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शहरों के बाद गांवों में भी Jio की धूम, BSNL को छोड़ा पीछे

पहले से घाटे में चल रही सरकारी कंपनी के लिए एक और झटका

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नई दिल्ली.

सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL(भारत संचार निगम लिमिटेड) लंबे समय से वित्तीय संकटों से जूझ रही है। कभी देश की टेलीकॉम कंपनियों में अहम जगह रखने वाली बीएसएनएल को प्राइवेट ऑपरेटरों से कड़ी टक्कर मिल रही है। शहरों में तो बीएसएनएल काफी वक्त से संघर्ष कर रही है, लेकिन अब गांवों में भी BSNL की हालत खराब हो गई है। ग्रामीण भारत पर बीएसएनएल की पकड़ कमजोर हो गई है। कंपनी ने अपना कस्टमर बेस खो दिया है। उसकी जगह पर सबसे ज्यादा फायदा मिला है Jio को, जिसके ग्राहक पिछले दो साल में तेजी से बढ़े हैं।

 

10 साल में खो दिया आधे से ज्यादा मार्केट शेयर

कुछ वक्त पहले तक गांवों में बीएसएनएल का बोलबाला था। लेकिन प्राइवेट ऑपरेटर्स के बेहतर टैरिफ और मार्केटिंग स्किल के चलते बीएसएनएल का मार्केट कम होता गया। पिछले दस वर्षों में BSNL ने गांवों में अपना आधे से भी ज्यादा वायरलेस मार्केट बेस खो दिया है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के मुताबिक जून, 2009 के आखिर में गांवों में बीएसएनएल का वायरलेस मार्केट 15.36 फीसदी था, जो दिसंबर, 2018 के आखिर में घटकर सिर्फ 6.82 फीसदी रह गया। यहां तक कि सितंबर, 2016 में लाॅन्च होने वाले Reliance Jio के पास 19.01 फीसदी का मार्केट शेयर है।

 

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किस कंपनी का कितना है ग्रामीण मार्केट शेयर

ग्रामीण मार्केट शेयर के मामले में Vodafone Idea (वोडाफोन आइडिया) 41.76 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है। इसके बाद 31.91 फीसदी के साथ Bharti Airtel (भारती एयरटेल) है। अगर बात की जाए कुल यूजर बेस में ग्रामीण सब्सक्राइबर्स की हिस्सेदारी की तो BSNL तीनों प्राइवेट ऑपरेटर्स से पीछे है। वोडाफोन आइडिया के पास 52.71 फीसदी ग्रामीण यूजर बेस है, भारती एयरटेल के पास 49.56 फीसदी, Reliance Jio के पास 35.87 फीसदी यूजर बेस है, जबकि बीएसएनएल के पास सिर्फ 31.51 फीसदी यूजर बेस है। यह भी तब जब सितंबर, 2018 के आखिर से दिसंबर, 2018 के आखिर तक कुल वायरलेस सब्सक्राइबर्स में ग्रामीण सब्सक्राइबर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 44.94 फीसदी हो गई।

 

 

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कमजोर फैसलों ने डुबाया बीएसएनएल को

विश्लेषकों की मानें तो बीएसएनएल की हालत के पीछे कई कारण हैं। इसमें समय रहते फैसले न लेना, अधिक पगार पर बिना ट्रेनिंग वाले लोगों को रखना, समय रहते नेटवर्क का फैलाव और अपग्रेडेशन न करना शामिल है। उदाहरण के तौर पर कंपनी को निजी कंपनियों से एक साल पहले ही 3G सेवाएं लॉन्च करने के लिए स्पेक्ट्रम मिल गया था, लेकिन कंपनी इस मौके को भुना न सकी। जब निजी कंपनियों को मौका मिला तो उन्होंने न सिर्फ यूजर्स को बेहतर सेवाएं दी, बल्कि बेहतर प्लान और पैकेज भी लॉन्च किए। इससे बीएसएनएल मात खा गया।

 

 

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