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खास खबर: डाटा लीक के पीछे है 13 लाख करोड़ का बाजार, समझिए जुकरबर्ग की माफी का सच

 

नई दिल्‍ली.  करीब 1 साल पहले जब डाटा को नए जमाने का क्रूड (पेट्रोलियम) कहा गया तो भारत जैसे देश में एकबारगी किसी को यह तर्क बेदम लगा। फेसबुक डाटा लीक की बात सामने आने के बाद लोगों को लग रहा है कि यह सही था। पूरा मामला हमारा-आपका डाटा चुराने तक सीमित नहीं है। दरअसल, इसके पीछे एक बाजार काम कर रहा है। फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका इस खेल के मोहरे भर हैं। यहां डाटा बेचने वाले अरबों डॉलर का मुनाफा कमा रहे हैं तो डाटा खरीदने वाले सरकार बनाने-बिगाड़ने की हैसियत में खड़े हैं। आज की बड़ी खबर में जानते हैं कि इस बाजार की असली कहानी क्‍या है, इस डाटा का फायदा किसे हो रहा है और कौन इसका शिकार हो रहा है... 

 

फेसबुक ने जान-बूझकर दिया डाटा 
साइबर एक्‍सपर्ट पवन दुग्‍गल का दावा है कि भले ही जुकरबर्ग इस पूरे मामले में माफी मांग रहे हों, लेकिन लोगों का डाटा फेसबुक ने जानबूझकर बेचा। यह पहला मामला नहीं है। टेक कंप‍नियां इस तरह का डाटा पहले भी बेचती रही हैं। दुग्‍गल के मुताबिक, फेसबुक के टर्म्‍स एंड कंडीशंस में लिखा होता है‍ कि वो आपके डाटा का कॉमर्शियल यूज करेगी। बिना अनुमति आप फेसबुक पर अपनी प्रोफाइल नहीं बना सकते हैं। अगर आप मुफ्त में फेसबुक यूज करने की सुविधा हासिल कर रहे हैं तो यह जान लेना जरूरी है कि कहीं न कहीं आप इसकी कीमत चुका रहे होंगे। अब डाटा ब्रोकिंग दुनिया में बड़ी इंडस्‍ट्री है। इंटरनेट पर हमारी एक्टिविटी से कंपनियां करोड़ों कमाती हैं। 

 
13 लाख करोड़ का है मार्केट 
एक रि‍सर्च रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, दुनि‍या भर में इस वक्‍त 4,000 से ज्‍यादा डाटा ब्रोकरिंग कंपनि‍यां है। इसमें Acxiom सबसे बड़ी कंपनी है, जि‍सके पास 23,000 सर्वर्स हैं जो कंज्‍यूमर डाटा को कलेक्‍ट करने और एनालाइज करने का काम करते है। यह कंपनी दुनि‍या भर के करीब 50 करोड़ कंज्‍यूमर्स के डाटा पर काम कर रही है। रि‍सर्च कंपनी Aranca के मुताबि‍क, ग्‍लोबली डाटा ब्रोकरिंग की इंडस्‍ट्री 200 अरब डॉलर (13 लाख करोड़ रु.) की है। इसमें से 50 फीसदी रेवेन्‍यू मार्केटिंग प्रोडक्‍ट्स से जेनरेट होता है, इसके बाद जोखि‍म कम करने और कंज्‍यूमर सर्च का नंबर आता है। ट्रांसपरेंसी रि‍सर्च मार्केट, 2017 की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, 2017 से 2022 तक डाटा ब्रोकरिंग मार्केट 11.3 फीसदी की ग्रोथ रेट से बढ़ेगा।
 
कहां यूज हो रहा है आपका डाटा?
दुग्‍गल के मुताबिक, डाटा मार्केट का डाटा ज्‍यादातर कंपनियां और रिसर्च फर्म या बड़ी पीआर एजेंसियां यूज करती हैं। हालांकि डाटा का सोर्स ज्‍यादातर टेक कंपनियां होती हैं। फेसबुक को पता है कि आप क्‍या शेयर कर रहे हैं, गूगल को पता है कि आप क्‍या सर्च कर रहे हैं, अमेजन को पता है कि आप क्‍या खरीदते हैं। यहां से डाटा खरीदने वाले को पता होता है कि आप क्‍या सोचते हैं, आप क्‍या खरीदना चाहते हैं, किस राजनीतिक विचारधारा को फॉलो करते हैं। इसी के आधार पर आपसे ट्रीट किया जाता है। 
 
