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चाइनीज मोबाइल कंपनियों ने ऐसे बिगाड़ा देसी कंपनियों का खेल, किया 48.9% मार्केट पर कब्जा

भारत के स्मार्टफोन बाजार में चीन की मोबाइल कंपनियों का दबदबा कायम है।

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नई दि‍ल्‍ली. करीब दो साल में चीन की मोबाइल कंपनियों ने भारत के मार्केट का डायनमिक्स ही बदल कर रख दिया है। एक समय माइक्रोमैक्स,लावा जैसी देसी कंपनियां टॉप-5 कंपनियों में शामिल हो गई थी। वह पूरी तरह से अब दौड़ से बाहर हैं। देश के 48.9 फीसदी से ज्यादा मार्केट पर चीन की कंपनियों का कब्जा है। यहीं नहीं अक्टूबर में तो लंबे समय से भारतीय मार्केट पर कब्जा करने वाली सैमसंग को शाओमी ने नंबर वन पोजिशन से हटा दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि केवल एक साल में चाइनीज कंपनियों ने ऐसा क्या किया, जिससे उन्होंने भारतीय स्मार्टफोन मार्केट पर कब्जा कर लिया....
 
 
एक साल में ही टॉप 5 से बाहर हुईं भारतीय कंपनि‍यां
 
चाइनीज मोबाइल कंपनियों का भारत में कैसे दबदबा बड़ा है ऐसे समझा जा सकता है कि इस  समय सबसे अधिक बिकने वाले 5 स्मार्टफोन ब्रांड में से 4 चीन के हैं। वहीं, भारत के स्‍मार्टफोन मार्केट में चाइनीज कंपनि‍यों का मार्केट शेयर करीब 48.9 फीसदी है। जबकि‍ भारतीय कंपनि‍यों का कुल मार्केट शेयर 13.5 फीसदी है। इनमें सभी भारतीय कंपनि‍यां (Intex, Karbonn, Lava, Micromax, & Reliance Jio) शामि‍ल हैं। 
 
 
इस साल जुलाई-सितंबर की तिमाही में भारत में कुल मिलाकर 3.9 करोड़ स्मार्टफोन बिके। इंटरनेशनल डाटा कॉरपोरेशन (IDC) के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान भारत में बिके कुल स्मार्टफोन में से लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा शीर्ष पांच कंपनियों का रहा। इसमें अगर सैमसंग को छोड़ दें तो बाकी चारों ब्रांड शाओमी, लेनोवो, वीवो और ओप्पो चीन के हैं। इतना ही नहीं चीन की कई और कंपनियां भी भारतीय स्मार्टफोन बाजार में अपनी पकड़ को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही हैं। इनमें वनप्लस व जियोनी भी शामि‍ल हैं। हाल ही में एम7 पावर स्मार्टफोन पेश करने वाली जियोनी इंडिया के निदेशक डेविड चांग ने कहा, ‘भारत हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण बाजार है। हम मार्च 2018 तक शीर्ष पांच कंपनियों में आना चाहते हैं। कंपनी इसके लिए नए फोन लाएगी और अपने नेटवर्क का विस्तार करेगी। 
 
 
तीसरी ति‍माही 2015 मार्केट शेयर तीसरी ति‍माही 2016 मार्केट शेयर तीसरी ति‍माही 2017 मार्केट शेयर

सैमसंग  

23.3%

सैमसंग  

23.0%

सैमसंग  

23.5%

माइक्रोमैक्‍स    

16.2%

लेनोवो 

9.6%

शाओमी

23.5%

इंटेक्‍स 

10.5%

माइक्रोमैक्‍स    

7.5%

लेनोवो 

9.0%

लेनोवो 

9.3%

शाओमी 

7.4%

वीवो 

8.5%

लावा 

7.5%

रि‍लायंस

7.0%

ओप्‍पो 

7.9%

अन्‍य 

33.2%

अन्‍य 

45.5%

अन्‍य 

27.7%

 
 
