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ई-कॉमर्स कंपनि‍यां अब नहीं दे पाएंगी हैवी डि‍स्‍काउंट, शर्तों के साथ लागू होगा 100% FDI

Industry Team

Mar 30,2016 02:32:00 PM IST
नई दिल्ली। सरकार ने ई-कॉमर्स में 100 फीसदी वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश (एफडीआई) को मंजूरी दे दी है। 100 फीसदी एफडीआई का नियम उन्हीं ई-कॉमर्स कंपनियों पर लागू होगा, जो मार्केटप्लेस कॉन्सेप्ट पर काम करती हैं। हालांकि‍, इन नि‍यमों के लागू होने के बाद ई-कॉमर्स कंपनि‍यों की ओर से दि‍ए जाने वाला हैवी डि‍स्‍काउंट ऑफर्स अब बंद हो जाएंगे।
हैवी डि‍स्‍काउंट के दि‍न गए
डीआईपीपी ने जारी नोटि‍फि‍केशन में कहा है कि‍ मार्केटप्‍लेस ‘प्रत्‍यक्ष’ या ‘अप्रत्‍यक्ष’ रूप से गुड्स या सर्वि‍सेज की कीमतों को प्रभावि‍त नहीं कर सकते और एक समान कारोबारी माहौल बनाना होगा। इसका साफ मतलब है कि‍ कंपनि‍यां प्रोडक्‍ट बेचने और कस्‍टमर्स को आकर्षि‍त करने के लि‍ए हैवी डि‍स्‍काउंट नहीं दे पाएंगी।
वीडि‍योकॉन के सीओओ सीएम सिंह ने मनीभास्‍कर को बताया कि‍ अब मार्केटप्‍लेस ई-कॉमर्स पर दि‍ए जाने वाले डि‍स्‍काउंट दि‍न खत्‍म हो सकते हैं। वहीं, ब्रांड्स भी अपने हि‍साब से ऑनलाइन कंपनि‍यों पर प्रोडक्‍ट बेच सकते हैं।
क्‍या हैं नि‍यम व शर्त
  • ई-कॉमर्स कंपनि‍यां वेयरहाउस, लॉजि‍स्‍टि‍क्‍स, फुलफि‍लमेंट सर्वि‍सेज, कॉल सेंटर, पेमेंट कलेक्‍शन और दूसरी सर्वि‍सेज के लि‍ए सेलर्स को सपोर्ट दे सकती हैं।
  • ई-कामर्स कंपनि‍यां जो मार्केटप्‍लेस की भूमि‍का नि‍भा रही हैं वह इन्‍वेंटरी की ओनरशि‍प नहीं ले सकती।
  • एक ई-कॉमर्स कंपनी कि‍सी एक वेंडर से 25 फीसदी से ज्‍यादा सेल्‍स अपने मार्केटप्‍लेस पर नहीं कर सकतीं।
  • मार्केटप्‍लेस मॉडल पर बि‍कने वाले गुड्स या सर्वि‍स के सेलर्स का नाम, कॉन्‍टेक्‍ट नंबर, एड्रेस और दूसरी जानकारी मौजूद होनी चाहि‍ए।
  • मार्केटप्‍लेस मॉडल पर बि‍कने वाले प्रोडक्‍ट्स की वारंटी और गारंटी की जि‍म्‍मेदारी सेलर्स की होगी।
अगली स्‍लाइड में पढ़ें, 100 फीसदी एफडीआई का छोटे रि‍टेलर्स ने कि‍या वि‍रोध...
छोटे रिटेलर्स ने किया विरोध सरकार ने ई-कॉमर्स मार्केट प्लेस के क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दे दी है। इसके विरोध में कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स का कहना है कि यह रिटेल में एफडीआई को मंजूरी देने से भी गलत फैसला है। सरकार के इस कदम से देश के एसएमई सेक्टर और छोटे व्यापारियों को बहुत ज्यादा नुकसान होगा। वैसे भी ई-कॉमर्स की वजह से लोकल मार्केट और शॉपिंग माल का बुरा हाल है। कई दुकानें बंद हो चुकी हैं या बंदी के कगार पर हैं। फिलहाल कैट का कहना है कि सरकार के इस कदम का जमकर विरोध किया जाएगा। कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि मोदी सरकार ने छोटे व्यापारियों से वादा किया था कि उन्हें ई-कॉमर्स में एफडीआई लाकर किसी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन आज सरकार ने अपने वादे से यूटर्न ले लिया है। यह एक तरह से छोटे व्यापारियों के साथ धोखा है। उनका कहना है कि एक ओर मोदी सरकार विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों को तरह-तरह से फायदा पहुंचाने में जुटी है, वहीं स्माल बिजनेस को गति देने के लिए उनके पास कोई स्कीम नहीं है। उल्टे छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। लोकल ट्रेडर्स का पहले से बुरा हाल, फुटफाल 50 फीसदी कम असल में फॉरेन बेस्ड या देश की ई-कॉमर्स कंपनियां लोगों को ऑनलाइन प्रोडक्ट्स सेल करती हैं। ये कंपनियां हर प्रोडक्ट पर छूट देती हैं और उनकी कीमत मार्केट की तुलना में काफी कम हो जाती है। इसी वजह से टियर 1 और टियर 2 शहरों के लोगों का ई-कॉमर्स में रुझान बढ़ा है। मेट्रो शहरों में इसी रुझान के चलते लोकल बाजारों या शॉपिंग माल्स में लगातार फुटफाल गिर रहा है। कारोबारियों का कहना है कि उनके यहां फुटफाल पिछले 2 से 3 साल में 50 फीसदी तक गिर गया है। समय की बचत और सस्ते प्रोडक्ट के चलते लोग ऑनलाइन शॉपिंग की ओर जा रहे हैं। दुकान पर जाकर खरीददारी करने वालों की संख्या कम हुई है। बहुत से दुकानदार तो दुकान बंद करने को मजबूर हुए हैं। यहां तक कि शॉपिंग माल्स में भी शोरूम खोलकर बैठने वालों को घंटों ग्राहक नसीब नहीं हो रहे हैं। आगे की स्लाइड में जाने क्या कहना है व्यापारियों का.....यह कैसा मेक इन इंडिया, भारत तो डंपिंग यार्ड बन जाएगा खंडेलवाल का कहना है कि एक ओर सरकार मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया की बात करती है, दूसरी ओर अमेजॉन और ईबे जैसी विदेशी कंपनियों को एफडीआई के जरिए फायदा पहुंचाया जा रहा है। इससे मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया जैसे प्रोग्राम फेल हो जाएंगे। विदेशी कंपनियों को अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए मनचाहा ग्राउंड मिल जाएगा। भारत तो एक तरह से इन कंपनियों के लिए डंपिंग ग्राउंड बन जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को विदेशी कंपनियों को बढ़ावा देने की बजाए कॉमर्स मिनिस्टर की अगुआई में ऑटोनॉमस बॉडी बोर्ड ऑफ इंटरनल ट्रेड का गठन करना चाहिए जो डोमेस्टिक ट्रेड के ग्रोथ के लिए उपाय करें। ई-कॉमर्स कंपनियां नहीं करती नियमों का पालन कैट का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियां एफडीआई पॉलिसी का उल्लंघन कर रही हैं, कई मामलों में लोगों को बेवकूफ भी बना रही हैं। ऐसी भी शिकायत है कि ये कंपनियां टैक्स चोरी कर रही हैं। उनके खिलाफ एक्शन नहीं हो रहा है। इससे उन्हें ऐसा करने के लिए बढ़ावा मिल रहा है। सरकार को एफडीआई के जरिए बढ़ावा देने की बजाए एक रेग्युलेटरी के जरिए इन्हें कंट्रोल करना चाहिए। अमेजन और ईबे जैसी कंपनियों को होगा फायदा फिलहाल, अमेजन और ईबे जैसी ग्लोबल ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में ऑनलाइन मार्केटप्लेस का ऑपरेशन करती हैं, जबकि कई ऑनलाइन रिटेल मॉडलों के लिए एफडीआई की कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं होने के कारण फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसी घरेलू कंपनियां पहले से ही फॉरेन इन्वेस्टमेंट जुटा चुकी हैं। इस फैसले से इन्हें भी लाभ होगा।
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