इधर आप ने सर्च किया उधर फोन आने शुरू 
दरअसल डाटा के मार्केट में सबसे बड़ा हाथ आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस का होता है। इंटरनेट में आप जिस कंपनी की कारें सर्च कर रहे हैं, आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस उस कंपनी तक यह खबर पहुंचा देता है। अब कार कंपनी का खेल शुरू होता है। सिस्‍टम ऑन करते ही आपके सामने उसी कंपनी की कारों के विज्ञापन आते हैं। कंपनी आप पर फोन, मेल और मैसेज की बौछार कर देगी। इसी तरह से आपकी एक सर्च किसी कंपनी को पोटेंशियल बायर मुहैया करा देगी।
 
डाटा ऐसे बनाता-बिगाड़ता है सरकारें 
दुग्‍गल के मुताबिक, अगर फेसबुक पर किसी दल या राजनेता के खिलाफ कुछ भी विचार शेयर कर रहे हैं, तो वह आपके किसी के लिए भले ही विचार हो, लेकिन कंपनी के लिए यह एक डाटा है। फेसबुक के पास आपका ज्‍योग्राफिकल स्‍टेटस है। आपका यह डाटा, डाटा एनॉलिस्टि के पास जाएगा। जहां आपकी पंसद के हिसाब से ही आपके पास पोस्‍ट थ्रो की जाएंगी। उसी तरह की खबरों का फ्लो बढ़ जाएगा। आपको लगेगा कि आपके पसंदीदा नेता या पार्टी के साथ ही पूरा देश है। आप माउथ पब्लिसिटी शुरू कर देते हैं। नेता या पार्टी की पॉपुलैरिटी सातवें आसमान पर और इधर सरकार बन या बिगड़ गई। 
 
...तो ये है डाटा की असली ताकत
डाटा की असली ताकत इस बात से पता चलती है कि अब तक डाटा कई देशों में सरकारें बनवाने-बिगाड़ने का काम कर चुका है। 
  1. इसकी शुरुआत 2012 में अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव से हुई। ओबामा के लिए करीब 100 डाटा एनॉलिटिक्‍स की टीम ने काम किया। उसी के आधार पर कैम्‍पेन तैयार किया गया और वह 2008 से भी बड़े अंतर से जीतने में सफल रहे।   
  2. कई मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि सऊदी अरब के मौजूदा क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान ने फेसबुक को 1 अरब डॉलर की रकम सिर्फ इस बात के लिए अदा की थी कि फेसबुक सऊदी राजपरिवार के खिलाफ की जाने वाली पोस्‍ट को प्रमोट नहीं करे, ताकि अरब क्रांति के बाद उनके देश में सत्‍ता के खिलाफ लोग सड़कों पर नहीं उतरें। 
  3. ऑस्‍ट्रेलिया की सरकार ने फेसबुक पर आरोप लगाया कि 2011 के आम चुनाव के दौरान लोगों के पर्सनल डाटा का यूज किया गया। इस डाटा का यूज वोटरों को प्रभावित करने के लिए किया गया। 
  4. भारत में कैम्ब्रिज एनालिटिका की भारतीय पार्टनर Ovleno Business Intelligence (OBI) इकाई पर कई राज्‍यों के चुनावों को प्रभावित करने का आरोप लगा। आरोप है कि OBI के डाटा के जरिए 2010 के बाद से कई विधानसभा चुनावों को प्रभावित किया गया। भाजपा-कांग्रेस की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बाद OBI की वेबसाइट खुलनी बंद हो गई। 
 
आगे पढ़ें... कहां से मिलती है जानकारी, कितने में बिकता है डाटा? 
 

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