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    Home »Industry »E-Commerce» Impasse At Snapdeal Board Meeting, No Decision On Sale Yet

    स्नैपडील को फ्लि‍पकार्ट के हाथों बेचने पर नहीं हुआ फैसला, बोर्ड मीटिंग में इन्वेंस्टर्स में मतभेद

     
    नई दि‍ल्‍ली. स्‍नैपडील को फ्लि‍पकार्ट में वि‍लय होने वाली डील पूरी नहीं हो पाई है। जापान की इन्‍वेस्‍टमेंट कंपनी सॉफ्टबैंक मंगलवार को अपने को-इन्‍वेस्‍टर नेक्‍सस वेंचर पार्टनर्स (एनवीपी) को इस डील के लि‍ए राजी नहीं कर पाया। मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि‍ स्‍नैपडील की बोर्ड मीटिंग में सॉफ्टबैंक और नेक्‍सस के प्रति‍नि‍धि‍ डील पर एक मत नहीं हो पाए।   
      
    एनवीपी की वजह से अधूरी रह गई डील
     
    मीटिंग में डील अधूरी रह गई क्‍योंकि‍ स्‍नैपडील में शुरुआती इन्‍वेस्‍ट करने वाली कंपनी एनवीपी, सॉफ्टबैंक द्वारा दि‍ए गए वैल्‍यूएशन पर राजी नहीं है। सूत्रों ने बताया कि‍ स्‍नैपडील को फ्लि‍पकार्ट को बेचने के लि‍ए यह अप्रूवल जरूरी है।   
     
     
    स्‍नैपडील के बोर्ड में सात मेंबर
    स्‍नैपडील को ऑपरेट करने वाली जेस्‍पर इंफोटेक में सॉफ्टबैंक, कालारी कैपि‍टल और एनवीपी के प्रति‍नि‍धि‍यों के अलावा को-फाउंडर्स कुणाल बहल और रोहि‍त बंसल शामि‍ल हैं। सूत्रों के मुताबि‍क, एनवीपी अपने स्‍नैपडील में मौजूद 10 फीसदी हि‍स्‍से के लि‍ए ज्‍यादा वैल्‍यूएशन मांग रहा है।  
     
    एनवीपी के एक बार राजी होने के बाद कुछ हफ्तों में फ्लि‍पकार्ट के साथ होने वाली डील का ऐलान कि‍या जाएगा। हालांकि‍, एनवीपी और स्‍नैपडील को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मि‍ला है।
     
    अगर डील हुई तो देश की सबसे बड़ी ई-कामर्स क्षेत्र की डील होगी
     
    अगर फ्पिकार्ट के हाथों बिकने की डील होती है, तो यह देश के ई-कामर्स क्षेत्र की सबसे बड़ी डील होगी। इससे इस क्षेत्र का लैंडस्‍केप बदल जाएगा, साथ ही दूसरी कंपनियों के बीच ऐसी हीं डील होती नजर आ सकती हैं।
     
    पिछले साल स्‍नैपडील की वैल्‍यु 6.5बिलियन डालर आंकी गई थी
     
    पिछले साल फरवरी में स्‍नैपडील की वैल्‍यूएशन 6.5 बिलियन डालर आंकी गई थी। यह वैल्‍यूएशन उस वक्‍त की गई थी, जब इसमें लास्‍ट राउंड की फंडिंग हुई थी। सूत्रों का कहना है कि बाद में कंपनी की वैल्‍यूएशन कम आंकी गई है और इसी घटी वैल्‍यूएशन पर डील की बात हो रही है। 
     
    फंडिंग में आने लगी हैं दिक्‍कतें
     
    पिछले कुछ समय से भारतीय ई-कामर्स कंपनियों को फंडिंग लेने में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन्‍वेस्‍टर अब चाहते हैं कि कंपनियां अपने खर्च घटाएं और फायदा कमा कर दिखाएं। दूसरी तरफ बाजार में कॉम्पिटीशन लगातार बढ़ रहा है। दुनिया की बड़ी कंपनियां जैसे अमेजन, होमग्रो बाजार में कड़ी टक्‍कर दे रही हैं, जिससे स्‍नैपडील और फ्पिकार्ट को दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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