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    ई-कॉमर्स कंपनियां अब नहीं सेलर्स की पहली पसंद, घटते मार्जिन और पेमेंट अटकने से ऑफलाइन रिटेलर्स पर फोकस बढ़ा

     
    नई दिल्ली। ई-कॉमर्स कंपनियों के छोटे सेलर्स की पहली पसंद नहीं रह गया है। घटते मार्जिन और पेमेंट अटकने से अब वो दोबारा ऑफलाइन रिटेल पर फोकस कर रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार एक समय उनके बिजनेस में ऑनलाइन और ऑफलाइन वेंडर्स की हिस्सेदारी 40 से 50 फीसदी तक पहुंच गई थी लेकिन बढ़ती प्रॉब्लम देखते हुए 10 से 20 फीसदी पर आ गई है।
    बदल रहा है हैंडीक्राफ्ट कारोबार का बिजनेस मॉडल
     
    जयपुर के हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर शारदा सौरभ रजाई एक्सपोर्ट करते हैं। वह ऑनलाइन कारोबार के बढ़ते बेस का फायदा उठाने के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट के साथ जुड़ गए। उन्होंने बताया कि एक्सपोर्ट में उन्हें एक महीने में 100 रजाई का बल्क ऑर्डर मिलता था। वह लगभग 90 रजाई ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए बेजने लगे। उन्हें बीते 6 महीने से पेमेंट अटकने, मार्जिन घटने और प्रोडक्ट वापिस आने पर नुकसान होने लगा। शारदा सौरभ ने moneybhaskar.com को कहा कि अब उनका 90 फीसदी फोकस एक्सपोर्ट और 10 फीसदी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर शिफ्ट हो गया है, जो डेढ़ साल पहले लगभग बराबरी पर था।
     
    ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर घटते मार्जिन ने भंग किया मोह
     
    ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ज्यादा मार्जिन, फिक्स्ड कॉस्ट जीरो होने और छोटे ऑर्डर के कारण ऑनलाइन मार्केट का रूख करने लगे। रोजाना आ रही नई शॉपिंग वेबसाइटो और स्मार्ट फोन के जरिए लोगों के जुड़ने के कारण ये बाजार लगातार बढ़ रहा था। ट्रेडर्स भी बढ़ते प्लेटफॉर्म का फायदा उठाने के लिए इनसे जुड़ने लगे। फिरोजाबाद में ग्लास की होम फरनिशिंग आइटम बनाने वाले चंद्रा एक्सपोर्ट के डायरेक्टर शरत चंद्र में ईकॉमर्स साइट एमवे से जुड़े हैं। चंद्रा ने कहा ने कहा कि मार्जिन ज्यादा नहीं बचने के कारण वेबसाइट पर कारोबार बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि ज्यादा क्वेरी नहीं आने और प्रोडक्ट वापिस आने पर उन्होंने ये फैसला किया।
     
    नहीं मिली ज्यादा ग्रोथ
     
    दिल्ली के हैंडीक्राफ्ट कारोबारी ऑर्टइफेक्ट के डायरेक्टर रवि शरण ने बताया कि ई-कॉमर्स पोर्टल वेबसाइट पर डिस्काउंट बढ़ाने के लिए मार्जिन घटाने का दबाव बना रही थी। कई बार मार्जिन घटाने पर उन्हें फायदा नहीं मिल रहा था जिसके कारण वह पहले की तरह अपने रिटेल कारोबार पर ही ध्यान बढ़ा रहे हैं। वह पहले 15 से 20 फीसदी प्रोडक्ट ऑनलाइन बेच रहे थे जो अब घटकर 5 फीसदी रह गया है।
     
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