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अनिल अंबानी ने की थी जो गलती, वही कर बैठा यह बिजनेसमैन

वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत और अनिल अंबानी ने बिजनेस में एक जैसी गलतियां की। इसके चलते बिजनेस के बिकने की नौबत आ गई...

failure story of videocon promoter venugopal dhoot is similar as anil ambanis Rcom

नई दिल्‍ली। वीडियोकॉन एक ऐसा ब्रांड नेम है, जिससे भारत का बच्‍चा-बच्‍चा वाकिफ है। 1990 के दौर में भारत के हर घर में राज करने वाली कंपनी अब बिकने की कगार पर है।

सस्‍ते टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और एसी से छोटे शहरों में रहने वाले भारत के बड़े मिडिल क्‍लास को छूने वाली कंपनी जल्‍द ही इन्‍सॉलवेंसी में जाने वाली है। उसपर आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई समेत अन्‍य बैंकों का करीब 48,000 करोड़ रुपए बकाया है। कभी देश का टॉप इलेक्‍ट्रॉनिक ब्रांड चलाने वाले वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के फेल होने की कहानी कुछ-कुछ अनिल अंबानी रिलायंस ग्रुप से मेल खाती है। दोनों बिजनेस में पैसे से पैसा बनाने में नाकाम रहे। आइए जानते हैं कि दोनों के फेल होने का पैटर्न ओर कारण क्‍या था। 

 

एक जैसी है ऑरकॉम और वीडियोकॉन की कहानी 


वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत और अनिल अंबानी के पास किसी जमाने में देश की टॉप कंपनियां थीं। अंबानी की ऑरकॉम देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी थी। 2010 तक आरकॉम का मार्केट शेयर टेलिकॉम इंडस्ट्री में 17 फीसदी था। वक्‍त बीतता गया और कर्ज बढ़ता गया। नतीजा यह हुआ कि कंपनी बिकने की कगार पर पहुंच गई। 

 

ठीक इसी तरह वीडियोकॉन 2007 डेट फ्री कंपनी मानी जाती थी। वह लगातार मुनाफे में थी। सितंबर 2008 तक लगातार 3 फाइनेंशियल ईयर तक कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट 800 करोड़ रुपए रहा। इसी के बाद कंपनी का बुरा दौर शुरु हुआ। 2010-11 तक कंपनी का कर्ज 12500 करोड़ रुपए हो गया था। फाइनेंशियल ईयर 2017 में ग्रुप की सभी कंपनियों पर स्टैंडअलोन कर्ज बढ़कर 40 हजार करोड़ रुपए तक हो गया। फाइनेंशियल ईयर 2018 की दूसरी तिमाही में कंपनी को 1300 करोड़ से ज्यादा घाटा हुआ।  

 

 

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फेल होने का एक जैसा पैटर्न 
अनिल अंबानी और वेणुगोपाल धूत दोनों ने एक जैसी गलतियां कीं। दोनों ने कोर बिजनेस को छोड़कर नए बिजनेस पर दांव लगाया। रिलायंस ने जहां एनर्जी, इन्‍फ्रा जैसे सेक्‍टर्स में बड़ा निवेश किया, तो वीडियोकॉन ने मोबाइल फोन, DTH बिजनेस, टेलिकम्युनिकेशंस और पेट्रोलियम के सेक्‍टर में विस्‍तार किया। ध्‍यान देने वाली बात यह है कि दोनों कंपनियों ने इतना डायर्सिफिकेशन महज 2 से 3 साल के भीतर किया। इसके चलते बढ़ते कर्ज के बोझ के साथ स्‍टेबल होने का मौका ही नहीं मिल पाया। 

 

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दोनों का हश्र भी एक जैसा 


फेल होने के बाद दोनों कंपनियां को हश्र एक जैसा ही हो रहा है। वीडियोकॉन इन्‍सॉल्‍वेंसी में जा रही है।  वहीं कोर्ट के बाहर समझौते के चलते ऑरकॉम फिलहाल दिवालिया होने से तो बच गई, लेकिन कंपनी को अपना टावर और टेलिकम्‍युनिकेशन बिजनेस बड़े भाई मुकेश अंबानी की जियो को बेचना पड़ रहा है। ग्रुप का कर्ज कम करने के लिए अनिल अंबानी ने इंफ्रा और पॉवर से जुड़ा अपना बिजनेस अडानी ग्रुप को बेच दिया है। 

 

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