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अनिल अंबानी के सामने आया एक और संकट, अब बीएसएनएल ने मांगे 700 करोड़ रुपए

इसी सप्ताह NCLT में मुकदमा दायर करेगी सरकारी कंपनी BSNL

BSNL to approach NCLT this week against RCom to recover 700 crore rupees

नई दिल्ली। वित्तीय संकट से जूझ रही रिलायंस कम्यूनिकेशन (RCom) के मालिक अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एरिक्शन की ओर से 550 करोड़ के भुगतान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने के बाद अब सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने भी आरकॉम से 700 करोड़ रुपए की मांग की है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन 700 करोड़ रुपयों के भुगतान को लेकर BSNL इसी सप्ताह नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में मुकदमा दायर करने की तैयारी कर ली है।

BSNL के चेयरमैन ने लिया कानूनी कार्रवाई का फैसला
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बीएसएनएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनुपम श्रीवास्तव ने आरकॉम से 700 करोड़ रुपए की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है। इस संबंध में 4 जनवरी को फैसला हुआ था। आरकॉम के खिलाफ NCLT में मुकदमा दायर करने के लिए लॉ फर्म का चयन भी कर लिया है। सर्किल ऑफिसेज से इनवॉइस आने में देरी के कारण अभी तक मुकदमा दायर नहीं हो पाया है। अब इसी सप्ताह आरकॉम के खिलाफ मुकदमा दायर करने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा BSNL ने आरकॉम की ओर से जमा कराई गई 100 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी को भी भुना लिया है। 

एरिक्शन को करना है 453 करोड़ रुपए का भुगतान
अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम को एरिक्शन कंपनी को 550 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च तक का समय दिया है। इस 550 करोड़ में से आरकॉम पहले ही 118 करोड़ रुपए एरिक्शन को दे चुकी है। अब उसे 453 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि आरकॉम तय समयसीमा में इस भुगतान को करने में विफल रहती है तो उसके मालिक अनिल अंबानी को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। 

NCLAT दे चुकी है झटका
एरिक्शन को 453 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए आरकॉम ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलीट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में याचिका दाखिल कर कर्जदाताओं से मिले आयकर रिफंड को जारी करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक को निर्देश जारी करने की मांग की थी। NCLAT इस मामले में आरकॉम को झटका दिया है और SBI को किसी भी प्रकार का निर्देश देने से इनकार कर दिया है। NCLAT का कहना है कि यह मामले उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

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