कभी फोन में 2 मेगापिक्सल कैमरा भी नहीं करता था काम, अब 48 मेगापिक्सल तक पहुंचा फोन का कैमरा, दे रहा डिजिटल कैमरा को चुनौती 

Journey Of Camera Phones From less than 2 MP to 48 MP: एक वक्त था जब फोन में बमुश्किल 2 मेगापिक्सल कैमरा हुआ करता था। आज मोबाइल कैमरा 48 मेगापिक्सल तक पहुंच गया है और तकरीबन सभी कंपनियों में होड़ मची है कि कौन सी कंपनी इससे भी ज्यादा मेगापिक्सल वाला कैमरा फोन पहले लॉन्च करती है। दो दशक पहले ही कैमरा को फोन में जोड़ा गया, लेकिन अब स्मार्टफोन कैमरा इतना ज्यादा इस्तेमाल होने लगे हैं कि डिजिटल कैमरा के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। एक नजर डालते हैं कि कैमरा फोन का सफर कैसे शुरू हुआ।

Money Bhaskar

Apr 08,2019 12:54:00 PM IST

नई दिल्ली.

एक वक्त था जब फोन में बमुश्किल 2 मेगापिक्सल कैमरा हुआ करता था। आज मोबाइल कैमरा 48 मेगापिक्सल तक पहुंच गया है और तकरीबन सभी कंपनियों में होड़ मची है कि कौन सी कंपनी इससे भी ज्यादा मेगापिक्सल वाला कैमरा फोन पहले लॉन्च करती है। दो दशक पहले ही कैमरा को फोन में जोड़ा गया, लेकिन अब स्मार्टफोन कैमरा इतना ज्यादा इस्तेमाल होने लगे हैं कि डिजिटल कैमरा के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। एक नजर डालते हैं कि कैमरा फोन का सफर कैसे शुरू हुआ।

0.11 मेगापिक्सल रिजॉल्यूशन मिलता था

कैमरा फोन साल 2000 में पेश किया गया था और इसमें सिर्फ 20 फोटो सेव करने की मेमाेरी हुआ करती थी। इन फोटोज का रिजॉल्यूशन 0.11 से 0.35 मेगापिक्सल के बीच हुआ करता था। धीरे-धीरे कैमरा VGA (Video Graphic Array) तकनीक पर काम करने लगे। यह भी बहुत बेसिक तकनीक थी, लेकिन फिर भी पहले के वर्जन से बेहतर थी।

जोड़े गए कई फीचर्स

जैसे ही कैमरा लोकप्रिय होने लगा, फोन निर्माता कंपनियों ने बेहतर फोन तैयार करने पर ध्यान देना शुरू किया। तकनीक बढ़ने के साथ-साथ फोन में फ्लैश फीचर, जूम, सेल्फ टाइमर्स, फिल्टर्स लगाए गए, लेकिन बात की जाए रिजॉल्यूशन की तो, फोन कैमरा अभी सिर्फ 1.3 मेगापिक्सल पर अटके थे। एक दशक तक प्रयोग करने के बाद कंपनियों ने इस फीचर को गंभीरता से लेना शुरू किया। मैन्युफैक्चरर्स ने फोन के मैन कैमरा में वीडियो क्षमता, पैनोरामा क्लिक, इमेज एडिटिंग और फिल्टर जोड़ना शुरू किया।

न्यू जेनरेशन कैमरा फोन

2015 की शुरुआत में एक नए ट्रेंड ने फोन इंडस्ट्री में सुनामी जैसा बदलाव लाकर रख दिया। इस ट्रेंड ने लोगों में मोबाइल फोन की जरूरत को बदल दिया। यह था ‘Selfie’ ट्रेंड। इस ट्रेंड के आते ही डुअल कैमरा फोन बनाने की जरूरत बढ़ गई। अब तक मोबाइल फोन स्मार्ट फोन में तब्दील हो चुके थे। 2017 में डुअल कैमरा स्मार्टफोन का सबसे बड़ा ट्रेंड बन गए।

सोशल मीडिया ने बदला खेल

Facebook और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने हर व्यक्ति को फोटोग्राफर बनने पर मजबूर कर दिया। जब ज्यादा लोग सोशल मीडिया चैनल्स पर लोगों के बीच धाक जमाने लगे, तो DSLR कैमरा को चुनौती देने वाली तस्वीरें खींचने की जरूरत लोगों में पैदा होने लगी। इस जरूरत काे देखते हुए स्मार्टफोन कंपनियों ने कैमरा में माइक्रो फीचर्स देना शुरू किया। वाइड एंगल में फोटो खींचने से लेकर, शटर स्पीड को मैनुअली एडजस्ट करने तक, वाइट बैलेंस, फोकस और ISO जैसे DSLR के कई फीचर्स फोन कैमरा में डाले गए। स्मार्टफोन कैमरा अब लक्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गए हैं। इनमें से कई फोन तो ऐसे हैं जो कई बेहतरीन डिजिटल कैमरा की बराबरी करते हैं।

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