होलोचेन टेक्नोलॉजीः हो सकती है गूगल-फेसबुक की छुट्टी

संचार और तकनीक के क्षेत्र की खासियत यह है कि यहां नई-नई तकनीकें ईजाद होती रहती हैं, जो अापकी दुनिया बदलने की क्षमता रखती हैं। होलोचेन के डिजायनर्स का भी यही मानना है कि यह ऐसी क्रांतिकारी तकनीक है जो आपके इंटरनेट के एक्सपीरियंस को बदलकर रख देगी। उनका दावा है कि यह तकनीक गूगल और फेसबुक जैसे अत्यधिक लोकप्रिय एप की भी छुट्‌टी कर देगी।

Money Bhaskar

Nov 10,2018 06:51:00 PM IST

नई दिल्ली। संचार और तकनीक के क्षेत्र की खासियत यह है कि यहां नई-नई तकनीकें ईजाद होती रहती हैं, जो अापकी दुनिया बदलने की क्षमता रखती हैं। होलोचेन के डिजायनर्स का भी यही मानना है। यह ऐसी क्रांतिकारी तकनीक है जो आपके इंटरनेट के एक्सपीरियंस को बदलकर रख देगी। उनका दावा है कि यह तकनीक गूगल और फेसबुक जैसे अत्यधिक लोकप्रिय एेप की भी छुट्‌टी कर देगी क्योंकि यह इंटरनेट सिक्योरिटी और प्राइवेसी देने का दावा करती है।

क्या है होलोचेन?

1990 में टिम बर्नर्स ली ने WWW इंटरनेट कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल की स्थापना की थी। इसी पर आज सारा इंटरनेट चलता है। होलोचेन भी ऐसा ही एक सिस्टम है जो कंप्यूटरों को आपस में कम्युनिकेशन करने की सहूलियत देता है। इसे बनाने वाले अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंजीनियर आर्थर ब्रॉक के मुताबिक इन दाेनों में फर्क यह है कि WWW कॉरपोरेट सर्वर पर चलता है जबकि होलोचेन को ऐसे डिजायन किया गया है कि यह पूरी तरह से घरों में रखें कंप्यूटरों अौर मोबाइल फोन्स के डिस्ट्रीब्यूटिड नेटवर्क पर चलता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि WWW में आपका स्मार्टफोन या लैपटॉप फेसबुक, गूगल या अन्य प्रमुख कंपनियों के सर्वर पर मौजूद डाटा को रिसीव करता है और यहीं पर अपना डाटा सेव भी करता है। इसे कॉरपोरेट क्लाउड कहते हैं। जबकि होलोचेन में डाटा आपके लैपटॉप या मोबाइल से जुड़े अन्य लैपटॉप और मोबाइल पर सेव हाेता है, जिससे यह पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। इसे पियर-टू-पियर टेक्नोलॉजी कहते हैं।

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नहीं आएगी प्राइवेसी पर कोई आंच

 

आर्थर ब्रॉक के मुताबिक होलोचेन पर सभी तरह के ऐप्स बनाए जा सकते हैं। गूगल से मिलते-जुलते सर्च इंजन-मेल ऐप्सफेसबुक के जैसे मैसेजिंग ऐप्सट्विटर जैसे शॉर्ट मैसेजिंग ऐप्स और भी अन्य ऐप्स यहां आसानी से बनाए जा सकते हैं। होलोचेन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करके बनाए गए ऐप्स सिर्फ इसके यूजर्स के कंप्यूटर्स पर चलेंगी। इन ऐप्स को कॉरपोरेट सर्वर फॉर्म्स से किसी तरह का इंटरेक्शन नहीं करना होगा और न ही कोई डाटा यहां सेव होगा। इसका मतलब यह होगा कि आपकी प्राइवेसी पर आंच नहीं आएगी।

 

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लोकप्रिय होने में लगेगा कुछ समय

 

2018 में होलोचेन तकनीक को दुनिया के सामने लांच किया गया। 2008 में जापान में सातोशी नकामोतो ने ब्लॉकचेन और बिटकॉइन तकनीक का ईजाद किया था। होलोचेन उससे भी पुराना कॉन्सेप्ट है। हालांकि इसे अभी कुछ कमियां हैं जिन्हें दूर करने पर काम चल रहा है। क्योंकि इसमें किसी कॉरपोरेट के सर्वर पर डाटा सेव नहीं होता है लिहाजा सारा डाटा यूजर को अपने पास स्टोर करना पड़ता हैजो कि खर्चीला और मुश्किलभरा हो सकता है। इन कमियों को दूर कर लेने के बाद यह तकनीक इतनी सस्ती और सुलभ हो जाएगी कि इसे कोई नहीं रोक पाएगा।

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