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Home » इंडस्ट्री » आईटी/टेलिकॉमReliance Jio gives big shock to Modi Govt, Mukesh Ambani shocks to Narendra Modi Govt

Jio ने मोदी सरकार को दिया ऐसा झटका, 4400 करोड़ रु का हुआ नुकसान

सरकार ने संसद में खुद दी नुकसान की पूरी डिटेल

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नई दिल्ली. मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के टेलिकॉम वेंचर रिलायंस जियो इन्फोकॉम (reliance jio infocomm) की लॉन्चिंग के बाद से टेलिकॉम कंपनियां लगातार नुकसान उठा रही हैं। कई कंपनियों का प्रॉफिट घटा तो कई कंपनियां बिकने तक मजबूर हो गई हैं। दिलचस्प है कि जियो (Jio) के झटके से केंद्र सरकार के खजाने को भी तगड़ा झटका लगा है। हाल में सरकार ने खुद संसद में माना कि इससे उसके रेवेन्यू में लगभग 4400 करोड़ रुपए की कमी आ चुकी है। कैसे हुआ नुकसान…

 

सरकार ने संसद में खुद दी डिटेल

सरकार ने संसद में माना कि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान टेलिकॉम सेक्टर से सरकार का रेवेन्यू लगभग 22 फीसदी घट गया है। सरकार ने कहा कि सर्विस प्रोवाइडर्स को सर्विसेज की बिक्री से होने वाली कमाई में कमी के चलते ऐसा हुआ है। सरकार टेलिकॉम सर्विसेज की बिक्री से सर्विस प्रोवाइडर यानी टेलीकॉम कंपनियों को मिलने वाले रेवेन्यू का एक हिस्सा लाइसेंस फी और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (SUC) के तौर पर वसूलती है। गौरतलब है कि मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की रिलायंस जियो (Reliance Jio) का सॉफ्ट लॉन्च 25 दिसंबर, 2015 को हुआ था और उसकी सेवाओं को पब्लिकली सितंबर, 2016 में लॉन्च किया गया था। एक साल में कितना घटा रेवेन्यू...

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एक साल में 4400 करोड़ रुपए घटा रेवेन्यू

टेलीकॉम मिनिस्टर द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 में लाइसेंस फी से सरकार का रेवेन्यू 18.12 फीसदी घटकर 10,670.6 करोड़ रुपए रह गया, जो  2016-17 के 13,032.9 करोड़ रुपए से लगभग 2360 करोड़ रुपए कम था।

वहीं 2017-18 में एसयूसी 29 फीसदी घटकर 4,983.75 करोड़ रुपए रह गया, जो  एक साल पहले समान अवधि के 7,048 करोड़ रुपए से 2050 करोड़ रुपए कम रहा था। एसयूसी की गणना मोबाइल ऑपरेटर्स को आवंटित स्पेक्ट्रम की मात्रा के आधार पर की जाती है। इस प्रकार 2016-17 की तुलना में 2017-18 में टेलिकॉम सेक्टर से सरकार के रेवेन्यू में लगभग 4400 करोड़ रुपए की कमी आई। इंडस्ट्री को हुआ कितना नुकसान...

 

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30 हजार करोड़ रुपए घटा इंडस्ट्री का रेवेन्यू

टेलिकॉम मिनिस्टर मनोज सिन्हा ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा, ‘एजीआर में कमी के चलते एसयूसी रिसीट्स पर आधारित एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) में कमी आई है।’ वर्ष 2017-18 में इंडस्ट्री का एजीआर 18.62 फीसदी घटकर 1,30,844.90 करोड़ रुपए रह गया, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 1,60,787.90 करोड़ रुपए रहा था। इसकी वजह सरकार को लाइसेंस फी और एसयूसी से होने वाली कमाई में कमी रही।

 
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