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जियो को टावर और फाइबर एसेट बेच सकेगी Rcom, ट्रिब्यूनल ने दी मंजूरी

आरकॉम के लिए अपने 25 हजार करोड़ रुपए एसेट मोनेटाइजेशन प्रोग्राम को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

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नई दिल्ली. अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के लिए अपने 25 हजार करोड़ रुपए एसेट मोनेटाइजेशन प्रोग्राम को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल नेशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने शुक्रवार को कर्ज के बोझ से दबी आरकॉम को अपनी टॉवर और फाइबर एसेट्स बेचने को मंजूरी दे दी। एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम की एसेट सेल पर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए स्टे को खारिज कर दिया था।

 

 

एस्क्रो अकाउंट में जमा होगी रकम
आरकॉम के स्पोक्सपर्सन ने एक स्टेटमेंट में कहा, ‘आज पारित किए गए एंटरिम ऑर्डर से बाकी स्टे खारिज हो गया और उसके लिए सेल डीड्स को लागू करने और उससे मिली धनराशि को एसबीआई में एक एस्क्रो अकाउंट में जमा करने का रास्ता साफ हो गया। इन आदेशों के आधार पर आरकॉम अब अपने एसेट मोनेटाइजेशन प्लान को पूरा कर सकती है, जिसके दायरे में स्पेक्ट्रम, टावर, फाइबर, एमसीएन (मीडिया कन्वर्जेंस नोड्स) और रियल एस्टेट शामिल हैं। ’

 

 

एनसीएलएटी के आदेश पर होगा धनराशि का वितरण
स्पोक्सपर्सन ने कहा कि कंपनी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आज अपनी टावर और फाइबर एसेट की ब्किरी पर लगे स्टे को वैकेट कराने के लिए एनसीएलएटी में पहुंची थी।
स्पोक्सपर्सन ने कहा कि सिर्फ टावर और फाइबर एसेट की बिक्री से मिली धनराशि का वितरण एनसीएलएटी के 18 अप्रैल, 2018 के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, ‘आरकॉम को अगले कुछ हफ्तों के भीतर अपने 25 हजार करोड़ रुपए के डेट रिडक्शन प्लान के पूरा होने का भरोसा है।’
स्पोक्सपर्सन के मुताबिक लीगल एडवाइस के आधार पर आरकॉम माइनॉरिटी इन्वेस्टर्स के दावे को ‘200-300 करोड़ रुपए के बीच मानती है।’

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपीली ट्रिब्यूनल के पास भेजा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ही आरकॉम की सब्सिडियरी रिलायंस इन्फ्राटेल पर अपनी एसेट्स की बिक्री पर लगाई गई रोक को हटाने से इनकार करते हुए मामले को नेशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल के पास भेज दिया और अपीली ट्रिब्यूनल को इस मामले में 4 हफ्ते के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए थे।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें आरकॉम को स्पेक्ट्रम, फाइबर, रियल एस्टेट और स्विचिंग नोड्स की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। इसमें विस्तृत आदेश मिलने का इंतजार है।
रिलायंस कम्युनिकेशन और उसके लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व बैंक ऑफ बड़ौदा ने इन दोनों स्टे ऑर्डर्स को चुनौती दी थी।

 

 

2 मामलों में क्रेडिटर्स को मिला था स्टे
एचएसबीसी डेजी इन्वेस्टमेंट (मॉरिशस) ने टॉवर एसेट सेल मामले में 7 मार्च को एनसीएलटी में स्टे हासिल किया था। एचएसबीसी डेजी इन्वेस्टमेंट (मॉरिशस), रिलायंस इन्फ्राटेल में एक ऑफशोर इन्वेस्टर है।
वहीं बॉम्बे हाई कोर्ट ने 8 मार्च को आर्बिट्रेशन कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें आरकॉम और उसकी सब्सिडियरीज रिलायंस इन्फ्राटेल व रिलायंस टेलिकॉम पर एसेट बिक्री पर रोक लगा दी गई थी।

 

 

आरकॉम पर है इरिक्सन का 1100 करोड़ बकाया
वहीं आरकॉम को कर्ज देने वाली एक अन्य कंपनी इरिक्सन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड भी आर्बिट्रेशन कोर्ट से स्टे हासिल करने में कामयाब रही थी। इरिक्सन ने दलील दी थी कि यदि बिक्री हो जाती है तो उसके लिए अपना 1100 करोड़ रुपए का बकाया वसूलना मुश्किल हो जाएगा।
आरकॉम पर एसबीआई के अगुआई वाले लेंडर्स के कंसोर्टियम का 45 हजार करोड़ रुपए बकाया है। बैंकों का दावा है कि वे एसेट सेल के क्रम में अपने 25 हजार करोड़ रुपए की वसूली करेंगे।

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