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TikTok, Kwai, Clip, NewsDog, LiveMe जैसे ऐप्स पर बैन लगाने के लिए आईटी मंत्री से मांग

ये शॉर्ट म्यूजिक वीडियो ऐप बच्चों की सुरक्षा पर बन रहे हैं खतरा

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नई दिल्ली.

अगर आप सोशल मीडिया के एक्टिव यूजर हैं तो आप TikTok, Kwai, LiveMe, LIKE, Helo, Welike जैसे ऐप्स से अंजान नहीं होंगे। आपने इन ऐप्स पर बने शॉर्ट वीडियो देखे होंगे या फिर खुद वीडियो बनाए भी होंगे। इन ऐप्स ने काफी तेजी से देश में अपना यूजर बेस तैयार किया है। अकेले TikTok के ही देश में 2 लाख मंथली एक्टिव यूजर्स हैं। ऐसे में इनकी बढ़ती पहुंच का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। लेकिन अब इन ऐप्स पर रोक लगाने की मांग की जा रही है।

 

भाजपा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद को एक पत्र लिखकर इन ऐप्स पर लगाम लगाने की बात कही है। राजीव चंद्रशेखर के मुताबिक इन ऐप्स पर बच्चों की सुरक्षा दांव पर लग रही है और बच्चों को फीचर करता हुआ अश्लील कंटेट परोसा जा रहा है। उन्हाेंने पत्र में लिखा कि देश की कुल जनसंख्या में 44.4 फीसदी बच्चे हैं, इनका बचपन सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन मंत्रालय ने अभी तक इस ऑनलाइन अब्यूज के मामले में बहुत कम ध्यान दिया है।

 

 

पॉर्नोग्राफी को मिल रहा बढ़ावा

इस पत्र में राजीव ने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि शॉर्ट वीडियो मोबाइल एेप्स गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध होने से आसानी से लोगों की पहुंच में आ जाते हैं। इन पर सुरक्षा के कोई मानक नहीं होने से कम उम्र के बच्चे भी इन पर अपने वीडियो अपलोड करते हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कई बार अधिक उम्र के लोग बच्चों से ऐसे वीडियो बनवाते हैं। यह ऐप्स कम उम्र के बच्चों को पॉर्नोग्राफी के लिए ग्रूम करने का ग्राउंड बनते जा रहे हैं। इंटरनेट और मोबाइल की उपलब्धता बढ़ने से बुरी नीयत के लोगों के लिए बच्चों तक पहुंचनाउन्हें बहलानाडराना और ब्लैकमेल करना आसान हो गया है। वे अपने शिकार को ऐसे ही साेशल वीडियो ऐप पर ढूंढते हैं अौर उन्हें अब्यूज करते हैं।

 

2017 ऑनलाइन चाइल्ड अब्यूज के 24 लाख मामले

अपने पत्र में राजीव ने INTERPOL की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में भारत में ऑनलाइल चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज के 24 लाख मामले दर्ज कराए गए। अमेरिका के National Center for Missing and Exploited Children ने भी रिपोर्ट में कहा था कि 2017 में भारत में 24.46 लाख बच्चों का शोषण हुआ। हालांकि यह सिर्फ वह मामले हैं जिनकी रिपोर्ट दर्ज की गई। असल में ऐसे मामलों की संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है।

 

 

दिए ये सुझाव

राजीव चंद्रशेखर ने पत्र में बच्चों की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए कुछ सुझाव दिए-

 

-'डिजिटल एक्सप्लॉइटेशन ऑफ चिल्ड्रनकैटेगरी के अंदर आने वाले ऑनलाइन कंटेंट को मौनीटर और रेगुलेट किया करने के लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया जाए। इसमें गृह मंत्रालयमहिला व बाल विकास मंत्रालय और कानून व आईटी मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हों जो मिलकर डिजिटल चाइल्ड अब्यूज की समस्या को खत्म करने के लिए तकनीक आधारित समाधान लेकर आएं।

-बिना समय गंवाए हुए जागरूकता और सलाह अभियान शुरू किए जाने चाहिएजिसमें इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्सपुलिसअभिभावक और स्कूलों को भी शामिल किया जना चाहिए।

-IT Act, 2000 में संशोधन करके ऐसी सामग्री परोसने वाले अपराधियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही कानूनी ढांचे को मजबूत बनाया जाना चाहिए।

ऐसे मोबाइल ऐप्स को बैन कर देना चाहिए जो अपने फ्लेटफॉर्म पर आने वाले आपत्तिजनक कंटेंट की जांच नहीं कर रहे हैं। Google औरApple जैसे प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे ऐसे GooglePlay औरAppStore से ऐसे ऐप्स हटा दें जो चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक इमेज या वीडियो के एक्सचेंज की इजाजत देता हो।

 
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