 
 
क्‍या है चाइनीज कंपनि‍यों की पॉलि‍सी 
 
आईडीसी इंडिया के सीनि‍यर मार्केट एनलि‍स्‍ट जयपाल सि‍ंह ने कहा कि चाइनीज कंपनियां वैश्विक स्तर की योजना के साथ बाजार को अपने कब्जे में करने की कोशिश करती हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया  सकता है कि‍‍ शाओमी ने रेडमी नोट 4 के 40 लाख डि‍वाइस बेचे हैं। इसके बाद यह देश में सबसे ज्‍यादा बेचा जाने वाला फोन है। वहीं, हाल ही में लॉन्‍च कि‍ए रेडमी 5A के शुरुआती 50 लाख ग्राहकों को कंपनी 1000 रुपए की छूट दे रही है। ऐसे में कंपनी मानकर चल रही है कि‍ इस फोन की 50 लाख डि‍वाइस तो बि‍क ही जाएंगी। 
 
फ्रेश MBA स्‍टूडेंट्स आए काम  
 
आईडीसी इंडिया के सीनि‍यर मार्केट एनलि‍स्‍ट जयपाल सि‍ंह कहते हैं कि‍ चायनीज कंपनि‍यों ने 2 तरह की रणनीति‍ अपनाई। इसमें Oppo, Vivo और Gionee ने ऑफलाइन मार्केटि‍ंग की और हर छोटे मोबाइल स्‍टोर तक पहुंच बनाई। इन कंपनि‍यों ने मोबाइल स्‍टोर पर फ्रेश MBA स्‍टूडेंट्स को अपनी मार्केटिंग के लि‍ए तैयार कि‍या कि‍ जो भी स्‍मार्टफोन खरीदने आए उसे हमारी कंपनी का फोन लेने की सलाह दें। 
 
ऑनलाइन बाजार में सस्‍ते फोन लाने की प्‍लानि‍ंग 
 
Oppo, Vivo और Gionee से अलग Xiaomi, lenovo और coolpad ने ऑनलाइन मार्केट में उतर सस्‍ते फोन लाने की योजना बनाई। यही कारण है कि‍ Samsung और Xiaomi के कई फोन के फीचर एक जैसे होने के बावजूद Samsung के स्‍मार्टफोन Xiaomi और lenovo के फोन से 4-5 हजार रुपए तक महंगे हैं। ऐसे में लोग चाइनीज कंपनि‍यों के फोन लेना पसंद करते हैं। 
 
ज्‍यादा प्रोडक्‍शन का मि‍ल फायदा 
 
भारतीय कंपनि‍यां जहां सि‍र्फ भारत के लि‍ए फोन का नि‍र्माण कर रही थीं। वहीं, चाइनीज कंपनि‍यां ग्‍लोबल लेवल पर फोन लॉन्‍च कर कई गुना ज्‍यादा डि‍वाइस का प्रोडक्‍शन करती हैं। ऐसे में ज्‍यादा प्रोडक्‍शन के चलते उन्‍हें मार्जि‍न भी ज्‍यादा मि‍लता है। ये एक बड़ा कारण है कि‍ भारतीय कंपनि‍यां चाइनीज कंपनि‍यों को टक्‍कर नहीं दे पाईं। 
 
Jio ने तोड़ दी कमर  
 
2016 में रि‍लायंस ने जि‍यो 4G लॉन्‍च कि‍या और लोगों को अनलि‍मि‍टेड फ्री इंटरनेट डाटा दि‍या। ऐसे में स्‍मार्टफोन मार्केट में बूम आ गया। इसका नुकसान भारतीय मोबाइल कंपनि‍यों को हुआ 3G फोन मार्केट से बाहर हो गए। भरतीय कंपनि‍यां इंतजार में थीं कि‍ 3G फोन के लि‍ए मार्केट में स्‍पेस बनेगा, लेकि‍न एेसा नहीं हुआ। 
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