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Tech in gadgets: तेज डाटा ट्रांसफर के लिए पेनड्राइव में जरूर देखें USB वर्जन

दरअसल एक ही जैसे दिखने वाली हर पेनड्राइव्स एक दूसरे से काफी अलग होती हैं

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नई दिल्ली. आमतौर पर पेनड्राइव के साथ सबसे बड़ी शिकायत यह होती है कि उससे हमारा डाटा तेजी के साथ ट्रांसफर नहीं होता है। दूसरी शिकायत पेन ड्राइव के जल्‍दी से करप्‍ट हो जाने की होती है। दरअसल एक ही जैसे दिखने वाली हर पेनड्राइव्स एक दूसरे से काफी अलग होती हैं। इनकी स्पीड, स्टोरेज कैपेसिटी के साथ बहुत से ऐसे फैक्‍ट होते हैं जो एक पेन ड्राइव को बेस्‍ट बनाने में आपकी मदद करते हैं। tech in gadgets इस अंक में आज हम इसी पर बात करते हैं। 

 

स्‍टोर क्षमता एक पर कीमत अलग क्‍यों 
जब आप पेनड्राइव लेने जाते हैं, तो आपने गौर किया होगा कि 16जीबी एक पेनड्राइव 1000 रुपए की है, तो वहीं दूसरी महज 500 रुपए की। एक ही स्टोरेज कैपेसिटी होने के बावजूद इनमें यह फर्क इसलिए है क्योंकि इनकी अलग-अलग स्पीड है। एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ स्टोरेज ही नहीं, बल्कि कई अन्य फैक्टर्स होते हैं, जो बेस्ट पेन ड्राइव को डिफाइन करने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 टिप्‍स के बारे में जो एक बेस्‍ट पेनड्राइव सेलेक्‍ट करने में आपकी मदद करते हैं। 

 

पेन ड्राइव के हैं दो वर्जन
जब भी आप पेन ड्राइव लेने जाते हैं, तो आपको दुकान पर इसके दो वर्जन देखने को मिल सकते हैं।  टेक एक्सपर्ट संजीव झा के मुताबिक पेन ड्राइव 2.0  और 3.0 वर्जन में आती हैं। 3.0 की पेन ड्राइव 2.0 के मुकाबले तेज होती है। 3.0 100एमबीपीएस स्पीड से डाटा ट्रांसफर करती है। वहीं 2.0 वर्जन 15 एमबीपीएस तक की ही स्पीड देती है। ऐसे में आपको पता चल ही गया होगा कि तेज डाटा ट्रांसफर के लिए आपको कौन सी पेन ड्राइव चुननी है।   

 

इसके बाद ही खरीदिए 3.0 
अगर आपको लगता है कि 3.0 वर्जन की पेन ड्राइव खरीद लेने से आपका डाटा तेजी के साथ ट्रांसफर होगा, तो भी आप गलत हैं। दरअसल 3.0 नया वर्जन है। जबकि ज्यादातर लैपटॉप और डेस्कटोप में यूएसबी 2.0 पोर्ट ही मिलते हैं। ऐसे में अगर आप 3.0 वर्जन भी लेते हैं, तो यह भी देखना होगा  कि आपके पास जो कम्‍प्‍यूटर या लैपटॉप हो उसमें लगी यूएसबी पोर्ट का वर्जन भी 3.0 ही हो। नहीं तो 2.0 वर्जन वाले पोर्ट पर 10 से 15 एमबी प्रति सेकंड की ही स्पीड देगा। 

 

साइज का भी है अहम रोल
पेन ड्राइव दिन-प्रतिदिन पतली और छोटी होती जा रही है, लेकिन एक पेन ड्राइव की साइज भी अहम रोल निभाती है। ऐसे में जब आप पेनड्राइव लें, तो उसकी साइज पर खास ध्यान दें। दरअसल पेनड्राइव का साइज जितना बड़ा होगा और वह जितनी मोटी होगी, क्वालिटी के मामले में उसके उतना अच्छा होने की उम्मीद रहती है। क्योंकि ज्यादा वजन यह सुनिश्चित करता है कि उसमें सबसे बेहतर कंपोनेंट्स शामिल किए गए होंगे। वहीं, पतली पेन ड्राइव की बात करेंगे, तो यह हल्की और कहीं भी लेकर जाने में सुविधाजनक होती है। लेकिन इसमें ज्यादा वजन वाली पेन ड्राइव में डाले गए कंपोनेंट्स होने की उम्मीद न के बराबर रहती है। 
 
ऐसे खरीदें पेन ड्राइव 
हर पेन ड्राइव मैन्युफैक्चरर्स वारंटी के साथ आती है। कुछ कंपनियां 5 साल तो कुछ 7 साल की वारंटी के साथ आती हैं। ऐसे में आप किसी भी डिफेक्ट के लिए कंपनी के सर्विस सेंटर में जाकर उसे रिपेयर या रिप्लेस करवा सकते हैं। इसलिए पेन ड्राइव लेते वक्त ये चीज भी जरूर चेक करें। 
अगर आप रोजमर्रा के यूज के लिए पेन ड्राइव लेना चाहते हैं, तो उसकी स्पीड जरूर देखें। रोजमर्रा के यूज के दौरान आप अन्य फैक्टर्स  के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको हाई स्पीड डाटा ट्रांसफर करना होता है और या फिर आपको अपना डाटा पासवर्ड प्रोटेक्टेड रखना है, तो आप उस हिसाब से अपनी पेन ड्राइव का चुनाव कर सकते हैं।    

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