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वोडाफोन-Idea मर्जर में स्पेक्ट्रम पर फंस सकता है पेंच, DoT मांगेगा कानूनी राय

डॉट वोडाफोन-आइडिया मर्जर के क्रम में प्रशासनिक तौर पर वोडाफोन को स्पेक्ट्रम अलोकेट करने पर लीगल ओपीनियन मांगेेेेगा।

DoT seeking legal opinion on Vodafone-Idea merger: Sources

 

नई दिल्ली. डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशंस (डॉट) वोडाफोन-आइडिया मर्जर के क्रम में प्रशासनिक तौर पर वोडाफोन को स्पेक्ट्रम अलोकेट किए जाने के मसले पर लीगल ओपीनियन मांगने जा रहा है। इंडस्ट्री से जुड़े एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।

मर्जर एंड एक्विजिशन (एमएंडए) गाइडलाइन्स के तहत किसी एंटिटी द्वारा स्पेक्ट्रम होल्डिंग्स हासिल करने पर खरीददार को मार्केट डिटरमाइंड प्राइस और एंट्री फी के बीच के अंतर का भुगतान करना होता है।

 

 

वोडाफोन से 2015 में भी हुई थी ऐसी डिमांड

सूत्रों ने कहा कि 4.4 मेगाहर्ट्ज के स्पेक्ट्रम के लिए ऐसे पेमेंट लाइसेंस वैलिडिटी की बाकी अवधि के लिए प्रो-रेडा बेसिस पर किए जाने हैं और डॉट ने 2015 में वोडाफोन ग्रुप की कंपनियों के मर्जर के वक्त भी वोडाफोन को ऐसी ही डिमांड भेजी थीं।

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था यह आदेश

वोडाफोन ने टेलिकॉम डिसप्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीली ट्रिब्यूनल (टीडीसैट) ने इन डिमांड्स को चैलेंज किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों पर डिमांड का आंशिक भुगतान (6700 करोड़ रुपए में से 2000 करोड़ रुपए) कर दिया गया था।  

 

 

डॉट मांगेगा कानूनी राय

इंडस्ट्री सोर्सेस ने कहा कि अब यह मुद्दा वोडाफोन द्वारा हासिल किए जा रहे आइडिया के स्पेक्ट्रम में सामने आ रहा है और ऐसे में क्या डॉट को धनराशि के अंतर के लिए आइडिया सेल्युलर से डिमांड करनी चाहिए।

 

 

आइडिया से भी हो सकती है डिमांड

इस मसले पर डॉट लीगल ओपीनियन मांगने जा रहा है कि क्या वोडाफोन को प्रशासनिक तौर पर अलोकेट 4.4 मेगाहर्ट्ज स्पेक्टम के मार्केट डिटरमाइंड प्राइस और चुकाई गई एंट्री फी के अंतर की धनराशि की आइडिया से डिमांड की जा सकती है।

यह भी लीगल ओपीनियन मांगी जा रही है कि क्या यह कोर्ट की जानबूझकर की गई अवमानना होगी।

 

 

 

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