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स्‍पेक्‍ट्रम 'चक्रव्‍यूह' और प्राइस वार से टेलिकॉम सेक्‍टर बेदम, क्या राहत पैकेज आएगा काम

2016 में रिलायंस जियो की एंट्री ने पूरी टेलिकॉम इंडस्‍ट्री का गणित बिगाड़ दिया।

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नई दिल्ली। स्‍पेक्‍ट्रम की कैलकुलेशन से भारतीय टेलिकॉम सेक्‍टर अभी उबर ही रहा था कि प्राइस वार के दौर ने पूरी इंडस्‍ट्री को एक नई मुसीबत में उलझा दिया। 2016 में रिलायंस जियो की एंट्री ने पूरी टेलिकॉम इंडस्‍ट्री का गणित बिगाड़ दिया। जियो के शुरुआती फ्री के ऑफर के सामने एयरटेल, आइडिया, वोडाफोन जैसी कंपनियां टिक नहीं पाई। कंपनियों के मुनाफे को तगड़ा झटका लगा। नतीजा यह रहा कि 2जी स्‍कैम के बाद भी एक्‍सपेंशन मोड में दिख रहे इस सेक्‍टर में कंसॉलिडेशन आने लगा। कई कंपनियों ने अपने ऑपरेशन बंद कर दिए और कई ने मर्जर का एलान कर दिया। इसके चलते हजारों लोगों की नौकरियां गईं। अब नजर है कि राहत पैकेज इंडस्ट्री के कितने काम आएगी।  

 

इंडस्‍ट्री में प्राइस वार  के चलते कंपनियों का मुनाफा काफी तेजी से घटा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल टेलिकॉम इंडस्‍ट्री से जुड़े 40 हजार लोग बेरोजगार हो चुके हैं। वहीं, अगले 5-6 महीने में 90 हजार लोग और बेरोजगार हो सकते हैं। यह ध्‍यान देने वाली बात यह है कि 2जी घोटाले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी 122 लाइसेंस रद्द कर दिए। इसके बाद हुई स्‍पेक्‍ट्रम नीलामी में कई कंपनियां शामिल नहीं हुई और कुछ ने भारत से कारोबार समेटना ही बेहतर समझा।

 

 

इंडस्ट्री पर क्यों बना संकट......

 

पिछले 1.5 साल में इंडस्ट्री में कई बदलाव
फॉर्च्युन फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि राहत पैकेज से कुछ दबाव कम होगा, लेकिन रिलायंस जियो के आने के बाद से ही इंडस्ट्री पर जिस तरह का दबाव बना है, उसे दूर होने में वक्त लगेगा। उनका कहना है कि जियो के आने के बाद से फ्री डाटा और वॉइस कॉल को लेकर इंडस्ट्री में प्राइसिंग वार शुरू हो गया। कंपनियों ने डाटा स्पीड बेहतर रखने और वर्चुअल नेटवर्क प्लेटफॉर्म को मजबूत रखने पर काम करना शुरू कर दिया, जिससे उनका खर्च लगातार बढ़ा और साथ में कर्ज बढ़ने और मार्जिन घटने का दबाव भी। जिससे इंडस्ट्री में जॉब संकट भी बढ़ गया और नए निवेश में कमी आई। नतीजा कंसोलिडेशन के रूप में सामने आया। कई कंपनियों का कारोबार घट गया। 

 

 

कैसे गिरा दूसरी कंपनियों का मुनाफा

 

Airtel

 

तिमाही मुनाफा % में घटा एक साल पहले
Q1 2018 367 करोड़ 75% 1462 करोड़
Q2 2018 343 करोड़ 76% 1461 करोड़
Q3 2018 306 करोड़  39% 504 करोड़
Q4 2017 373 करोड़ 71.7% 520 करोड़


 

Idea

 

तिमाही घाटा एक साल पहले
Q1 2018 816 करोड़ 217 करोड़ मुनाफा
Q2 2018 1106 करोड़ 91.5 करोड़ मुनाफा
Q3 2018 1285 करोड़  384 करोड़ घाटा
Q4 2017 327.9 करोड़  451.9 करोड़ मुनाफा

 

जारी रहेगा इंडस्ट्री पर जियो का दबाव
ठक्कर के अनुसार इंडस्ट्री में प्रतियोगिता इस तरह से बढ़ गई है कि कंपनियां अभी भी नए-नए आकर्षक प्लान ऑफर कर रही हैं। जिसका मतलब है कि प्राइसिंग वार अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कम से कम 1 साल अभी सेक्टर पर दबाव कम होता नहीं दिख रहा है। नए निवेश या दूसरे मसलों पर आगे सरकार किस तरह के कदम उठाती है, यह देखना भी अहम होगा। 

 

किन मुद्दों पर अभी राहत का इंतजार
टेलिकॉम इंडस्ट्री ने लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज को कम करना, जीएसटी रेट को कम करने की डिमांड, औटोमैटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई, यूनिवर्सल सर्विसेज ऑब्लिगेशन फंड लेबी को हटाए जाने जैसी डिमांड भी सरकार से की थी, लेकिन इनपर इंडस्ट्री को किसी तरह की राहत नहीं मिली है। बता दें कि अभी टेलिकॉम ऑपरेटर्स को 18 फीसदी जीएसटी सहित 29 से 32 फीसदी टैक्स, 8 फीसदी लाइसेंस फीस और 3 से 6 फीसदी स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज देना होता है।  

