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    स्‍नैपडील, फ्लि‍पकार्ट, ओला नहीं रहे इन्‍वेस्‍टर्स के फेवरेट, नए स्‍टार्टअप्‍स पर बढ़ाया फोकस

    स्‍नैपडील, फ्लि‍पकार्ट, ओला नहीं रहे इन्‍वेस्‍टर्स के फेवरेट, नए स्‍टार्टअप्‍स पर बढ़ाया फोकस
     
    नई दि‍ल्‍ली। स्‍नैपडील, फ्लि‍पकार्ट, ओला और जोमैटो जैसी यूनिकॉन (1 अरब डॉलर) कंपनि‍यां अब वि‍देशी इन्‍वेस्‍टर्स की फेवरेट नहीं रही हैं। दुनि‍या के बड़े इन्‍वेस्‍टर्स लगातार भारत के बड़े स्‍टार्टअप्‍स में अपना इन्‍वेस्‍टेमेंट घटा रहे हैं जि‍सकी वजह से इनका वैल्‍यूएशन भी घट गया है। हालांकि‍, ये इन्‍वेस्‍टर्स दूसरे स्‍टार्टअप्‍स पर ज्‍यादा फोकस कर रहे हैं। छह बड़े ग्‍लोबल इन्‍वेस्टर्स ने सालाना आधार पर अपनी फंडिंग में करीब 50 फीसदी तक की कमी कर दी है।
     
    इन्‍वेंस्‍टर्स की उम्‍मीदों पर खरी नहीं उतरी कंपनि‍यां
     
    ई-कॉमर्स एक्‍सपर्ट अंकुर बेसि‍न ने moneybhaskar.com को बताया कि‍ जब वि‍देशी इन्‍वेस्टर्स ने भारत की ई-कॉमर्स कंपनि‍यों पर दांव लगाना शुरू कि‍या था तब मार्केट में कम्‍पीटि‍शन नहीं था। वहीं, उनको यह भी लगा था कि‍ ये टॉप कंपनि‍यां है और इनके प्रॉफिट में आने के चांस ज्‍यादा हैं लेकि‍न ऐसा नहीं हुआ। ई-कॉमर्स कंपनि‍यों ने उम्‍मीद से ज्‍यादा खर्च कि‍या और रेवेन्‍यू मॉडल पर काम ही नहीं कि‍या। यही वजह है कि‍ अब इन्‍वेस्‍टर्स अपना फोकस इन कंपनि‍यों से हटा रहे हैं। इन्‍वेस्‍टर्स को अपना रि‍टर्न नहीं मि‍ल रहा है।
     
    ई-कॉमर्स बि‍जनेस चलाने का नहीं है कोई एक्‍सपीरि‍यंस
     
    टेक्‍नोपैक एडवाइर्स के चेयरमैन अरविंद के. सिंघल ने moneybhaskar.com को बताया कि‍ ई-कॉमर्स कंपनि‍यों का बि‍जनेस कॉपी कैट मॉडल पर बेस्‍ड है। अमेजन और अलीबाबा जैसी कंपनि‍यों को ही बि‍जनेस का एक्‍सपीरियंस है। वहीं, जि‍न लोगों को कमान भी संभालने को दी गई उनके पास भी ई-कॉमर्स बि‍जनेस का एक्‍सपीरि‍यंस नहीं था। फाउंडर्स ने अपने हि‍साब से ही स्‍ट्रैटजी बनाई हैं। लेकि‍न अब कंपनि‍यों के इन्‍वेस्‍टर्स ही ड्राइविंग सीट पर आ रहे हैं। फ्लि‍पकार्ट में ऐसा हो गया है। स्‍नैपडील में भी ऐसा मूमकि‍न है।
     
