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Tech in Gadgets: जानिए आखिर क्‍या है क्‍यूआर कोड, कैसे यह काम करता है?

क्‍यूआर कोड का यूज आपने पेटिएम या मोबाइल वॉलेट से पेमेंट के लिए जरूर किया होगा..

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नई दिल्‍ली. पेटिएम, मोबीक्विक जैसे मोबाइल वॉलेट से पेमेंट करते समय या व्‍हाट्सएप को कम्‍प्‍यूटर पर खोलने के लिए ज्‍यादातर लोगों ने क्‍यूआर कोड (QR Code) का यूज जरूर किया होगा। सिक्‍योर-सेफ ट्रांजेक्‍शन और बिलिंग के लिए इसका यूज धड़ल्‍ले से हो रहा है। क्यूआर कोड ब्‍लैक एंड व्‍हाइट पैटर्न के छोटे स्क्वार के रूप में होते हैं। इन्‍हें आप प्रोडक्‍ट, मैगजीन और न्‍यूज पेपर में देख सकते हैं। पर बड़ा सवाल यह उठता है कि QR Code आखिर होता क्‍या है? किन किन जगहों क्‍यूआर कोड का यूज होता है? इसके पीछे का मैकेनिज्‍म क्‍या है। आखिर यह काम कैसे करता है।  Tech in gadgets के इस अंक में आज हम इसी के बारे में जानेंगे।   

 

क्‍यूआर कोड क्‍या है? 
क्‍यूआर कोड में QR का मतलब Quick Response होता है। दरअसल इन्‍हें तेजी के साथ यानी क्विकली रीड करने के लिए बनाया गया है, इसीलिए इन्‍हें क्‍यूआर कोड कहा जाता है। यह पुराने बारकोड का अपग्रेडेड वर्जन है। इसे डेडिकेटेड क्यूआर कोड रीडर या फिर स्‍मार्टफोन के जरिए पढ़ा जाता है। ज्‍यादातर स्‍मार्टफोन में  क्‍यूआर कोड को पढ़ने की फैसेलिटी होती है। अगर आपके फोन में इस तरह की फैसेलिटी नहीं हो तो आप QR Code Reader एप इन्‍साटॉल कर सकते हैं। अलग-अलग OS प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग एप  मिल सकते हैं। 

 

2 डाइमेंशन होते हैं क्‍यूआर कोड के 
क्यूआर कोड (QR Code) को पेमेंट सर्विस के लिए इसलिए ज्‍यादा सेफ माना जाता है, क्‍योंकि इसमें दो डायमेंशनल बारकोड होते हैं। इन्‍हें क्यूआर कोड रीडर या स्‍मार्टफोन से ही रीड किया जाता है। क्यूआर कोड को खास तरह की जानकारी को सांकेतिक शब्दों में बदलने के लिए प्रयोग किया जाता है। क्यूआर कोड को टेक्‍स्‍ट, ईमेल, वेबसाइट, फोन नंबर और अन्‍य से सीधा लिंक किया जा सकता है। जब आप किसी सामान पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करते हैं, तब आप सीधे इन साइट पर जा सकते हैं, जहां पर उस प्रोडक्‍ट के बारें में अधिक जानकारी होती है। 


बारकोड की अगली पीढ़ी है क्‍यूआर कोड 
जैसा कि पहले ही बताया गया है कि क्‍यूआर कोड पुराने बारकोड का अपडेटेड वर्जन हैं। बार कोड का यूज शॉपिंग माल या बड़े ग्रोसरी स्‍टोर पर प्रोडक्‍ट की प्राइसिंग, बिलिंग काउंटिंग, टैगिंग आदि के लिए होता है। इसके चलते हमारी लाइफ आसान तो हुई, लेकिन इसकी लिमिटेशन है। जैसे..  

 

1- वन डायमेंशनल: बारकोड केवल 1 डायमेंशनल (1D) होता है। डेटा को एक खास एंगल में स्‍टोर करता है। अगर स्‍कैनर सही एंगल में न हो, तो यह बारकोड स्‍कैन नहीं होगा।

2- स्‍टोरेज कैपेसिटी: बारकोड में सिर्फ 20 कैरेक्‍टर ही स्‍टोर हो सकते हैं।

3- साइज: जितने ज्‍यादा कैरेक्‍टर होंगे, बारकोड उतना लंबा होगा। एक छोटे से प्रोडक्‍ट पर लंबा बारकोड प्रिंट करना एक चुनौती है।

4- कमजोर: बारकोड कुछ समय बाद एक्‍सपायर हो सकता है। साथ ही कोड पर किसी तरह का स्‍क्रैच आने पर यह काम करना बंद कर देता है। 

