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2जी घोटाले के बाद स्‍पेक्‍ट्रम नीलामी में ट्रांसपरेंसी बढ़ी, फायदे में रही सरकार

नई दि‍ल्‍ली. देश की राजनीति‍ में बड़ी उथल पुथल मचाने वाला 1.76 लाख करोड़ का 2जी घोटाला वर्ष 2010 में सामने आया था। मनमोहन सरकार के लि‍ए यह एक बड़ी शर्मिंदगी का मुद्दा बना। सरकार की पहली आओ पहले पाओ की नीति‍ को कैग, कोर्ट और वि‍पक्ष कठघरे में खड़ा कर दि‍या। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन को रद्द कर दि‍या।

 

भले ही आज इस घोटाले के सभी आरोपि‍यों को अदालत से क्‍लीन चि‍ट मि‍ल गई हो मगर इसने पूरी टेलीकॉम इंडस्‍ट्री में एक बड़े बदलाव का रास्‍ता बनाया। सरकार ने कई नीति‍यों को बदला, जि‍समें मुख्‍य था स्‍पेक्‍ट्रम के आवंटन का तरीका जो पहले के मुकाबले ज्‍यादा ट्रांसपेरेंट और ज्‍यादा लाभकारी साबि‍त हुआ।

 

गलत साबि‍त हुई शंका

दरअसल कम कीमत पर स्‍पेक्‍ट्रम के आवंटन ने ऐसे लोगों के लि‍ए दरवाजे खोल दि‍ए थे जो उस वक्‍त यहां मार्केट में आने को लेकर गंभीर थे ही नहीं। नई नीति‍ की बदौलत ऐसे खि‍लाड़ी मैदान से बाहर हो गए। वैसे तो शुरू में ये आशंका जताई गई थी कि‍ इससे वि‍देशी नि‍वेश पर असर पड़ेगा मगर में ये शंका गलत साबि‍त हुई। सरकार की मंशा थी कि‍ नीलामी की प्रक्रि‍या अपनाने से यह साफ हो जाएगा कि‍ बाजार की स्‍थि‍ति‍ क्‍या है, डि‍मांड और सप्‍लाई में‍ कि‍तना अंतर है और यह प्रक्रि‍या पहले के मुकाबले ज्‍यादा पारदर्शी रहेगी। ऐसा हुआ भी। इसके बाद से वर्ष 2013 से लेकर अब तक 4 बार स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी हो चुकी है और पहली नीलामी को छोड़कर सभी सरकार के लि‍ए लाभकारी रही हैं।

 

2013 सीडीएमए स्‍पेक्‍ट्रम ऑक्‍शन

वर्ष 2013 में सरकार ने 1800, 800 और 900 एमएच बैंड की नीलामी का फैसला लि‍या। इनके लि‍ए 30 जनवरी 2013 को सरकार ने आवेदन मंगाए मगर आवेदन करने की अंति‍म ति‍थि‍ यानी 15 फरवरी 2013 तक एक भी आवेदन नहीं आया। तीनों बैंड की नीलामी के लि‍ए 11 मार्च 2013 का दि‍न तय कि‍या गया था। हालांकि‍ 800एमएच बैंड में एमटीएस इंडि‍या को को छोड़कर कि‍सी और बैंड में नीलामी के लि‍ए कोई आगे नहीं आया। इसका नतीजा ये हुआ कि‍ 1800, 800 और 900 एमएच बैंड की नीलामी को अनि‍श्‍चि‍तकाल के लि‍ए टाल दि‍या गया और 800एमएच का आवंटन एमटीएस इंडि‍या को कर दि‍या गया।

 

दर्ज कराया था वि‍रोध

कंपनि‍यों ने सरकार द्वारा तय की गई कीमत पर वि‍रोध भी दर्ज करया था। उस समय वोडाफोन समूह के सीईओ ने कहा वि‍टोरि‍या कोलाओ ने कहा था, ‘भारत में कीमतें बहुत कम हैं इसलि‍ए लाभ भी कम है ऐसे में हम स्‍पेक्‍ट्रम के लि‍ए इतनी महंगी कीमत नहीं चुका सकते। समस्‍या ये है कि‍ स्‍पेक्‍ट्रम की कीमत को लेकर यहां गलत आकलन कि‍या गया है।’

 

2014 की नीलामी 

इसमें डि‍पार्टमेंट ऑफ टेलीकम्‍युनि‍केशन ने 900 और 1800 एमएच में 2जी स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी की। इसमें एयरटेल, वोडफोन इंडि‍या, आइडि‍या, एयरसेल, रि‍लायंस कम्‍युनि‍केशन, रि‍लायंस जि‍यो, टाटा टेलीसर्वि‍सेज और टेलीविंग्‍स ने हि‍स्‍सा लि‍या। दस दि‍न तक बोली चली और कुल 612 अरब रुपए में स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी हुई।

 

2015 स्‍पेक्‍ट्रम ऑक्‍शन

इसमें 800, 900, 1800, 2100एमएच स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी हुई। इसमें एयरटेल, वोडाफोन इंडि‍या, आइडि‍या, रि‍लायंस जि‍यो, रि‍लायंस कम्‍युनि‍केशन, एयरसेल, टाटा डोकोमो और यूनि‍नॉर ने हि‍स्‍सा लि‍या। यह नीलामी 25 मार्च को हुई और 19 दि‍न की चली। कुल 109874 करोड़ रुपए में स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी हुई। नीलामी के लि‍ए उपलब्‍ध स्‍पेक्‍ट्रम का 11 फीसदी नीलाम नहीं हो पाया।  

 

2016 स्‍पेक्‍ट्रम नीलामी

वर्ष 2016 में 7 बैंड की नीलामी हुई। इसमें पहली बार 700एमएच बैंड स्‍पेक्‍ट्रम को नीलामी के लि‍ए रखा गया था। इसमें भारती एयरटेल, आइडि‍या सेलुलर, रि‍लायंस कम्‍युनि‍केशन, टाटा टेलीसर्वि‍सेज, एयरसेल, रि‍लायंस जि‍यो ने भाग लि‍या। नीलामी के लि‍ए जि‍तना स्‍पेक्‍ट्रम रखा गया था उसका 40 फीसदी की बि‍क पाया क्‍योंकि‍ बेस प्राइज ज्‍यादा रखा गया था।

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