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खुलकर छोटे भाई की मदद कर पाएंगे मुकेश अंबानी, सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत

कोर्ट के फैसले से ऑरकॉम के शेयर्स में 15 फीसदी का उछाल

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नई दिल्ली. देश के अमीर शख्स मुकेश अंबानी अब कर्ज में डूबे अपने छोटे भाई अनिल अंबानी की मदद कर पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश अंबानी की जियो और अनिल अंबानी की आरकॉम के बीच डील को अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि इससे पहले अनिल अंबानी की कंपनी को एरिक्‍सन को तय सीमा के भीतर सेटलमेंट की रकम चुकानी होगी। बता दें कि कर्ज में डूबी ऑरकॉम ने स्पेक्ट्रम, मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क सहित अन्य मोबाइल बिजनेस एसेट्स जियो को बचने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ एरिक्‍सन ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (NCLT) में अपील दायर कर इस सौदे का विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से आरकॉम के शेयर में 14.96% फीसदी का उछाल देखा गया है।

 

क्‍या है पूरा मामला 
दरअसल आरकॉम के ऊपर स्वीडन की कंपनी एरिक्‍सन के 1600 करोड़ रुपए बकाया है। कंपनी ने 2014 में आरकॉम के साथ देशभर में टॉवर के मेंटीनेंस की 7 साल के लिए डील की थी। घटते रेवेन्‍यू के चलते एरिक्‍सन का आरकॉम पर करीब 978 करोड़ रुपए बकाया हो, जो अब बढ़कर 1,600 करोड़ रुपए हो गया है।
आरकॉम पर एरिक्‍सन के अलावा अन्‍य देनदार का कुल 46000 करोड़ का कर्ज था। कर्ज कम करने के लिए आरकॉम ने स्पेक्ट्रम, मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क सहित अन्य मोबाइल बिजनेस एसेट्स जियो को बेचने का फैसला किया था।

 

 

NCLT चली गई थी एरिक्‍सन
इस फैसले के खिलाफ एरिक्‍सन NCLT चली गई थी। जहां उसने आरकॉम को दीवालिया घोषित कर उसे इन्‍सॉल्‍वेंसी में भेजने की मांग की थी। NCLT की ओर से जियो और आरकॉम की डील पर रोक लगाए जाने के बाद आरकॉम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा घटखटाया था। बाद में मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्‍यूनल (NCLAT) में पहुंचा था। इसी साल मई में ऑरकॉम ने NCLAT को बताया था कि उसने एरिक्‍सन के साथ कोर्ट के बाहर समझौता करने का फैसला किया है। वह इस साल 30 सितंबर तक कंपनी को 550 करोड़ का कर्ज वापस करेगी। इसके बाद  नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्‍यूनल (NCLAT) ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्‍युनिकेशंस (RCom) को बड़े भाई की कंपनी रिलायंस जियो को एसेट्स बेचने की मंजूरी दे दी थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा था।   

 

 

आगे पढ़ें- एरिक्‍सन ने की इन्‍सॉल्‍वेंसी पर रोक नहीं लगाने की मांग

 

 

एरिक्‍सन ने की इन्‍सॉल्‍वेंसी पर रोक नहीं लगाने की मांग

हालांकि पिछले हफ्ते ही एरिक्‍सन ने कोर्ट से कहा था कि वह आरकॉम की उस याचिका को खारिज करे, जिसमें उसने अपने खिलाफ चल रही इन्‍सॉल्‍वेंसी प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी। एरिक्‍सन का दावा था कि वह आरकॉम के साथ बाहर डील कर रही है, लेकिन इन्‍सॉल्‍वेंसी प्रक्रिया को रोकने से उसकी उस मुहिम को झटका लगेगा जिसके तहत वह आरकॉम से अपनी बकाया राशि निकलवाना चाहती है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम को जियो के साथ डील करने की इजाजत दी। साथ ही तय समय के भीतर एरिक्‍सन को पेमेंट करने कहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले के चलते आरकॉम अब दीवालिया होने से बच जाएगी। 

 

आगे पढ़ें- जियो के साथ हुई डील के बारे में 

 

जियो के साथ हुई थी डील 
बता दें कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने दिसंबर में आरकॉम के स्पेक्ट्रम, मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क सहित अन्य मोबाइल बिजनेस एसेट्स खरीदने का सौदा किया था। यह कदम कर्ज को कम करने के लिए उठाया गया था। लेकिन एरिक्सन की याचिका पर एनसीएलटी ने आरकॉम की टावर बिक्री पर रोक लगा दी थी। एनसीएलटी के इस फैसले से अनिल अंबानी की उस मुहिम को धक्‍का लगा था। 
 

45 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी है आरकॉम 
आरकॉम लगभग 45 हजार करोड़ रुपए के भारी बोझ से दबा है और लंबे समय से इसे चुकाने के प्रयासों में लगा हुआ है। जियो की मार्केट में इंट्री के बाद शुरू हुए कड़े कॉम्पिटीशन के सामने कंपनी नहीं टिक पाई और इसे 2017 के आखिरी तक अपना वायरलेस बिजनेस बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। आरकॉम को जियो को एसेट्स की बिक्री से 25,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्‍मीद है। 

  

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