    नए आइडि‍या के पास इन्‍वेस्‍टमेंट का ज्‍यादा मौका
     
    अरविंद सिंघल ने बताया कि‍ जो इन्‍वेस्‍टर्स पहले यूनि‍कॉन पर इन्‍वेस्‍टर्स पर दांव लगा रहे थे वो अब नए आइडि‍या वाले छोटे स्‍टार्टअप्‍स को चून रहे हैं। गौरतलब है कि‍ हाल ही में जापान के एंत्रप्रेन्‍योर शूई मोरोफुजी ने कहा कि‍ हम ऐसे स्‍टार्टअप्‍स को देख रहे हैं जो कॉम्‍पैक्‍स मार्केट्स में बि‍जनेस मॉडल पर काम रही हैं।
     
    इन्‍वेस्‍टर्स घटा रहे हैं इन्‍वेस्‍टमेंट
     
    दुनि‍या के बड़े इन्‍वेस्‍टर्स भारत के स्‍टार्टअप्‍स इंडस्‍ट्री में 2014 और 2015 में काफी बढ़चढ़ कर इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या। लेकि‍न साल 2016 में इनकी ओर से होने वाले इन्‍वेस्‍टमेंट में तेजी से गि‍रावट आई है। इसके इन्‍वेस्‍टमेंट में करीब 50 फीसदी तक की गि‍रावट आई है। फ्लि‍पकार्ट में सबसे ज्‍यादा इन्‍वेस्‍टमेंट टाइगर ग्‍लोबल का है और साल 2014 के बाद से उनकी ओर से कंपनी में कोई इन्‍वेस्‍टमेंट नहीं कि‍या गया।
     
    वहीं, मोबाइल ऐप बेस्‍ड कैब सर्वि‍स प्रोवाइडर ओला में एक्‍ससेल पार्टनर्स का इन्‍वेस्‍टमेंट सबसे ज्‍यादा है। साल 2014 में एक्‍ससेल ने 1.3 अरब डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या था जो 2016 में 40 लाख डॉलर पर आ गया है।
     
    इसके अलावा, सि‍क्‍युअल कैपि‍टल ने बीते साल केवल 53.1 करोड़ डॉलर से कम का इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या जबकि‍ उससे पहले इसने कारदेखो, प्रेक्‍टो, हेलीहंट, फ्रीचार्ज, स्‍टेजि‍ला आदि‍ में हि‍स्‍सा लेने के लि‍ए 1.2 अरब डॉलर लगाए थे।  
     
    इन्‍वेस्‍टर
    2014 
    2015
    2016 (इन्‍वेस्‍टमेंट)
    टाइगर ग्‍लोबल
    250.7 करोड़
    237.8 करोड़
    कोई नहीं
    सि‍क्‍युअल कैपि‍टल
    35.7 करोड़
    120.2 करोड़
    53.1 करोड़
    एक्‍ससेल पार्टनर्स
    125.9 करोड़
    81.6 करोड़
    38.7 करोड़
    मैट्रि‍क पार्टनर्स
    44.3 करोड़
    31 करोड़
    44.3 करोड़
    नेक्‍सस वेंचर
    38.9 करोड़
    36.4 करोड़
    22.5 करोड़
    सैफ पार्टनर्स
    11 करोड़
    36.4 करोड़
    24.2 करोड़
    (स्रोत : टैक्‍न टेक्‍नोलॉजी)
     
    इन्‍वेस्‍टर्स को चाहि‍ए प्रॉफि‍ट
     
    ब्रांड एक्‍सपर्ट हरीश बि‍जूर ने moneybhaskar.com को बताया कि‍ ऑनलाइन इंडस्‍ट्री की मौजूदा कंपनि‍यों पर परफॉर्मेस सुधारने का दबाव बढ़ता जा रहा है। बड़ी कंपनि‍यों ने एक तरफ अपने कॉम्‍पीटि‍टर को कम कि‍या वही अपना मार्केट शेयर भी बढ़ाया। हालांकि‍, फंड की कमी और इन्‍वेस्‍टर्स की ओर से लगातार प्रॉफि‍ट के दबाव में वह इंडि‍पेंडेंट तरीके से दूसरी कंपनी को नहीं चला पा रही हैं। कोई भी कंपनी नॉन प्रॉफि‍टेबल ऑर्गेनाइजेशन को ऑपरेट नहीं करना चाहती है।
     

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