Home » Industry » IT-TelecomFacebook kills ‘trending’ topics, tests breaking news label फेसबुक ट्रेंडिंग न्‍यूज को बंद करेगा ब्रेकिंग न्‍यूज शुरू करेगा

ट्रेंडिंग न्‍यूज को प्रमोट नहीं करेगी फेसबुक, लाएगी ब्रेकिंग न्‍यूज का सेक्‍शन

इस सेक्‍शन के चलते ही फेसबुक को फेक न्‍यूज व राजनीतिक पक्षपात और चुनावों को प्रभावित करने के आरोपों का सामना करना पड़ा..

1 of

नई दिल्‍ली। फेसबुक ने ट्रेडिंग न्‍यूज को अब प्रमोट नहीं करने का फैसला किया है। लॉन्चिंग के 4 साल बाद ही कंपनी इस सेक्‍शन को बंद करने जा रही है। फेसबुक इसकी जगह ब्रेकिंग न्‍यूज और लोकल न्‍यूज जैसे सेक्‍शन लेकर आएगी। कंपनी का दावा है कि ट्रेंडिंग न्‍यूज सेक्‍शन आउटडेटेड हो गया था।  

ट्विटर के यूजर्स को अपनी ओर अट्रैक्‍ट करने की मुहिम के तहत 2014 में फेसबुक ने अपनी मेन न्‍यूज फीड के बगल में हेडलाइंस की लिस्‍ट के तौर पर इसे लॉन्‍च किया था। इसके जरिए लोगों को ताजा और पॉपुलर खबरों के जुड़े रहने का ऑप्‍शन दिया गया। फेसबुक को लोगों के पर्सनल न्‍यूज पेपर के तौर पर तब्‍दील करने के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के बयान के एक साल बाद यह सेक्‍शन लॉन्‍च किया गया था।

 

बता दें कि इस सेक्‍शन के चलते ही फेसबुक को 'फेक न्‍यूज' और 'राजनीतिक पक्षपात और चुनावों को प्रभावित करने के आरोपों का सामना करना पड़ा। फेसबुक के अधिकारियों का कहना है कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की अपनी सीमित क्षमता के चलते कंपनी इसपर काबू नहीं कर पाई और अब वह पूरा सेक्‍शन ही बंद करेगी। अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए रूस की ओर से सोशल मीडिया का यूज करने के आरोपो के बाद फेसबुक की दुनिया भर में किरकिरी हो रही है। 

 

आएगा ब्रेकिंग और लोकल न्‍यूज का नया सेक्‍शन 
कंपनी एक ओर जहां अपने ट्रेंडिंग सेक्‍शन को खत्‍म कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह कुछ नए फीचर की टेस्टिंग भी कर रही है। इसमें 'ब्रेकिंग न्‍यूज' का टूल भी शामिल है। इसके जरिए पब्लिशर्स अपनी स्‍टोरी को सेट कर सकते हैं। फेसबुक लोकल न्‍यूज को और ज्‍यादा प्रॉमिनेंट बनाना चाहती है। फेसबुक के न्‍यूज प्रोडक्‍ट हेड एलेक्‍स हर्डिमैन ने कहा कि कंपनी अब भी ब्रेकिंग और रिलय टाइम न्‍यूज के लिए कमिटेड है। हालांकि एडिटोरियल डिसीजन के लिए फेसबुक का मॉडरेटर या कर्मचारी रखने की बजाय, बेहतर यही होगा कि हम न्‍यूज ऑर्गेनाइजेशन्‍स को ही ऐसा करने दें।

  
फेसबुक पर लगे थे राजनीतिक पक्षपात के आरोप 
पीयू रिसर्च के मुताबिक, अमेरिका के करीब 44 फीसदी वयस्‍क फेसबुक के जरिए ही खबरें कन्‍ज्‍यूम करते हैं। आपको बता दें कि ट्रेंडिंग सेक्‍शन को लेकर समस्‍याएं 2016 में शुरू हुईं। उस वक्‍त कन्‍जर्वेटिव्‍स ने कंपनी पर पक्षपात करने का सीधा आरोप लगाया था। एक पूर्व कॉन्‍ट्रैक्‍टर ने दावा किया कि फेसबुक कन्‍जर्वेटिव्‍स से जुड़े मसलों को अपने ट्रेंडिंग सेक्‍शन में डाउनप्‍ले कर रहा है और लिबरल से जुड़े कन्‍टेंट को प्रमोट कर रहा है। डैमेज कंट्रोल के लिए जुकरबर्ग ने खुद दक्षिणपंथी पार्टी के सदस्‍यों से कंपनी हेडक्‍वार्टर में मुलाकात की थी। पर 2 साल बाद भी फेसबुक पक्षपात के आरोपों से बच नहीं पा रही है।   

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खा गया धोखा 
2016 में फेसबुक ने ट्रेंडिंग सेक्‍शन को देखने वाले एडिटर्स को हटा दिया। इसकी जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस एक सॉफ्टवेयर को काम पर लगा दिया गया। माना गया कि ह्यूमन इंटरफियरेंस नहीं होने के चलते यह राजनीतिक पक्षपता का शिकार नहीं होगा। हालांकि इसने कंपनी के सामने फेकन्‍यूज की नई समस्‍या खड़ी कर दी। दरअसल सॉफ्टवेयर का एल्‍गोरिदम ऐसी पोस्‍ट को प्रमोट करने वाला बनाया गया, जो ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों का ध्‍यान ज्‍यादा खींचती हों। इससे फेकन्‍यूज की बाढ़ आ गईं। इसके बाद 2017 में फेसबुक ने फिर से अपने एल्‍गोरिदम में चेंज किए। अब ट्रेंडिंग सेक्‍शन में सिर्फ न्‍यूज पब्लिशर्स के टॉपिक को ही ट्रेंडिंग सेक्‍शन में डालना शुरू किया गया।  

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट