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    सॉफ्टबैंक भारत में अब तक लगा चुकी है 18 हजार करोड़ का दांव, प्रॉफि‍ट में केवल एक कंपनी

    सॉफ्टबैंक भारत में अब तक लगा चुकी है 18 हजार करोड़ का दांव, प्रॉफि‍ट में केवल एक कंपनी
     
    नई दि‍ल्‍ली। दुनि‍या के सबसे बड़े इन्‍वेस्‍टर्स में से एक सॉफ्टबैंक को भारत में करीब 9,000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का नुकसान हुआ है। ये नुकसान देश की यूनि‍कार्न कंपनी स्नैपडील और ओला से हुआ है। इसके बावजूद इंडियन मार्केट पर सॉफ्ट बैंक का भरोसा बना हुआ है। कंपनी ने अब तक भारत में करीब 18 हजार करोड़ रुपए स्‍टार्टअप्‍स में इन्‍वेस्‍टमेंट कर चुकी है। सॉफ्टबैंक ने पोर्टफोलि‍यो में आधे से ज्‍यादा यूनि‍कॉर्न (100 करोड़ डॉलर) की कंपनि‍यां शामि‍ल हैं। हालांकि अभी भी सॉफ्टबैंक को उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिल पाया है। उसके द्वारा इन्वेस्ट की गई कंपनियों में से केवल एक कंपनी इनमोबी ही ऐसी है जो प्रॉफि‍ट में आई है।
     
    क्‍या नुकसान के लि‍ए तैयार था सॉफ्टबैंक?
     
    टैक्‍नोपैक एडवाइजर्स के सीनि‍यर वाइस प्रेसि‍डेंट अंकुर बेसि‍न ने moneybhaskar.com को बताया कि‍ कोई भी कंज्‍यूमर इंटरनेट कंपनी ऐसी नहीं है जो प्रॉफि‍टेबल हो और यह मामला सभी बड़े इन्‍वेस्‍टर्स के साथ है। दो साल पहले तक केवल फंड जुटाने पर ही बात की जाती थी। यह सभी कंपनि‍यां जानती हैं कि‍ ग्रोथ आने में तीन से पांच साल का वक्‍त लगता है।
     
    यूनि‍कॉर्न इंडि‍या वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर अनि‍ल जोशी ने बताया कि‍ सॉफ्टबैंक टेलि‍कॉम बैकग्राउंड कंपनी है और वह जानती है कि‍ मोबाइल और इंटरनेट प्‍लैटफॉर्म पर कंपनि‍यों को ग्रोथ हासि‍ल करने में वक्‍त लगता है। भारत में मोबाइल का यूज तेजी से बढ़ रहा है और यही इन्‍वेस्‍टर्स को आकर्षि‍त कर रहा है।  
     
    भारत में अलीबाबा जैसी सफलता नहीं पाई
     
    सॉफ्टबैंक चीन की सबसे बड़ी कंपनी अलीबाबा में भी सबसे बड़ा इन्‍वेस्‍टर है। इस तरह चीन और दूसरी जगहों पर अलीबाबा सफल हुई है वैसे ही सॉफ्टबैंक को भारत में अपनी सफल इन्‍वेस्‍टमेंट का इंतजार करना पड़ रहा है।  
     
    प्रॉफि‍ट में आया सॉफ्टबैंक का एकलौता इन्‍वेस्‍टमेंट
     
    मोबाइल एडवर्टाइजिंग कंपनी इनमोबि‍ ने पि‍छले साल जारी बयान में कहा कि‍ इनमोबि‍ 2011 में पहली प्राइवेट टेक स्‍टार्टअप थी जि‍सकी वैल्‍यू 1 अरब डॉलर से ज्‍यादा थी। कंपनी के 2016 के अंति‍म क्‍वार्टर में नेट प्रॉफि‍ट हुआ है और यह 2017 में भी जारी रहने की उम्‍मीद है।
     
