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    स्‍नैपडील से बेस्‍टडील टीवी तक: वेंडर्स की फंसी है करोड़ों की पेमेंट, मामला सरकार तक पहुंचा

     
    नई दिल्‍ली। ई-कॉमर्स कंपनि‍यां अब ऑनलाइन वेंडर्स के लि‍ए पहले की तरह फायदेमंद नहीं रही हैं। ई-कॉमर्स कंपनि‍यां वेंडर्स की बकाया पेमेंट करने में डि‍फॉल्‍ट कर रही हैं। ऐसा इसलि‍ए क्‍योंकि‍ कंपनि‍यों की फाइनेंशि‍यल पॉजि‍शन और सेल्‍स ग्रोथ लगातार कम हो रही हैं। वहीं, इन्‍वेस्‍टर्स की ओर से ई-कॉमर्स कंपनि‍यों को मि‍लने वाला सपोर्ट भी कम हो गया है। यही वजह है कि‍ ऑनलाइन वेंडर्स वि‍भि‍न्‍न मंत्रालयों में अपनी शि‍कायत कर रही हैं लेकि‍न ई-कॉमर्स को लेकर नि‍श्‍चि‍त पॉलि‍सी नहीं होने की वजह से मामला अटका हुआ है। बकाया पेमेंट रोकने वाली कंपनि‍यों में आस्‍कमीबाजार, स्‍नैपडील, बेस्‍टडील टीवी आदि‍ कंपनि‍यां शामि‍ल हैं।
     
    कंपनि‍यों की हालत खराब होने से अटकी वेंडर्स की पेमेंट
     
    ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री का बूम आने के साथ-साथ देशभर में कई कंपनि‍यां खड़ी हो गई। इन कंपनियों ने वि‍देशी इन्‍वेस्‍टर्स से फंड जुटाकर कारोबार खड़ा कि‍या लेकि‍न बि‍जनेस मॉडल सही होने से इन्‍वेस्‍टर्स ने फंडिंग रोक दी और इनका ऑपरेशन ठप पड़ गया। ऐसे में इन कंपनि‍यों के साथ काम करने वाले वेंडर्स की पेमेंट फंस गई हैं।
     
    पि‍छले साल सि‍तंबर में ई-कॉमर्स कंपनी AskmeBazaar में वेंडर्स के फंसे 200 करोड़ रुपए का मामला अब भी सरकार के वि‍भि‍न्‍न वि‍भागों के बीच घूम रहा है। वेंडर्स को सरकार की ओर से बकाया पैसे वापस मांगने के सवाल पर अब तक कोई जवाब नहीं मि‍ला है।
     
    वहीं, शि‍पला शेट्टी और उनके पति‍ राज कुंदरा की कंपनी बेस्‍टडील टीवी ने अपना कारोबार बंद कर दि‍या है। ऐसे में वि‍भि‍न्‍न वेंडर्स के करीब 4.5 करोड़ रुपए की बकाया पेमेंट रुकी हुई है। वेंडर्स अब कंपनी के खि‍लाफ केस दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, खुद राज कुंदरा ने सीईओ पद से इस्‍तीफा दे दि‍या है।
     
    इसके अलावा, स्‍नैपडील के पास बकाया राशि और रीफंड‍ के रूप में वेंडर्स के 300 करोड़ से 400 करोड़ रुपए हैं। एसोसि‍एशन को डर है कि‍ उनके यह पेमेंट फंस सकते हैं। एसोसि‍एशन का कहना है कि‍ ऐसी कई कंपनि‍यों के वेंडर्स अपनी पेमेंट का इंतजार कर रहे हैं। यहां प्रत्‍येक वेंडर और हर कंपनी को ट्रैक करना मुश्‍कि‍ल है। हमारे पास नि‍यमि‍त रूप से कई शि‍कायतें आ रही हैं।
     
    सरकार के पास नहीं है कोई पॉलि‍सी
     
    एसोसि‍एशन ने कहा कि‍ अभी तक ऐसी कोई पॉलि‍सी नहीं बनी है जि‍समें यह बताया गया हो कि‍ यदि‍ कोई ई-कॉमर्स कंपनी डि‍फॉल्‍ट होती है तो वेंडर्स का पैसा कैसे वापस मि‍लेगा। कई ई-कॉमर्स कंपनि‍यां वेंडर्स के ऐवज में मार्केट से पैसा जुटाती हैं। एसोसि‍एशन इसे लेकर कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मि‍नि‍स्‍टर को भी लेटर लि‍खा है।
     
    कंपनि‍यों ने आरोपों को कि‍या खारि‍ज
     
    स्‍नैपडील के स्‍पोक्‍सपर्सन ने बताया कि‍ यहां सेलर्स या वेंडर्स का कोई बकाया पेमेंट नहीं है और यह बि‍ना आधार की शि‍कायत है। सभी पेमेंट्स टाइम पर की जा रही है। बेस्‍टडील टीवी ने कहा कि‍ जनवरी 2016 में कंपनी ने ड्रॉप शि‍पमेंट पॉलि‍सी को शुरू कि‍या और कई वेंडर्स ने इसमें शि‍फ्ट भी हो गए। कई वेंडर्स ने टाइम पर इन्‍वेंटरी और ऑर्डर्स को नहीं भेजा जि‍सकी वजह से 35 हजार ऑर्डर कैंसि‍ल हो गए डि‍लि‍वरी रि‍टर्न होने पर भारी नुकसान हुआ। इसलि‍ए बेस्‍टडील टीवी ने वेंडर्स के साथ हुए समझौते के तहत पेनाल्‍टी लगाई।

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