआे मार्क जुकरबर्ग की पेशी अमेरि‍की सीनेट के सामने होनी है।

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नई दि‍ल्‍ली. फेसबुक डाटा लीक मामले में मंगलवार को कंपनी के सीईआे मार्क जुकरबर्ग की पेशी अमेरि‍की सीनेट के सामने होनी है। यहां उनसे दो दि‍न तक पूछताछ होने की संभावना है। यह पूरा मामला फेसबुक डाटा लीक से जुड़ा है, जि‍समें फेसबुक पर आरोप है कि‍ उसने पॉलि‍टि‍कल एनलि‍स्‍ट फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका को यूजर्स का डाटा बेचा है। वहीं, कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आराेप है कि‍ उसने इस डाटा का प्रयोग अमेरि‍का के राष्‍ट्रपति‍ चुनाव को प्रभावि‍त करने में लगाया।
 

एप्‍पल के CEO ने भी साधा था नि‍शाना 

डाटा लीक का मामला सामने आने के बाद एप्‍पल के सीईओ ने भी फेसबुक पर यूजर्स के डाटा की सि‍क्‍योरि‍टी को लेकर नि‍शाना साधा था। उन्‍होंने कहा था कि‍ एप्‍पल सि‍र्फ कमाई के लि‍ए अपने यूजर्स का डाटा कि‍सी को नहीं देता। ऐसे में फेसबुक को एप्‍पल से सीख लेने की जरूरत है। क्‍योंकि‍ एप्‍पल की ओर से एफबीआई को भी एक आईफोन का डाटा देने से मना कर दि‍या गया था। जि‍सके बाद मामला कोर्ट पहुंचा था और वहां भी एप्‍पल को ही जीत मि‍ली थी। 
 

क्‍या था मामला 

2 दिसंबर को कैलिफोर्निया के सेन बर्नाडिनो स्थित एक कम्युनिटी सेंटर पर टेरर अटैक हुआ था। इसमें 14 लोगों की मौत हुई थी। पाक मूल के हमलावर कपल सैयद फारुख और उसकी पत्नी तश्फीन मलिक ने हमले को अंजाम दिया था। दोनों आईएसआईएस से जुड़े हुए थे। ऐसे मेंं एफबीआई ने जब मामले की छानबीन शुरू की तो उन्‍हें उनकी कार से एक आईफोन मि‍ला था। इसके बाद एफबीआई ने एप्‍पल से फोन को अनलॉक कर डाटा की जानकारी मांगी थी। लेकि‍न एप्‍पल ने ऐसा करने से मना कर दि‍या। इसके बाद से ही FBI और Apple में ठनी हुई है और मामला कोर्ट तक जा पहुंचा है। 
 

FBI ने क्‍यों मांगी थी एप्‍पल से मदद 

सितंबर 2014 के बाद से जितने भी एप्पल डिवाइस आ रहे हैं, उसमें टेक्स्ट मैसेजेस और फोटोग्राफ्स इनक्रिप्टेड रहते हैं। अगर डिवाइस लॉक रहता है, तो डाटा एक्सेस करने के लिए यूजर्स को पासकोड की जरूरत होती है। 10 बार पासकोड गलत लिखने से डाटा खुद-ब-खुद डिलीट हो जाता है। एप्पल के मुताबिक, उनका स्टाफ भी किसी भी कस्टमर का डाटा एक्सेस नहीं कर सकता। एडवर्ड स्नोडन की ओर से यूएस गवर्नमेंट पर सर्विलांस का आरोप लगाने के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया था।   आगे पढ़ें : एप्‍पल के पक्ष में आया था कोर्ट का फैसला 

कोर्ट ने कहा एप्‍पल को डाटा देने के लि‍ए बाध्‍य नहीं कि‍या जा सकता 
 
इस मामले में एक संघीय जज ने फैसला सुनाया था कि अमेरिकी न्याय विभाग एप्पल को इस बात के लिए बाध्‍य नहीं कर सकता कि वह एफबीआई को लॉक किए गए आईफोन का डाटा उपलब्ध कराए। इस फैसले से निजी एवं जन सुरक्षा के संबंध में कंपनी के साथ लडाई में सरकार को बड़ा झटका लगा है। कैलिफोर्निया के न्यायाधीश ने आदेश दिया था कि कंपनी एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करे जिससे सान बर्नार्डिनो आतंकवादी घटना की जांच के मामले में एक आईफोन हैक करने में एफबीआई को मदद मिल सके।  आगे पढ़ें : FBI को डाटा के लि‍ए खर्च करने पड़े लाखों रुपए 
FBI के लि‍ए इजराइली कंपनी ने डीक्रिप्ट कि‍या आईफोन 
 
इसके बाद कैलिफोर्निया की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एफबीआई की ओर से कहा गया था कि‍ एफबीआई एप्पल की मदद के बिना भी थर्ड पार्टी से आईफोन को अनलॉक करने के तरीके ढूंढ रहा है। अगर यह तरीका काम कर जाता है तो एप्पल की मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बाद एफबीआई ने एक थर्ड पार्टी एजेंसी का सहारा लेते हुए लाखों रुपए लगाकर iPhone को अनलॉक कराया था। रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल की एक एजेंसी सेलेब्राइट ने  ऐसा किया है। कंपनी ने GrayKey नाम का एक डिवाइस तैयार किया है जो iPhone को डीक्रिप्ट कर सकता है। 
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