चुनाव से पहले BSNL के 1.76 लाख कर्मचारियों से घबराई मोदी सरकार, दूरसंचार विभाग से कही यह बात

PMO advises DoT to help BSNL with wage bill till June: प्रधानमंत्री कार्यालय ने पत्र लिखकर दूरसंचार विभाग से कहा है कि वह चुनाव होने तक BSNL के 1.76 लाख कर्मचारियों को वेतन संबंधी समस्या नहीं होने दे।

Money Bhaskar

Mar 22,2019 05:08:00 PM IST

नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों के दौरान अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने दूरसंचार विभाग को पत्र लिखकर सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) का खयाल रखने के लिए कहा है। इस पत्र में दूरसंचार विभाग से कहा गया है कि वह चुनाव होने तक BSNL के 1.76 लाख कर्मचारियों को वेतन संबंधी समस्या नहीं होने दे।

BSNL के कर्मचारियों को जून तक ना हो कोई परेशानी
पीएमओ के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से IANS की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएमओ ने दूरसंचार विभाग से कहा है कि वह सार्वजनिक क्षेत्र की टेलीकॉम कंपनी BSNL के कर्मचारियों को जून तक वेतन संबंधी कोई परेशानी ना होने दे और उसे सहयोग करे। सूत्रों ने कहा है कि BSNL का मासिक वेतन बिल करीब 1200 करोड़ रुपए का है जिसे वह अपने राजस्व से वहन करने में सझम नहीं है। सूत्रों ने कहा है कि इस समय चुनाव चल रहे हैं और सरकार इस सार्वजनिक कंपनी के करीब 1.76 लाख कर्मचारियों को वेतन संबंधी परेशानी नहीं होने देना चाह रही है। सूत्रों के अनुसार, पीएमओ ने कहा है कि नई सरकार बनने के बाद बीएसएनएल के कर्मचारियों के लिए वीआरएस स्कीम के तहत 6,535 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया जाएगा। इसलिए जुलाई तक बीएसएनएल में वेतन संबंधी कोई समस्या पैदा ना हो।

पिछले महीने दूरसंचार विभाग की मदद से मिली थी सैलरी
वित्तीय संकट से जूझ रही BSNL के कर्मचारियों को फरवरी माह की सैलरी समय पर नहीं मिल पाई थी। कर्मचारियों का असंतोष बढ़ते देख इस मामले में दूरसंचार विभाग ने दखल दिया था। इसके बाद 15 मार्च को कर्मचारियों को सैलरी मिल पाई थी। 19 साल में यह पहला मौका था जब बीएसएनएल के कर्मचारियों को तय समय पर सैलरी नहीं मिल पाई थी। कंपनी का वेतन बिल इसके राजस्व के करीब 70 फीसदी का होता है।

8000 करोड़ के घाटे में चल रही है बीएसएनल
सार्वजनिक क्षेत्र की टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल इस समय करीब 8000 करोड़ रुपए के घाटे में चल रही है। फ्री वॉयस कॉल और सस्ते डाटा टैरिफ के कारण कंपनी का राजस्व घटक 27 हजार करोड़ रुपए पर आ गया है। इसके अलावा 4जी सर्विस नहीं होने के कारण कंपनी को ग्राहकों को बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में दूरसंचार विभाग ने बीएसएनएल को 4जी स्पैक्ट्रम अलॉट करने के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) को पत्र लिखकर नीलामी प्रक्रिया से छूट देने की अपील की थी।

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