5 - एन्कोडिंग: बारकोड केवल अल्फान्यूमेरिक कैरेक्‍टर को एनकोड कर सकते हैं। 


क्‍यूआर कोड ने खत्‍म कर दी बारकोड की लिमिटेशन 

बारकोड की इन्‍ही लिमिटेशन्स पर काबू पाने के लिए 2D बारकोड डेवलपमेंट पर काम शुरू हुआ 1994 में कार निर्माता कंपनी टोयोटा समूह के एक जापानी सहायक, डेन्सो वेव द्वारा इसे डेवलप किया गया। क्यूआर कोड पहली बार ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल और रिटेल इंडस्ट्रीज में इन्वेंटरी को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। अब उनका इस्‍तेमाल लगभग हर क्षेत्र में किया जाने लगा है। खासकर पेमेंट और फाइनेंस के सेक्‍टर में इसक यूज तेजी के साथ हो रहा है। 

 
क्‍यूआर कोड के फायदे 
1-  स्‍टोरेज कैपेसिटी: QR कोड 7,089 न्यूमेरिक कैरक्टर्स (बिना स्‍पेस के) स्टोर कर सकते हैं। 2,953 अल्फान्यूमेरिक कैरक्टर्स स्‍पेस और विराम चिह्न के साथ स्‍टोर कर सकते हैं।

2 - छोटा आकार: एक ही डेटा के लिए क्यूआर कोड, बारकोड की तुलना में कम जगह लेता है। 

3- ओरिएंटेशन: QR कोड को 360 डिग्री किसी भी एंगल से स्कैन किया जा सकता है।

4- एन्कोडिंग: QR कोड न्यूमेरिक, अल्फान्यूमेरिक, बाइनरी और कांजी कैरेक्‍टर को एनकोड कर सकता है।

5-  एरर करेक्‍शन: QR कोड खराब (30% तक) होने के बावजूद भी स्‍कैन हो सकता है। 

 

 

कई फॉर्म में मिल सकता है क्‍यूऑर कोड 

क्यूआर कोड कई सारे रूप मार्केट में उपलब्‍ध है। वैसे तो क्यूआर कोड के प्रकार उसकी साइज और उसे स्‍कैन करने पर क्‍या ओपन होगा इन दोनों के आधार पर किए जाते है। यह यूआरएल से लेकर कोड और एसएमएस के रूप में भी उपलब्‍ध होता है। 

 

1- यूआरएल (URL):  इस क्यूआर कोड को स्‍कैन करने के बाद, आप सीधे इसमें सेव वेबसाइट के एड्रेस पर जाते है।

2- बिजनेस और विजिटिंग कार्ड  : इन बिजनेस क्यूआर कोड को स्‍कैन करने के बाद, इसमे सेव डिटेल्‍स जैसे नाम, एड्रेस, फोन नंबर, ई-मेल आदि स्‍मार्टफोन में सेव हो जाते है।

3- SMS: इसमें कंटेंट और एसएमएस के प्राप्तकर्ता का फोन नंबर सेव होता है। स्कैनिंग के बाद, एसएमएस जिसे भेजना है उसका नंबर और कंटेंट ऑटोमेटिक आ जाते है, आपको केवल इस बात की पुष्टि कर उसे भेजना होता है।

4- Geo Location: इस क्यूआर कोड में किसी लोकेशन का अक्षांश और रेखांश सेव होता है। इसे स्‍कैन करने पर आप अपने स्‍मार्टफोन के मैप ऐप में सीधे इस लोकेशन को देख सकते है।

5-  Download Mobile Application: इस क्यूआर कोड को स्‍कैन करने के बाद आप सीधे ऐप डाउनलोड के एड्रेस पर जाते है।

6-  Get A Coupon: इस कूपन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर, मोबाइल में कूपन लैंडिंग पेज पर आपको रीडायरेक्ट किया जाएगा।

7-  Social Network: सोशल नेटवर्किंग के लिए भी क्यूआर कोड को इस्‍तेमाल किया जाता है। जैसे फेसबुक पेज के क्यूआर कोड को स्‍कैन करने के बाद आप सीधे फेसबुक पेज पर जाते है।

 
क्‍यूआर कोड को कैसे स्‍कैन करें ?  
अगर आपके पास स्‍मार्टफोन हैं तो इसमें इस कोड को रीड करने की फैसेलिटी होती है। अगर नहीं है तो एप स्‍टोर से क्‍यूआर कोड रीडर डाउनलोड कर लें। अब आटोमेटिक ही यह कोड स्‍कैन हो जाएगा और इसमें लिंक वेबसाइट या आइटम ओपन होगा। 
 

क्या होगा जब आप क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे?
जब आप अपने स्मार्टफोन का उपयोग कर क्यूआर कोड को स्कैन करते हैं, तब आपको इसमे स्‍टोर कंटेंट का तुरंत एक्‍सेस मिल जाता है। इसके बाद इससे स्‍टोर लिंक ओपन हो जाती है या अगर यह बिजनेस कार्ड है, तो इसमें स्‍टोर इनफॉर्मेशन कॉन्टैक्ट लिस्‍ट में एड हो जाएगी।

 

आप क्‍यूआर कोड बना भी सकते हैं? 
इंटरनेट पर कई वेबसाइटस् है, जहाँ आप फ्री में क्यूआर कोड बना सकते हैं। इनमें forqrcode.com, free-qr-code.net, goqr.me, qrstuff.com और the-qrcode-generator.com प्रमुख हैं। 

 

 

 

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