Home » Industry » IT-TelecomCompanies following legal course of action to prepare for unexpected #MeToo tweets

#MeToo की आंच में कंपनियों को नुकसान

अधिकारियों के खिलाफ Harassment के पुराने केस खोल रहीं कंपनियां, ले रहीं कानूनी मदद

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नई दिल्ली। देश में चल रही #MeToo अभियान की लहर ने कंपनियों में डर पैदा कर दिया है। इन कंपनियों को चिंता सता रही है कि इन्होंने अपने अधिकारियों के खिलाफ sexual harassment की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और न ही उस पर उचित कार्रवाई की, जिसका खामियाजा अब उन्हें चुकाना पड़ सकता है। #MeToo की आंच में इनकी साख भी स्वाहा हो सकती है। यही वजह है कि अब ये कंपनियां पुराने मामलों की फाइल खोल रही हैं और कानूनी सलाह ले रही हैं।

 

पिछले दो हफ्तों से देश में #MeToo मूवमेंट ने रफ्तार पकड़ी है। फिल्म इंडस्ट्री की कई महिलाओं ने आगे आकर अपने साथ हुए शोषण के वाकए को साझा किया है। ऐसे में कई कंपनियां शोषण की शिकायतों वाली पुरानी फाइलें खोल रही हैं और उनकी पड़ताल के लिए वकीलों व इंवेस्टिगेशन एजेंसियों से मदद मांग रही हैं।

 

आगे पढ़ें- जाग रहीं हैं कंपनियां

 

जाग रहीं हैं कंपनियां

 

वे कंपनियां जो अब तक sexual harassment की शिकायतों को लेकर चुप थीं, अब अचानक गहरी नींद से जागी हैं। इसके पहले कोई उनके किसी प्रमुख पदाधिकारी के खिलाफ कोई आरोप लगाए, वे खुद ही मामलों की तह तक जाकर उन्हें निपटाना चाहती हैं। आगे आने वाले समय में कहीं कंपनियों के सीनियर लीडर्स और प्रमोटर्स पर sexual harassment का कोई ट्वीट न कर दे, इसके लिए कंपनियां पहले से ही कानूनी सुरक्षा ले रही हैं।

 

मामला 1-

हाल में में जो केस रिओपन हुआ है वह एक मल्टीनेशनल बैंक के CFO के खिलाफ था, जिसमें 2013 में बैंक की इंटरनल कंप्लेंट कमीटी ने CFO को क्लीन चिट दे दी थी। कुछ वर्ष पहले बैंक की एक कर्मचारी ने लिखित में शिकायत की था कि चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर उसे और डिपार्टमेंट की नौ अन्य कर्मचारियों को harass करता था। अब बैंक ने इस मामले की पड़ताल के लिए वकील और फॉरेंसिक इंवेस्टीगेटर्स से राय लेने का फैसला किया है। ये लोग ऑफिस में महिला कर्मचारियों से बात करके इस बात का निर्णय लेंगे कि क्या CFO के व्यवहार को sexual harassment कहा जाएगा।

 

मामला 2-

देश की टॉप 10 लिस्टेड कंपनियों में से एक में सीनियर एक्जीक्यूटिव के खिलाफ कुछ महीने पहले एक महिला कर्मी ने आरोप लगाया था, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। इस मामले की पड़ताल के दौरान पता चला कि उस एक्जीक्यूटिव के खिलाफ कम से कम ऐसी 10 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। अब कंपनी इन मामलों पर निष्पक्ष कार्रवाई करना चाहती है, नहीं तो यह मामला कंपनी को भारी पड़ सकता है।

 

आगे पढ़ें- सभी सेक्टर निशाने पर

सभी सेक्टर निशाने पर

 

जो कंपनियां अपने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पिछले मामलों की पड़ताल कर रही हैं वे इंफ्रास्ट्रक्चर, हॉस्पीटैलिटी और एडवर्टाइजिंग क्षेत्र के तहत आती हैं। कंपनियां वकीलों से राय ले रही हैं कि अगर उनकी कंपनी के किसी अधिकारी के खिलाफ किसी पीड़ित ने कोई बयान दिया तो वे कैसे रिएक्ट करें। इंवेस्टीगेटर्स का कहना है कि इन कंपनियों में बनी sexual harassment committees ने भी आरोपियों का पक्ष लिया। इन समितियों ने पीड़ितों की मदद करने की बजाय उन्हें परिस्थिति के साथ समझौता करने को कहा।

 

आगे पढ़ें- ऐसे होती है पड़ताल

ऐसे होती है पड़ताल

 

फॉरेंसिक इंवेस्टीगेटर्स फैक्ट्स चेक करने के लिए ईमेल, फोन रिकॉर्ड, कंप्यूटर, लैपटॉप की हिस्ट्री खंगालते हैं। वकील तय करते हैं कि शिकायत को किस श्रेणी में रखा जाएगा। क्या वह गलत बर्ताव था या sexual harassment. 

 

क्या कहता है कानून

कई कंपनियों और उनके सीनियर एक्जीक्यूटिव ने कॉन्ट्रैक्ट के जरिए सर्वाइवर को चुप कराने की कोशिश की थी, लेकिन कानून के मुताबिक ऐसा कोई कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट नहीं हो सकता है जिससे किसी पीड़ित  को चुप कराया जा सके। पीड़िता कभी भी अपना पक्ष रख सकती है।

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