वाॅट्सऐप पर भेजेंगे पॉर्न तो पुलिस पकड़ लेगी, देश भर की पुलिस को दी जा रही है ट्रेनिंग

तकनीक का इस्तेमाल जितना अच्छी चीजों में होता है, उतना ही आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने में भी हाेता है। कई लोग पॉर्नोग्राफिक कंटेट को एक-दूसरे से शेयर करने के लिए वॉट्सऐप जैसे एंक्रिप्टिड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पुलिस के लिए इन अपराधियों तक पहुंचना और इन्हें पकड़ना काफी चुनौतीभरा काम होता है। लेकिन अब इन अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस चौकस हो रही है। देशभर की पुलिस को मैसेजिंग ऐप्स पर पॉर्नोग्राफिक कंटेंट के सर्कुलेशन को रोकने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। इस बढ़ते गोरखधंधे को राेकने के लिए पुलिस साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स से पूरी ट्रेनिंग लेगी।

Money Bhaskar

Jan 09,2019 04:25:00 PM IST

नई दिल्ली.

अगर आप भी मैसेजिंग ऐप्स पर धड़ल्ले से पॉर्नोग्राफिक कंटेंट को शेयर करते हैं, तो रुक जाइए। आपकी यह आदत आपको गिरफ्तार करवा सकता है। कानून की नजर में इस तरह की गतिविधियां अपराध की श्रेणी में आती हैं, लिहाजा इन पर अंकुश लगाने के लिए अब पुलिस ने कमर कस ली है। पुलिस मैसेजिंग और शॉर्ट वीडियो ऐप्स पर सर्कुलेट होने वाले आपत्तिजनक कंटेंट पर राेक लगाने के लिए तकनीकी बारीकियों की ट्रेनिंग ले रही है। दरअसल ये मैसेजिंग और शॉर्ट वीडियाे ऐप्स बच्चों को पॉर्नोग्राफी के लिए ग्रूम करने का ग्राउंड बनते जा रहे हैं। इनमें प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों काे फीचर करता हुआ अश्लील कंटेंट शेयर होता है। इसके अलावा और भी कई तरीके का आपत्तिजनक कंटेंट इसके जरिए भेजा जाता है। कई लोग पॉर्नोग्राफिक कंटेट को एक-दूसरे से शेयर करने के लिए वॉट्सऐप जैसे एंक्रिप्टिड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पुलिस के लिए इन अपराधियों तक पहुंचना और इन्हें पकड़ना काफी चुनौती भरा काम होता है। लेकिन अब इन अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस चौकस हो रही है। देशभर की पुलिस को मैसेजिंग ऐप्स पर पॉर्नोग्राफिक कंटेंट के सर्कुलेशन को रोकने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। इस बढ़ते गोरखधंधे को राेकने के लिए पुलिस साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स से पूरी ट्रेनिंग लेगी।

गृह मंत्रालय के मुताबिक इस ट्रेनिंग के तहत पुलिस वालों को सिखाया जा रहा है कि किसी रजिस्टर्ड नंबर से किसी एडमिनिस्ट्रेटर को कैसे ट्रेस किया जाए और कॉल्स करने के लिए वर्चुअल मोबाइल नंबर कैसे हासिल किया जाए। इस तरह के सेशन पुलिस वालों के लिए महीने में दो से तीन बार एक घंटे के लिए रखे जाते हैं। दरअसल तकनीक की कम समझ के चलते पुलिस वाले अक्सर ऐसे केसों में अपराधियों को पकड़ नहीं पाते हैं। इसलिए अब साइबर सिक्योरिटी से मदद ली जा रही है।

मुश्किल होता है वॉट्सऐप पर ट्रेस करना

वॉट्सऐप व अन्य कई मैसेजिंग ऐप्स पर रिवेन्ज पॉर्न, चाइल्ड पाॅर्न, इंटीमेंट तस्वीरें शेयर की जाती हैं। इन ऐप्स में ऐसे कंटेंट काे रोकने के लिए कोई मशीनरी नहीं होती है। ऐसे कंटेंट को ज्यादातर पर्सन-टू-पर्सन बेसिस पर या फिर ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाकर शेयर किया जाता है। ऐसे में लोगों को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। इसमें काफी कंटेंट ऐसा होता है जिसे यूजर्स खुद ही क्रिएट करके ऑनलाइन बेच देते हैं जिससे वे कुछ पैसा कमा सकें। पुलिस का कहना है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी और बाल शोषण के अधिकतर केस ग्रामीण क्षेत्रों से रिपोर्ट किए जा रहे हैं। दूसरी बात यह है कि प्राइवेसी की रक्षा के लिए इन वॉट्सऐप जैसे ऐप्स में काफी सिक्योरिटी चेक्स लगाए गए हैं जिनसे इनमें सेंध मारना भी आसान नहीं है।

राजीव चंद्रशेखर ने जताई थी चिंता

हाल ही में भाजपा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद को एक पत्र लिखकर कई सोशन मीडिया ऐप्स पर लगाम लगाने की बात कही है। उन्होंने लिखा कि इन ऐप्स पर बच्चों की सुरक्षा दांव पर लग रही है और बच्चों को फीचर करता हुआ अश्लील कंटेट परोसा जा रहा है। इस पत्र में राजीव ने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि शॉर्ट वीडियो मोबाइल ऐप्स गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध होने से आसानी से लोगों की पहुंच में आ जाते हैं। इन पर सुरक्षा के कोई मानक नहीं होने से कम उम्र के बच्चे भी इन पर अपने वीडियो अपलोड करते हैं। यह ऐप्स कम उम्र के बच्चों को पॉर्नोग्राफी के लिए ग्रूम करने का ग्राउंड बनते जा रहे हैं।

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