कंपनी /दिल्ली में अमेजन-फ्लिपकार्ट के खिलाफ तय होगी आंदोलन की रणनीति, 10 नवंबर को कैट की आपात बैठक

  • ई-कामर्स कंपनियों के साथ किसी भी तरह की सहभागिता को स्वीकार नहीं करेगी कैट 

Moneybhaskar.com

Nov 08,2019 03:06:25 PM IST

नई दिल्ली. ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने व्यापार की वृद्धि में ऑफलाइन व्यापार को हिस्सा बनाएं जाने के प्रस्ताव को कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने एक सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ऐसी किसी भी कम्पनी जो सरकार की नीति का पालन नहीं करती है के साथ व्यापारियों का हाथ मिलाने का कोई सवाल ही नहीं है।

10 नवम्बर को कैट दिल्ली में देश के सभी राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की एक आपात राष्ट्रीय बैठक बुलाई है

कैट ने कहा, यह सबसे आश्चर्यजनक है कि ऐसी ई-कॉमर्स कंपनियों को नीति के सख्त पालन के निर्देश देने के बजाय सरकार उन्हें अपने मौजूदा व्यवसाय मॉडल के साथ व्यापार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि कैट ने पहले ही इन ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की हुई है और जिसके लिए कैट ने 10 नवम्बर को दिल्ली में देश के सभी राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की एक आपात राष्ट्रीय बैठक बुलाई है जिसमें आगामी 13 नवम्बर से देश भर में अमेजन एवं फ्लिपकार्ट सहित अन्य ई कामर्स कंपनियों के खिलाफ एक आंदोलन शुरू करने की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख नेता बैठक में भाग लेंगे। कैट ने ट्रांसपोर्ट, लघु उद्योग,हॉकर्स किसानों, उपभोक्ताओं, स्व-नियोजित समूहों और महिला उद्यमियों के राष्ट्रीय संगठनों के नेताओं के साथ स्वदेशी जागरण मंच को भी बैठक में आमंत्रित किया है।

ई-काॅमर्स कंपनियों की मनमानी की वजह से ऑफलाइन कारोबार को नुकसान झेलना पड़ा

ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी और सरकार की एफडीआई नीति का उल्लंघन करने के कारण हाल ही में दिवाली के त्योहारी सीजन में ऑफलाइन कारोबार को लगभग 50% के व्यापार का नुकसान झेलना पड़ा है। इन ई कामर्स कंपनियों ने लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, भारी डिस्काउंट देना ,हानि वित्तपोषण बिकने वाले माल पर नियंत्रण तथा अपने पोर्टल पर कुछ विशेष विक्रेताओं को प्रमुखता देने जैसी व्यापार पद्दति अपनाई जा रही है जो सरकार की एफडीआई नीति का सरासर उल्लंघन हैं। एक अनुमान के अनुसार दिवाली के त्योहारी सीजन में देश भर में लगभग 6 लाख करोड़ का व्यापार होता है जबकि इस साल देश के व्यापारियों ने लगभग 3 लाख करोड़ का व्यापार ही किया है।

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