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टेलिकॉम में जिनकी गई नौकरी, उन्‍हें जॉब दिलाने में जुटी मोदी सरकार: टेलिकॉम सेक्रटरी

सरकार ने टेलिकॉम सेक्‍टर में हुई छंटनी के समय अपनी जॉब गंवाने वाले लोगों को वैकल्पिक नौकरी दिलाने की कोशिश शुरू की है। इ

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मुंबई. जॉब के मोर्चे पर विपक्ष की आलोचना झेल रही मोदी सरकार ने एक बड़ा एक्‍शन शुरू किया है। सरकार ने टेलिकॉम सेक्‍टर में हुई छंटनी के समय अपनी जॉब गंवाने वाले लोगों को वैकल्पिक नौकरी दिलाने की कोशिश शुरू की है। सरकार उन्‍हें दोबारा नियुक्‍त कराने के लिए भी प्रयास कर रही है। टेलिकॉम सेक्रेटरी अरुणा सुंदरराजन ने यह जानकारी दी। रिलायंस जियो की तरफ से लॉन्‍च हुए सस्‍ते ऑफर्स ने दूसरी टेलिकॉम कंपनियों की हालत बिगाड़ दी, जिसके चलते 90 हजार से ज्‍यादा लोगों की जॉब चली गई। 

 

 

सुंदरराजन ने बताया कि टेलिकॉम सेक्‍टर में नौकरी गंवाने वाले लोगों को जॉब दिलाने में सरकार की तरफ से तीन स्‍तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सबसे पहले, निचले स्‍तर पर काम रहे लोग, जो कि रिटेल आउटलेट से जुड़े हैं, उनके भविष्‍य को सुनिश्चित किया जाएगा। पहली प्राथमिकता इस सेक्‍टर में स्‍थायित्‍व लाना है। नई टेलिकॉम पॉलिसी के जरिए यह काम सरकार की प्राथमिकता है। अभी इस पॉलिसी पर लोगों के कमेंट मंगाए जा रहे हैं और अगले महीने यह पॉलिसी फाइनल होगी। उन्‍होंने बताया कि हम नए रोजगार अवसर जैसे पब्लिक वाईफाई और भारतनेट खोलने का प्रयास कर रहे हैं। निचले लेवल पर काम करने वाले लोगों के लिए नए अवसर खोलने की कोशिश की जा रही है। 


स्किल्‍स  काउंसिल के जरिए मिलेंगी नई जॉब 
टेलिकॉम सेक्रेटरी ने कहा कि छंटनी का शिकार हुए लोगों को रोजगार दिलाने के लिए सरकार टेलिकॉम सेक्‍टर स्किल्‍स काउंसिल के साथ काम कर रही है, जो वर्कर्स को नई जगहों पर जॉब तलाशने में मदद कर सकता है। इसका मकसद यह देखना है कि कितने लोगों को फिर से जॉब दिलाई जा सकती है। कैसे उन्‍हें दोबारा नियुक्‍त कराया जा सकता है। 

 

जियो के चलते वॉयस से डाटा पर शिफ्ट हो गया रेवेन्‍यू 
जियो के लॉन्‍च से पहले टेलिकॉम इंडस्‍ट्री का 70 फीसदी रेवेन्‍यू वॉयस के जरिए आता था। जियो ने कॉलिंग फ्री कर दी और रेवेन्‍यू को डाटा पर शिफ्ट करा दिया। रिलायंस जियो के एग्रेसिव प्‍लान ने सभी टेलिकॉम कंपनियों की आर्थिक हालत खराब कर दी, जिसका असर सेक्‍टर में जॉब लॉस के रूप में दिखाई दिया। 

 

जियो ने खराब कर दी दूसरी कंपनियों की सेहत 
कॉम्पिटिशन का लेवल ऐसा हो गया है कि कुछ कंपनियांं जैसे कि वोडाफोन जोकि देश की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी कंपनी थी, ने मर्जर का फैसला किया। कई कंपनियों ने बिजनेस से बाहर निकले का फैसला किया। इनमें से एक कंपनी दिवालिया हो गई। वहीं कुछ कंपनि‍यों ने अपने एसेट जैसेकि स्‍पेक्‍ट्रम होल्डिंग बेचने का फैसला किया। कंई कंपनियों का यह मानना है कि इस बीच सरकार की तरफ से इंटरकनेक्‍ट यूजर चार्ज में भारी कमी से उनकी परेशानी और बढ़ गई। इसकी कीमत इस सेक्‍टर में काम कर रहे लोगों को अपनी नौकरी गंवा का चुकानी पड़ी। 

 

5जी पर अगले महीने आएगी रिपोर्ट 
5जी सर्विस शुरू करने के बारे में सुंदरराजन ने कहा कि सरकार की तरफ से नियुक्‍त पैनल अगले महीने अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। जिसके बाद 5जी वायरलेस टेलिफोनी सर्विस शुरू करने का वास्‍तविक रोडमैप तैयार होगा। 5जी से डाटा स्‍पीड और तेज होगी। 

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