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चुनौती / ई-कॉमर्स बाजार पर अमेरिका एवं यूरोप की नजर, डब्ल्यूटीओ में विकसित देशों से अकेले लोहा ले रहा है भारत

ग्लोबल ई-कॉमर्स नीतियां भारतीय व्यापारियों को ले जाएंगी घाटे में

India to fight against global e-comm rules at WTO alone
  • अमेरिका की ई-कॉमर्स नीतियों के पक्ष में दुनिया के तकरीबन 70 देश खड़े हैं।
  • भारत के अलावा साउथ अफ्रीका और सऊदी अरब फिलहाल इन नीतियों के खिलाफ हैं।
  • अमेरिका, चीन, यूरोप चाहते हैं डाटा का फ्री ट्रांसफर। 

नई दिल्ली.

देश के रिटेलर्स को व्यापार में घाटा न उठाना पड़े, इसके लिए भारत दुनिया के बड़े देशों से अकेले ही लड़ रहा है। विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation, WTO) के मंच पर भारत अकेले ही अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे देशों से लोहा लेने की तैयारी में है। दरअसल ये देश चाहते हैं कि ई-कॉमर्स के नियम दुनियाभर में एक समान किए जाएं, जिससे इन देशों की बड़ी कंपनियां कहीं से भी व्यापार कर सकें। भारत इसके पक्ष में नहीं है। अगर ई-कॉमर्स के ग्लोबल नियम भारत में भी लागू हो जाते हैं, तो यहां के स्टार्टअप और व्यापारियों के लिए अमेजन और अलीबाबा जैसी दिग्गज कंपनियों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा।

 

70 देश खड़े हैं अमेरिका के साथ

अमेरिका की ई-कॉमर्स नीतियों के पक्ष में दुनिया के तकरीबन 70 देश खड़े हैं। ये सभी देश ई-काॅमर्स नीतियों को लचीला बनाए रखना चाहते हैं। अमेरिका, यूरोप, चीन और जापान ऐसे ई-कॉमर्स नियमों को सारी दुनिया में लागू करने के पक्ष में हैं, जिससे अमेजन, उबर और अलीबाबा जैसी कंपनियों के लिए दुनिया का हर बाजार खुल सके। भारत के अलावा साउथ अफ्रीका और सऊदी अरब फिलहाल इन नीतियों के खिलाफ हैं।

 

क्या चाहते हैं अमेरिका-चीन-यूरोप

अमेरिका की डिमांड है कि ग्राहकों की निजी जानकारी समेत हर तरीके के डाटा के लोकलाइजेशन और ट्रांसफर पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए। ई-ट्रांसमिशन पर कोई टैरिक नहीं लगना चाहिए। यूरोप की मांग है कि एक-देश से दूसरे देश डाटा फ्लो पर पाबंदी नहीं लगनी चाहिए। सॉफ्टवेयर्स के सोर्स कोड शेयर करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। चीन की मांग भी यहीं है कि डाटा फ्लो पर बातचीत होनी चाकए। ई-कॉमर्स के ट्रेड से जुड़े पहलुओं पर ज्यादा फोकस किया जाना चाहिए।

 

भारत को मंजूर नहीं हैं ये नीतियां

भारत सरकार इन नियमों के लिए राजी नहीं होगी क्योंकि इससे घरेलू व्यापारियों और उपभोक्ता को ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा। सरकारी सूत्रों बताया, 'अगर 160 देश भी ग्लोबल कॉमर्स रूल के पक्ष में होंगे, तब भी भारत इसे रोकने की कोशिश करेगा।' भारत की मुख्य चिंता किसी घरेलू पॉलिसी के न होने को लेकर है। साथ ही सरकार को अमेरिका और यूरोप की तरफ से फ्री डेटा फ्लो की वकालत करना भी ठीक नहीं लगता। सरकार के मुताबिक इन नीतियों के चलते देश के ग्राहकों का डाटा बेलगाम तरीके से दूसरे देशों में पहुंचेगा। साथ ही सरकार को इस बात की भी चिंता है कि इन नीतियों से बड़े देशों को तो फायदा पहुंचेगा, लेकिन विकासशील देशों को विश्व व्यापार संगठन में इसका अधिक फायदा नहीं मिलेगा।

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