फोनपे /फ्लिपकार्ट डील में वालमार्ट के हाथ लगी ‘लॉटरी’, 68000 करोड़ रु की हो गई छोटी सी कंपनी

  • देश के शीर्ष स्टार्टअप के रूप में उभरकर सामने आई फोनपे
  • फ्लिपकार्ट डील में वालमार्ट के लिए बड़ा सरप्राइज बेनिफिट 

Moneybhaskar.com

Jul 10,2019 01:42:52 PM IST


नई दिल्ली. वालमार्ट (Walmart Inc) ने बीते साल जब भारत की अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को 16 अरब डॉलर में खरीदा था तो अमेरिकी कंपनी ने डील के तहत मिली छोटी डिजिटल पेमेंट कंपनी पर ज्यादा गौर नहीं किया था। अब यह कंपनी देश के शीर्ष स्टार्टअप के रूप में उभरकर सामने आई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसे वालमार्ट के अभी तक के सबसे बड़े अधिग्रहण के लिए बड़ा सरप्राइज बेनिफिट माना जा रहा है।

68 हजार करोड़ रुपए हुई फोनपे की वैल्युएशन

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि फ्लिपकार्ट के बोर्ड ने हाल में फोनपे (PhonePe) को एक नई एंटिटी बनने के लिए अधिकृत कर दिया और लगभग 10 अरब डॉलर (68 हजार करोड़ रुपए) की वैल्युएशन पर कंपनी 1 अरब डॉलर जुटाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले 2 महीने में फंडिंग पूरी हो सकती है, हालांकि अभी वार्ता जारी है और शर्तों में बदलाव हो सकता है।

स्वतंत्र हो जाएगी कंपनी

अगर फंडिंग पूरी हो जाती है तो यूनिट अलग इन्वेस्टर बेस के साथ पूरी तरह स्वतंत्र हो जाएगी, हालांकि वालमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट एक शेयरहोल्डर बनी रहेगी। वालमार्ट और फ्लिपकार्ट ने इस मसले पर कोई टिप्पणी नहीं की।

पेटीएम को टक्कर दे रही है फोनपे

फोन पे ने हाल के दिनों में भारत की अग्रणी डिजिटल पेमेंट कंपनियों में जगह बनाई है। बीते एक साल के दौरान कंपनी का वॉल्यूम और ट्रांजैक्शन वैल्यू लगभग 4 गुना हो गया है, क्योंकि देश का कंज्यूमर, बिजनेस और एक-दूसरे को डिजिटली मनी ट्रांसफर के लिए टेक्नोलॉजी को अपना रहा है। फोनपे अब वारेन बफे समर्थित पेटीएम को टक्कर दे रही है।
कीबैंक कैपिटल मार्केट्स के एक एनालिस्ट ने एक रिसर्च नोट में लिखा कि फोनपे एक ‘अप्रत्याशित संपत्ति’ है। उन्होंने फ्लिपकार्ट के ई-कॉमर्स ऑपरेशन से अलग इस बिजनेस की वैल्यू 14 अरब डॉलर से 15 अरब डॉलर के बीच होने का अनुमान जाहिर किया है।

फ्लिपकार्ट के तीन पूर्व कर्मचारियों ने की थी शुरुआत

इस स्टार्टअप की स्थापना फ्लिपकार्ट के तीन पूर्व कर्मचारियों ने दिसंबर, 2015 में की थी। एक साल के भीतर फ्लिपकार्ट के फाउंडर्स बिनी बंसल और सचिन बंसल ने फोनपे का अधिग्रहण कर लिया। उन्होंने कंज्यूमर की ऑनलाइन खरीद की प्रक्रिया आसान बनाने के उद्देश्य से यह डील की थी। एक साल से कम वक्त के भीतर भारत सरकार ने भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने और डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए अप्रत्याशित रूप से बड़े बैंक नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया। नोटबंदी के साथ पेटीएम, फोनपे जैसी कंपनियों को तगड़ा बूस्ट मिला।

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