 

50 हजार करोड़ निवेश की जरूरत 
घरेलू रेटिंग एजेंसी इकरा ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा था कि टेलिकॉम सेक्टर को स्टेबल होने के लिए हर साल 50 हजार करोड़ रुपए निवेश की जरूरत है। इकरा की रिपोर्ट के अनुसार टेलिकॉम सेक्टर पर दबाव बना हुआ है, जिसकी मुख्‍य वजह जियो से बढ़ता कॉम्पिटीशन है। टेलिकॉम इंडस्ट्री मुश्किल के दौर से गुजर रही है। जिसकी वजह से फाइनेंशियल ईयर 2018 में उनके मुनाफे में कमी आ सकती है।

 

6.5 लाख करोड़ निवेश की तलाश में सरकार 
सरकार को उम्‍मीद है कि नेशनल टेलिकॉम पॉलिसी 2018 के जरिए वित्तीय दबाव झेल रही इंडस्ट्री फिर से ग्रोथ के रास्‍ते पर आ जाएगी। बता दें कि ट्राई ने नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी 2018 की सिफारिश करते वक्‍त कहा था कि उसका उद्देश्‍य सेक्‍टर में 2022 तक 100 अरब डॉलर यानी 6.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश बढ़ाने का है। वहीं, इस पॉलिसी का उद्देश्‍य इस सेक्‍टर में 20 लाख नई नौकरियां पैदा करना है। 

इंडस्ट्री में नौकरी का संकट 
प्राइसिंग वार के चलते कंपनियों का मुनाफा घट गया है, जिससे इंडस्ट्री में हजारों नौकरियां जा चुकी हैं, वहीं आगे भी 80 से 90 हजार नौकरियों पर संकट है। CIEL HR सर्विसेज द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल टेलीकॉम इंउस्ट्री से जुड़े 40 हजार लोग बेरोजगार हो चुके हैं। वहीं, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले 5-6 महीने में बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है। कुल 80-90 हजार लोग बेरोजगार हो सकते हैं। 

आगे पढ़ें, क्या राहत पैकेज आएगा काम...........

 

 

सरकार ने दिया राहत पैकेज 
कर्ज में दबी टेलिकॉम कंपनियों को राहत देते हुए सरकार ने नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के पेमेंट के लिए 10 की बजाए 16 साल का समय कर दिया है। वहीं, एक सर्किल में स्पेक्ट्रम होल्डिंग की सीमा 25 से 35 फीसदी हो गई है। हालांकि लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज जैसी कुछ जरूरी डिमांड अभी भी नहीं मानी गई है।


ये होंगे फायदे.....


6 साल तक हर साल 7000 करोड़ बचेगा कैश
घरेलू रेटिंग एजेंसी इकरा के सेक्टर हेड और वाइस प्रेसिडेंट हर्ष जगनानी का कहना है कि स्पेक्ट्रम के पेमेंट के लिए 6 साल ज्यादा मिलने से कंपनियों के पास कैश फ्लो बढ़ जाएगा। इकरा के अनुमान के अनुसार पूरे टेलिकॉम इंडस्ट्री के पास अगले 6 साल तक हर साल 7000 करोड़ रुपए का कैश बचेगा। कंपनियों के पास कैश बचने से वे इसका इस्तेमाल कर्ज चुकाने या ऑपरेशंस को मजबूत करने में कर सकती हैं। 

 

आसान होगा कंसोलिडेशन प्रॉसेस
जगनानी का कहना है कि सरकार ने स्पेक्ट्रम होल्डिंग लिमिटे में भी इंडस्ट्री को छूट दी है। नए नियम के अनुसार एक सर्किल में ओवरआल कैप 25 से बढ़कर 35 फीसदी होगा। इसके अलावा कैबिनेट ने 50 फीसदी बैंड स्पेसिफिक कैप को 50 फीसदी कंबाइंड स्पेक्ट्रम से रिप्लेस किया है। इससे आगे कंसोलिउेशन की प्रक्रिया आसान होगी, जो इंडस्ट्री की जरूरत है। 

 

सरकार को कैसे होगा फायदा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार ने स्पेक्ट्रम के पेमेंट के लिए 10 की बजाए 16 साल का समय दे दिया है। यानी एक तरह से लोन भरने का टेन्योर बढ़ा दिया गया है। इससे कंपनियों का इंटरेस्ट कंपोनेंट भी बढ़ जाएगा। यानी कंपनियों को इंटरेस्ट और दूसरे अन्य लेवी के रूप में सरकार को पहले से ज्यादा पेमेंट करना होगा। बता दें कि टेलिकॉम कंपनियों पर जो कर्ज है, उसमें से ज्यादातर कर्ज सरकार का ही है जो स्पेक्ट्रम खरीदने में कंपनियों का खर्च आया है। 

 

आइडिया को सबसे ज्यादा फायदा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार ने स्पेक्ट्रम होल्डिंग की लिमिट बढ़ाई है, इसका सबसे ज्यादा फायदा आइडिया को होगा। आगे आइडिया और वोडाफोन का मर्जर होना है। उनकी कंबाइंड कैपेसिटी बढ़ेगी, जिससे बिजनेस बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

 

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