एडवांस पेमेंट के बाद भी BSNL ने काट दिया कनेक्शन, तो कंज्यूमर कोर्ट ने ग्राहक को दिलाया 2.51 लाख का मुआवजा, जानिए मामला

Consumer Forum Ordered BSNL To Pay Compensation: जयपुर में एक शख्स द्वारा टेलीफोन कनेक्शन का भुगतान समय पर करने के बाद भी बीएसएनएल ने उसका कनेक्शन काट दिया। ऐसे में उस शख्स ने कंज्यूमर फोरम की मदद ली, जिसके बाद फोरम ने कंपनी पर 2 लाख 51 हजार रुपए का जुर्माना ठाेक दिया। Consumer Protection Act, 1986 के तहत राजस्थान के Consumer Disputes Redressal Commission ने ग्राहक को हुए मानसिक कष्ट के लिए कंपनी को इस राशि का भुगतान करने को कहा। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के तौर पर 11,000 रुपए अतिरिक्त देने का कहा।

Money Bhaskar

Feb 13,2019 11:53:00 AM IST

नई दिल्ली.

जयपुर में एक शख्स द्वारा टेलीफोन कनेक्शन का भुगतान समय पर करने के बाद भी बीएसएनएल ने उसका कनेक्शन काट दिया। ऐसे में उस शख्स ने कंज्यूमर फोरम की मदद ली, जिसके बाद फोरम ने कंपनी पर 2 लाख 51 हजार रुपए का जुर्माना ठाेक दिया। Consumer Protection Act, 1986 के तहत राजस्थान के Consumer Disputes Redressal Commission ने ग्राहक को हुए मानसिक कष्ट के लिए कंपनी को इस राशि का भुगतान करने को कहा। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के तौर पर 11,000 रुपए अतिरिक्त देने का कहा।

क्या था पूरा मामला

इस मामले के आधिकारिक डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक जयपुर के रहने वाले रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बलवंत सिंह के घर पिछले कई वर्षों से बीएसएनएल कंपनी का टेलीफोन कनेक्शन था। वे भविष्य में आने वाले टेलीफोन बिलों के लिए एडवांस में ही पेमेंट करके रखते थे। उस समय बीएसएनएल में एक ऑफर चल रहा था कि अगर आप एक साल का एडवांस अमाउंट भरते हैं तो आपको एक साल तक सभी सर्विसेज फ्री में मिलेंगी। बलवंत सिंह ने 12.12.2008 को 1348 रुपए जमा कराए। इससे पहले वे समय-समय पर अमाउंट डिपॉजिट करते रहते थे। इसके बाद 25.06.2010 को उन्होंने 10,000 रुपए जमा कराए। लेकिन इससे पहले ही 23.5.2010 को बलवंत सिंह को पता चला कि भुगतान न होने का कारण बताकर उनकी सेवाएं रोक दी गई हैं।

समय पर नहीं भेजे बिल

बलवंत सिंह के मुताबिक उनके पास मार्च, 2010 में जो आखिरी बिल आया था, वह फरवरी, 2010 तक का था। इस बिल के मुताबिक आउटस्टैंडिंग अमाउंट 308 रुपए था, जिसे एडवांस अमाउंट में से काट कर जीरो कर दिया गया। इसके बाद एडवांस अमाउंट से बचे 6750 रुपए उनके अकाउंट में बने रहे। बलवंत सिंह का कहना है कि कंपनी ने जानबूझ कर उन्हें मार्च, अप्रैल और मई बिल उन्हें नहीं भेजे।

एडवांस अमाउंट का कोई जिक्र ही नहीं

जब बलवंत सिंह ने कंपनी के ऑफिस जाकर बातचीत की, तो उन्हें अप्रैल और मई, 2010 महीने के लिए 2597 रुपए का डुप्लीकेट बिल पकड़ा दिया गया। इसमें मार्च, 2010 का 1633.54 रुपए का बैलेंस भी शामिल था। 6750 रुपए की अग्रिम भुगतान राशि में से 2597 रुपए काट लेने के बाद जो 4153 रुपए बचे, वे बिल में नहीं दर्शाए गए थे। पूछताछ करने पर पता चला कि 6750 रुपए उनके अकाउंट में तो थे, लेकिन ओरिजनल बिल में यह नहीं दर्शाया गया था कि 1633.54 रुपए के आउटस्टैंडिंग अमाउंट की अवधि क्या है और यह किस आधार पर मान्य होगा। बिल भरने की अंतिम तारीख 02.07.2010 से पहले ही 23.06.2010 को उनका कनेक्शन काट दिया गया।

 

कोर्ट ने ठोक दिया जुर्माना

कंज्यूमर फोरम ने कहा कि बलवंत सिंह के पास जो बिल हैं और उन्होंने जो शिकायतें दर्ज कराई हैं उनसे साफ है कि कंपनी की लापरवाही से उन्हें काफी तनाव और परेशानी से जूझना पड़ा है। 76 वर्ष के एक सीनियर सिटीजन को लीगल एक्शन लेने के लिए मजबूर होना पड़ा, लिहाजा कंपनी को उन्हें 2,51,000 रुपए मुआवजे के तौर पर देने होंगे।

 

 

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