    इनमोबि‍ ने सॉफ्टबैंक और दूसरे इन्‍वेस्‍टर्स के जरि‍ए 22 करोड़ डॉलर का फंड जुटाया था। इसके अलावा, कंपनी ने 10 करोड़ डॉलर का वेंचर डेट भी जुटाया। सॉफ्टबैंक ने एक प्रेस नोट में कहा कि‍ वह इनमोबि‍ को आगे भी सपोर्ट करती रहेगी क्‍योंकि‍ वह मोबाइल एडवर्टाइजिंग ईकोसि‍स्‍टम में लगातार इनोवेशन कर रही है।
     
    भारत में सफल होने का इंतजार कर रही है सॉफ्टबैंक
     
    स्‍नैपडील
     
    स्‍नैपडील में सॉफ्टबैंक की हि‍स्‍सेदारी मौजूद हैं। साल 204 के अंत में स्‍नैपडील ने सॉफ्टबैंक के नेतृत्‍व में 62.7 करोड़ डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट मि‍ला था। वही, बीते साल कंपनी को 50 करोड़ डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट मि‍ला। हालांकि‍, सॉफ्टबैंक को स्नैपडील में किए गए निवेश के वैल्‍यूएशन में एक अरब डॉलर की कमी दर्ज करनी पड़ी। वहीं, सॉफ्टबैंक लगातार स्‍नैपडील को बेचने की कोशि‍श में लगी हुई है।
     
    ओला
     
    ऐप बेस्‍ट कैब कंपनी ओला को नवंबर में सॉफ्टबैंक से 1,675 करोड़ रुपए का फंड मि‍ला था। हालांकि‍, ओला को यह फंड 3 अरब डॉलर के वैल्‍यूएशन पर मि‍ला था जबकि‍ पहले इसकी वैल्‍यूएशन 4.5 अरब डॉलर था। वहीं, ओला का नुकसान मार्च 2015 में 20 गुना बढ़कर 754.87 करोड़ रुपए हो गया है।  
     
    हाउसिंग. कॉम
     
    सॉफ्टबैंक हाउसिंग.कॉम में भी सॉफ्टबैंक ने इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या है। सॉफ्टबैंक ने हाल ही में 34 करोड़ रुपए का फंड दि‍या था। इसके अलावा, जनवरी 2016 में सॉफ्टबैंक ने 1.5 करोड़ डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या था। हालांकि‍, रि‍यल्‍टी पोर्टल हाउसिंग.कॉम अब भी प्रॉफि‍ट में नहीं आ पाई है। इतना ही नहीं कंपनी के को-फाउंडर राहुल यादव को बोर्ड मैंबर्स से हटा दि‍या गया था।   
     
    ग्रोफर्स
     
    फूड और ग्रॉसरी डि‍लि‍वरी स्‍टार्टअप ग्रोफर्स ने नवंबर 2015 में सॉफ्टबैंक की अगुवाई में करीब 780 करोड़ रुपए का फंड मि‍ला था। इसके कुछ महीने बाद ही ग्रोफर्स ने केवल ऐप वाले मॉडल को बंद कर दि‍या और अपनी डेस्‍कटॉप वेबसाइट को लॉन्‍च कि‍या। वहीं, कंपनी ने 9 शहरों में अपना ऑपरेशन तक बंद कर दि‍या।
     
    ओयो रूमस
     
    होटल रूम बुकिंग कंपनी ओयो ने पि‍छले साल सॉफ्टबैंक की अगुवाई में 635 करोड़ रुपए का फंड जुटाया था। हालांकि‍, ओयो रूम्‍स ने कहा है कि‍ एग्रेसि‍व तरीके से प्रॉफि‍ट कमाने के लि‍ए आगे बढ़ रही है।
     
    हाइक
     
    पि‍छले साल अगस्‍त में सॉफ्टबैक की मदद से बढ़ने वाले मैसेजिंग ऐप हाइक ने 1,170 करोड़ रुपए का फंड जुटाया था।

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