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'सेलर्स वार' में अमेजन-फ्लि‍पकार्ट, कोई दे रहा है कैशबैक तो कि‍सी ने बदली फीस पॉलि‍सी

इंडि‍यन ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री की दो बड़ी कंपनि‍यों फ्लि‍पकार्ट और अमेजन इंडि‍या के बीच कॉम्‍पीटि‍शन गहराता जा रहा है।

Sellers War: Amazon-Flipkart Battling for New Customers

नई दि‍ल्‍ली। इंडि‍यन ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री की दो बड़ी कंपनि‍यों फ्लि‍पकार्ट और अमेजन इंडि‍या के बीच कॉम्‍पीटि‍शन गहराता जा रहा है। नंबर वन बनने के लि‍ए इन दोनों कंपनि‍यों के बीच सेलर्स को लेकर नई जंग शुरू हो गई है। कंपनि‍यां अपने प्‍लेटफॉर्म पर सेलर्स को बरकरार रखने के साथ-साथ ज्‍यादा से ज्‍यादा नए सेलर्स को जोड़ना चाहती है। यही वजह है कि‍ जहां एक ओर फ्लि‍पकार्ट ने सेलर्स को भेजे लेटर में कहा है कि‍ वह वेंडर्स की ओर से प्रोडक्‍ट्स पर दि‍ए जाने वाले डि‍स्‍काउंट के बदले इंसेंटि‍व्‍स देगी। वहीं, अमेजन ने अपनी सेलर फीस पॉलि‍सी में बदलाव कर दि‍या है। 

 

क्‍या है फ्लि‍पकार्ट की नई सेलर पॉलि‍सी

 

ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर एसोसि‍एशन के एक वरि‍ष्‍ठ अधि‍कारी ने बताया कि‍ जो भी डि‍स्‍काउंट ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर दि‍या जा रहा है उसका पूरा बोझ सेलर्स ही उठाते हैं। हालांकि‍, फ्लि‍पकार्ट ने कहा है कि‍ वह डि‍स्‍काउंट का 40 फीसदी अमाउंट सेलर्स को कैशबैक के तौर पर वापस ट्रांसफर कर देंगे। 

 

उदाहरण के लि‍ए अगर कोई सेलर कि‍सी प्रोडक्‍ट पर 100 रुपए का डि‍स्‍काउंट देता है तो अब उसे 40 रुपए वापस मि‍ल जाएंगे। ऐसे में सेलर्स की ओर से ज्‍यादा ऑफर्स पेश कि‍ए जा सकते हैं। फ्लि‍पकार्ट के प्‍लेटफार्म पर 1 लाख से ज्‍यादा सेलर्स अपने प्रोडक्‍ट्स बेच रहे हैं।

 

टैक्‍स अथॉरि‍टी को खटक रहा है डि‍स्‍काउंट 

 

ई-कॉमर्स कंपनी की ओर से प्रोडक्‍ट की एमआरपी में बड़ी कटौती टैक्‍स अथॉरि‍टी को पहले से खटक रही है। टैक्‍स अथॉरि‍टीज ने पहले ही कहा है कि‍ इस तरह के डि‍स्‍काउंट लॉन्‍ग टर्म ब्रांड प्रमोशन कॉस्‍ट हैं और इनहें रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर के साथ नहीं जोड़ा जा सकता और बलेंस शीट में लॉस के तौर पर नहीं दि‍खाया जा सकता। माना जा रहा है कि‍ फ्लि‍पकार्ट ने यह कदम इससे होने वाले असर को कम करने के लि‍ए उठाया है। 

 

वेंडर्स का क्‍या है आरोप

 

वेंडर्स का आरोप है कि‍ फ्लि‍पकार्ट और अमेजन अपने वेंडर्स के जरि‍ए ज्‍यादा से ज्‍यादा डि‍स्‍काउंट दि‍या जा रहा है जि‍सका मुकाबला छोटे वेंडर्स नहीं कर सकते हैं। फ्लि‍पकार्ट के डब्‍ल्‍यू एस रि‍टेल और अमेजन के क्‍लाउडटेल जैसे वेंडर्स हैवी डि‍स्‍काउंट देते हैं और यह डि‍स्‍काउंट कंपनि‍यों की ओर से प्रमोट कि‍ए जाते हैं। फ्लि‍पकार्ट और अमेजन इन डि‍स्‍काउंट का पूरा बोझ उठाती हैं। यह डीआईपीपी के नि‍यमों का उल्‍लंघन है, जि‍सकी शिकायत हम कई बार सरकार से कर चुके हैं।

 

अमेजन ने भी बदली सेलर्स की पॉलि‍सी

 

अमेजन ने भी कुछ दि‍न पहले ही मल्‍टीपल प्रोडक्‍ट कैटेगरीज के लि‍ए रेफरल फीस को बदलने के साथ-साथ सेलर्स के लि‍ए फि‍क्‍स्‍ड क्‍लोजिंग फीस को बढ़ा दि‍या है जोकि‍ 19 अप्रैल से लागू होगा। अमेजन ने सेलर्स से कहा है कि‍ शूज और अपैरल जैसी कैटेगरीज के लि‍ए थर्ड पार्टी सेलर्स को अपने प्रोडक्‍ट्स अमेजन के फुलफि‍लमेंट सेंटर्स में लंबे समय तक रखने के लि‍ए ज्‍यादा पैसे देने होंगे। 30 अप्रैल 2018 से शूज और अपैरल कैटेगरीज की 6 माह से लेकर 12 माह तक इन्‍वेंटरी यूनि‍ट्स के लि‍ए लॉन्‍ग टर्म स्‍टोरेज फीस (LTSF) चार्ज लगेगा। 

 

अमेजन का क्‍या है तर्क

 

अमेजन इंडि‍या के वरि‍ष्‍ठ अधि‍कारी ने कहा कि‍ अब हमारे पास 3 लाख से ज्‍यादा सेलर्स हो गए हैं जोकि 16 करोड़ से ज्‍यादा प्रोडक्‍ट्स को देश भर में बेचते हैं। हमारे कई नए सेलर्स अब छोटे और अर्ध शहरी और ग्रामीण इलाकों से हैं और वह देशभर में लोगों को समान बेच रहे हैं। हमारी प्राइम ऑफर्स पर तेजी से बढ़ी है ताकि‍ हमारे सेलर्स को अपने लॉयल कस्‍टमर बेस और नि‍यमि‍त तौर पर खरीदारी करने वालों तक पहुंचना आसाना हो। 

 

हमारा मानना है कि‍ यह अब पहले से ज्‍यादा जरूरी हो गया है कि‍ सेलर्स को ज्‍यादा च्‍वाइस, दक्षता और फ्लेक्‍सि‍बि‍लि‍टी दी जा ताकि‍ वह बढ़ती डि‍मांड को पूरा कर सकें। इसलि‍ए हमने अपनी फीस स्‍ट्रक्‍चर में कुछ बदलाव कि‍या है जोकि‍ 19 अप्रैल 2018 से प्रभावी होने वाली है।

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