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व्‍हाट्सएप को टक्‍कर देंगे बाबा रामदेव, जल्द ही फिर से लॉन्‍च होगा मैसेजिंग एप 'किमहो'

बालकृष्‍ण बोले- प्‍लेस्‍टोर पर टेस्टिंग के लिए डाला था एप, इसीलिए कुछ घंटो में ही हटा लिया गया...

baba ramdev patanjali is ready to launch its new messaging app kimho within weeks it will substitute of whats app

नई दिल्‍ली। डाटा लीक विवाद को लेकर दुनिया भर में किरकिरी झेल रही व्‍हाट्सएप को भारत में बाबा रामदेव की पतंजलि से कड़ी टक्‍कर मिल सकती है। पतंजलि आने वाले हफ्तों में अपना मैसेंजर एप 'किमहो' लॉन्‍च करने की तैयारी कर रही है। इसकी सीधी टक्‍कर फेसबुक के मैसेजिंग एप व्‍हाट्सएप से होगी। सिक्‍युरिटी कारणों के चलते पतंजलि ने अपना यह एप लॉन्‍च के कुछ ही देर बाद हाल में प्‍ले स्‍टोर से वापस ले लिया था।

 

व्‍हाट्सएप से ज्‍यादा सिक्‍योर 

ब्‍लूमबर्ग ने बाबा रामदेव के निकट सहयोगी और पतंजलि के CEO बालकृष्‍ण के हवाले से बताया कि किमहो मैसेजिंग एप में व्‍हाट्सएप से ज्‍यादा फीचर और सुविधाएं होंगी। बालकृष्‍ण ने दावा किया कि उनकी कंपनी का मैसेजिंग एप मार्केट में दोबारा इंट्री करेगा। उनकी कंपनी तब तक एप लॉन्‍च नहीं करेगी, जब तक कि हैकिंग और सिक्‍युरिटी से जुड़ी टीम यूजर्स की सुरक्षा और निजता से जुड़ी खामियों को पूरी तरह से दूर नहीं कर देती है। 

 

कुछ घंटों के भीतर कंपनी ने लिया था वापस 

आपको बता दें कि कंपनी ने हाल में अपना मैसेजिंग एप किमहो  गूगल प्‍लेस्‍टोर पर लॉन्‍च भी कर दिया था। लॉन्‍च के कुछ ही देर में इसे करीब 3 लाख लोगों ने डाउनलोड भी किया था। हालांकि कुछ घंटों पर बाद ही इस एप को वापस ले लिया गया। बालकृष्‍ण ने दावा कि एप को महज टेस्टिंग के लिए प्‍ले स्‍टोर पर डाला गया था। कंपनी कुछ सेलेक्‍टेड यूजर्स के जरिए इसके फीचर और सिक्‍युरिटी को चेक करना चाहती थी । बता दें कि किमहो एक संस्‍कृत शब्‍द है। अगर इसे अंग्रेजी में अनुवाद करें तो इसका मतलब व्‍हाट्सएप ही होता है। 

 

बाबा रामदेव की पुरानी रणनीति 

बता दें कि भारत में व्‍हाट्सएप के पास करीब 23 करोड़ यूजर हैं। पॉपुलैरिटी के मामले में यह नंबरवन मैसेजिंग ऐप है। हालांकि मदर कंपनी फेसबुक पर लगे डाटा सिक्‍युरिटी से जुड़े आरोपों के बाद पतंजलि इस सेक्‍टर में अपने लिए संभावनाएं देख रही है। यह  ठीक उसी तर्ज पर है, जिस तर्ज पर कंपनी ने मैगी पर मिलावट के आरोप लगने के बाद आपना नूडल लॉन्‍च किया था। बालकृष्‍ण कहते हैं, हम खुद व्‍हाट्एप का बेहद सम्‍मान करते हैं। पर जब हमारे पास खुद 130 करोड़ की आबादी हो, टैलैंटेड सॉफ्टवेयर डेवलपर हों, तो फिर हम आपना देसी मैसेजिंग एप क्‍यों नहीं बनाएं।  

 

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