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सावधान! स्मार्टफोन पर आपकी हर एक्टिविटी का बन रहा वीडियो, अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा

17,000 एंड्रॉयड एप्‍स में से 9000 में स्‍क्रीनशॉट लेने की क्षमता...

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वाशिंगटन. स्‍मार्टफोन के जरिए चुपके से फोटो लिए जा सकने या बातचीत रिकॉर्ड किए जा सकने जैसी रिपोर्ट्स आए दिन आती रहती हैं। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक स्‍मार्टफोन स्‍क्रीन पर आपके द्वारा की जा रही हर एक्टिविटी का न केवल स्‍क्रीनशॉट और वीडियो बनाया जा रहा है बल्कि इसे थर्ड पार्टीज को भेजा भी जा रहा है। ऐसा कर रहे हैं कुछ पॉपुलर स्‍मार्टफोन एप्‍स। यह खुलासा हुआ है अमेरिका की नॉर्थ ईस्‍टर्न यूनिवर्सिटी में हुई एक हालिया स्‍टडी में। 

 

स्‍टडी में कहा गया है कि इन वीडियो और स्‍क्रीनशॉट्स में यूजरनेम, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर और अन्‍य महत्‍वपूर्ण सूचनाएं शामिल हो सकती हैं। इसे देखते हुए यह चिंता का विषय है। यह फोन कैमरे द्वारा पिक्‍चर्स लेने या माइक्राफोन द्वारा बातचीत रिकॉर्ड कर लेने से भी ज्‍यादा बुरा है। हालांकि यह भी कहा गया कि फिलहाल ऐसा केवल यूजर को उसकी रुचि के मुताबिक विज्ञापन परोसे जा सकें, इसके लिए किया जा रहा है। साथ ही इस चीज को बंद करने का कोई आसान तरीका भी नहीं है। 

 

17,000 एप्‍स को किया एनालाइज, 9000 में पाई स्‍क्रीनशॉट ले सकने की क्षमता

स्‍टडी के तहत रिसर्चर्स ने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्‍टम पर 17,000 से ज्‍यादा मोस्‍ट पॉपुलर एप्‍स को एनालाइज किया। इसके लिए नॉर्थ ईस्‍टर्न यूनिवर्सिटी के स्‍टूडेंट्स द्वारा लिखे गए ऑटोमेटेड टेस्‍ट प्रोग्राम की मदद ली गई। 17,000 में से 9000 एप्‍स में स्‍क्रीनशॉट लेने की क्षमता पाई गई। 

 

गोपफ एप ने बनाई वीडियो

विल्‍सन के मुताबिक, एक एप गोपफ ने तो स्‍क्रीन एक्टिविटी का वीडियो बनाकर इसे थर्ड पार्टी को भेजा। गोपफ एक फास्‍ट फूड डिलीवरी सर्विस है। इसने एक्टिविटी का स्‍क्रीनशॉट लेकर मोबाइल डिवाइसेज के लिए डाटा एनालिटि‍क्‍स फर्म एपसी को भेजा था। ये सब एप यूजर को सूचना दिए बिना किया गया। 

 

पासवर्ड कैरेक्‍टर्स से डॉट्स में बदलने जैसे मामूली वक्‍त में भी कर सकते हैं रिकॉर्डिंग

नॉर्थ ईस्‍टर्न यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डेविड शॉफनेस ने कहा कि हमने पाया कि हजारों जाने-माने एप्‍स में आपकी स्‍मार्टफोन स्‍क्रीन और जो भी आप टाइप करते हैं, उसे रिकॉर्ड करने की क्षमता है। जब आप यूजरनेम और पासवर्ड डालते हैं तो वह कैरेक्‍टर से डॉट्स में चेंज होता है। इन एप्‍स में उस मामूली वक्‍त में भी उन्‍हें रिकॉर्ड कर सकने की क्षमता है।   


आगे पढ़ें- क्यों हुई रिसर्च

अभी नहीं हो रहा गलत इस्‍तेमाल लेकिन हो सकता है

शॉफनेस ने कहा कि जब हम रिसर्च कर रहे थे तो हमें पता था कि हम भूसे में सुई ढूंढने जैसा काम कर रहे हैं लेकिन हमें हैरानी तब हुई जब हमें कई सुइयां मिल गईं। कई कंपनियां लोगों की स्‍मार्टफोन एक्टिविटीज का स्‍क्रीनशॉट और वीडियो थर्ड र्पा‍टीज को भेज रही थीं। आगे कहा गया कि हालांकि ऐसा नहीं लग रहा था कि इस इन्‍फॉर्मेशन से किसी का नुकसान किया जा सकता है लेकिन यह सामने आ गया कि कितनी आसानी से फोन की प्राइवेसी विंडो को कोई तीसरा इन्‍सान अपने फायदे के लिए इस्‍तेमाल कर सकता है। यूनिवर्सिटी के एक अन्‍य प्रोफेसर क्रिस्‍टो विल्‍सन के मुताबिक, भले ही इस तरह की प्र‍ैक्टिस से अभी कोई नुकसान न हो लेकिन आगे चलकर निश्चित तौर पर इसका इस्‍तेमाल गलत इरादों के लिए होगा। 

क्‍यों की गई यह रिसर्च

बता दें कि ऐसी रिपोर्ट्स आ रही थीं कि फोन गुपचुप ढंग से आपकी बातचीत रिकॉर्ड कर रहे हैं और इसे कंपनियों को बेच रहे हैं ताकि वे लोगों की रुचि को जानकर उनके हिसाब से उन्‍हें विज्ञापन परोस सकें। इन्‍हीं रिपोर्ट्स के चलते यह स्‍टडी की गई। हालांकि स्‍टडी में रिसर्चर्स को रिकॉर्डेड बातचीत का तो कोई सबूत नहीं मिला लेकिन यह जरूर पता लगा कि लोगों की स्‍मार्टफोन एक्टिविटीज रिकॉर्ड हो सकती हैं, जो कि ज्‍यादा खतरनाक है। 

 

आगे पढ़ें- आगे हो सकता है गलत इस्‍तेमाल

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