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आतंकियों के काम आ सकता है फेसबुक लेकिन ग्रोथ जरुरी, वीसी के मेमो में खुलासा

डाटा लीक को लेकर आलोचना झेल रही सोशल मीडिया साइट फेसबुक के बारे में एक और बड़ा खुलासा हुआ है।

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नई दिल्‍ली... डाटा लीक को लेकर आलोचना झेल रही सोशल मीडिया साइट फेसबुक के बारे में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग के करीबी और कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट  रहे एंड्र्यू बोसवर्थ का एक इंटरनल मेमो लीक हुआ है। इस मेमो में कहा गया है कि हम किसी भी कीमत पर ग्रोथ चाहते हैं।  बजफीड की रिपोर्ट में इस फेसबुक के इंटरनल मेमो का जिक्र किया गया है।

 

2016 में लिखा था मेमो 


2016 में लिखे गए इस मेमो में बोसवर्थ ने कहा है कि फेसबुक से लोगों की जान जा सकती है। यहां तक कि किसी आतंकी हमले की साजिश में फेसबुक का टूल मददगार साबित हो सकता है, लेकिन लोगों को जोड़ने के मिशन में ये एक छोटी बात है। मेमो के मीडिया में आने के बाद मार्क जुकरबर्ग एक बार फिर से बैकफुट पर आ गए हैं। उन्‍होंने इस संबंध में स्टेटमेंट जारी कर सफाई भी दी है।


क्‍या लिखा था मेमो में 


- लीक्ड मेमो में बोसवर्थ ने लिखा था, “हो सकता है फेसबुक की वजह से बदमाशों के चंगुल में फंस कर किसी की जान चली जाए। ये भी हो सकता है कि हमारे टूल का इस्तेमाल कर के आतंकी हमले की तैयारी करें। लेकिन हमारा काम लोगों को जोड़ना और ग्रोथ हासिल करना है। हालांकि, इस अच्छे काम के भी कुछ नकारात्मक असर हैं। हमारा काम पूरी तरह न्यायसंगत है।”

 

मेमो पर आमने-सामने जकरबर्ग और बोसवर्थ


- मेमो में बोसवर्थ ने फेसबुक की हर हाल में विकास करने की मंशा को जाहिर किया है। कहा जा रहा है कि इससे वे कंपनी के डाटा इस्तेमाल का बचाव करना चाह रहे थे। हालांकि फेसबुक फाउंडर  जुकरबर्ग ने खुद स्टेटमेंट जारी कर मेमो में कही गई बातों का खंडन किया है।
- जुकरबर्ग ने लिखा कि बोसवर्थ एक प्रतिभाशाली शख्स हैं, लेकिन वे बहुत कुछ भड़काने वाला बोलते हैं। उनके मेमो से फेसबुक के कई लोग असहमत हैं।
- उन्होंने कहा, मैं भी बोसवोर्थ के मेमो से इत्तफाक नहीं रखता। दरअसल, हम मानते हैं कि लोगों को जोड़ना ही सबकुछ नहीं है, बल्कि उन्हें करीब लाना ज्यादा जरूरी है। कंपनी इसी मिशन पर काम कर रही है।


मेमो में लिखे हुए मुद्दों पर बहस जरूरी: बोसवर्थ


- बोसवोर्थ ने भी बयान जारी कर कहा है कि जब मैंने इस पोस्ट को लिखा तब भी इससे सहमत था और आज भी हूं। उन्होंने दावा किया कि मेमो को लिखने का नजरिया उन मुद्दों को सामने लाना था जिन पर हमें चर्चा करने की जरूरत है। 
- बोसवोर्थ ने कहा, मुझे इस बात की हमेशा चिंता रही है कि हमारा प्रोडक्ट किस तरह लोगों पर प्रभाव डाल रहा है।

-मैं इसे बहुत निजी जिम्मेदारी मानता हूं कि हम लोगों पर सकारात्मक प्रभाव बनाएं। उन्‍होंने आगे कहा कि हमारी दुनिया आपस में जुड़ी नहीं है। ये सीमा, भाषा और अलग-अलग संस्कृतियों के हिसाब से बंटी हुई है। इसलिए अगर हम लोगों को जोड़ने की बात कर रहे हैं तो ये गलत नहीं है।

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