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दो दोस्‍तों ने 2 कमरों में शुरू की थी फ्लिपकार्ट, आज एक लाख करोड़ रु में बिकी

भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट अब अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट की हो गई है।

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नई दिल्‍ली... भारत की सबसे बड़ी ई - कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट अब अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट की हो गई है। जानकारी के मुताबिक भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी में वॉलमार्ट ने 77 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीद ली है। । वॉलमार्ट 1.07 लाख करोड़ रुपए में फ्लिपकार्ट में 77% हि‍स्‍सेदारी खरीद रही है।  रॉयटर्स के मुताबिक यह डील करीब 1 .07 लाख करोड़ रुपए में हुई है।  अक्‍टूबर 2007 में शुरू हुई  फ्लिपकार्ट ने 10 साल से ज्‍यादा के सफर में ऑनलाइन मार्केटिंग में कई बड़े बदलाव किए। दिलचस्‍प बात ये है कि ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की शुरुआत सिर्फ दो कमरे में दो दोस्‍तों ने की थी। आज हम आपको रिपोर्ट में फ्लिपकार्ट के बनने और उसके सफल होने की कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं। 
 
ऐसे बनी फ्लिपकार्ट


फ्लिपकार्ट की नींव रखने वाले दो दोस्‍त सचिन बंसल और बिन्‍नी बंसल की मुलाकात आईआईटी दिल्‍ली में हुई थी। आईआईटी ग्रैजुएट दोनों दोस्तों ने पासआउट होने के बाद तकरीबन एक साल तक अलग-अलग कंपनियों में काम किया। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते दौर को देखते हुए दोनों ने अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ज्वाइन की। यहां काम करते वक्त दोनों ने अपना बिजनेस करने का मन बनाया। इसके लिए अक्‍टूबर 2007 में दोनों ने दो-दो लाख रुपए जुटाए और अमेजन छोड़कर ई-कामर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट की नींव रखी।आगे पढ़ें - कैसे दो कमरों में शुरू किया कारोबार ​
 

दो कमरों से शुरू किया बिजनेस


 सचिन और बिन्नी ने बेंगलुरू के अपने 2 कमरों वाले फ्लैट में दो कम्प्‍यूटर के साथ बुक्‍स की ऑनलाइन बिक्री के लिए वेबसाइट शुरू की। लेकिन, दस दिनों तक उन्‍हें एक भी ऑर्डर नहीं मिला। इसी बीच उन्‍हें आंध्रप्रदेश से एक ग्राहक ने ‘लिविंग माइक्रोसॉफट टू चेंज द वर्ल्‍ड’ किताब का ऑर्डर दिया। यह कंपनी के लिए पहला ऑर्डर था। 


18 महीने बाद मिला इन्वेस्टर
 
कंपनी शुरू करने के 18 महीने बाद तक सचिन और बिन्‍नी बंसल को अपने खर्च के लिए हर महीने पैरेंटस से दस हजार रुपए मंगाने पड़ते थे। हालांकि, बिजनेस न चल पाने से वो निराश नहीं हुए। आखि‍रकार किस्‍मत ने साथ दिया और वर्ष 2009 में एसेल पार्टनर (इंडिया) का साथ मिल गया। एसेल पार्टनर ने फ्लिपकार्ट में 10 लाख डॉलर का निवेश किया। कारोबार बढ़ता गया और फ्लिपकार्ट को निवेशक मिलते गए। साल 2010 में टाइगर ग्‍लोबल ने भी फ्लिपकार्ट में भरोसा जताया और 2 करोड़ डॉलर का निवेश किया।
 
ऑनलाइन मनी स्‍टोर प्रीपेड वॉलेट लॉन्च
 

निवेशक मिलने से कंपनी का दायरा बढ़ता गया। फ्लिपकार्ट ने वर्ष 2011 में ऑनलाइन मनी स्‍टोर प्रीपेड वॉलेट लॉन्च किया। इसे मार्केट में काफी पसंद किया गया। कंपनी ने अपने अगले चरण में वर्ष 2012 में इन्वेस्‍टर्स से 15 करोड़ डॉलर जुटाए और डिजिटल म्‍यूजिक स्‍टोर फ्लाइट लॉन्च किया।
 
सेलर्स के लिए मार्केटप्‍लेस
 
दो स्टोर लॉन्च करने के बाद फ्लिपकार्ट ने सेलर्स को अपनी कंपनी के साथ जोड़ने का प्लान बनाया। साल 2013 में कंपनी ने इसकी लॉन्चिंग भी कर दी। सेलर्स प्लेटफॉर्म मिलने से कुछ कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट ऑनलाइन बेचने में रुचि दिखाई और प्रोडक्‍ट की बिक्री शुरू की। इसके बाद फ्लिपकार्ट को ऑनलाइन ऑर्डर मिलने लगे। इस दौरान कंपनी को अपना डिजिटल म्‍यूजिक स्‍टोर फ्लाइट बंद करना पड़ा। 
 
करती रही एक्पैंशन
 
कंपनी यहीं नहीं रूकी और ग्राहकों के लिए एक नई सुविधा पेमेंट गेटवे पे-जिप्‍पी लॉन्च किया। अगले कुछ दिनों में मौजूदा निवेशकों से 36 करोड़ डॉलर और जुटाए। 
 आगे पढ़ें - प्रयोग भी किया और विवादों में भी आई 

बिग बिलियन डे सेल लगाई

2014 में कंपनी के पास ग्रास मर्चेंडाइज वॉल्‍युम एक अरब डॉलर हो गई इसके बाद कंपनी ने 30 करोड़ डॉलर में ऑनलाइन शॉपिंग प्‍लेटफॉर्म www.myntra.com खरीदा। कंपनी ने इसी साल चीनी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा की तर्ज पर इंडिया में बिग बिलियन डे सेल लगाई। वहां से कंपनी की वैल्युएशन में बड़ा अंतर आया।

 

 

विवादों में रही फ्लिपकार्ट

फ्लिपकार्ट जितनी तेजी से ई-कॉमर्स सेगमेंट में बढ़ी उतने ही विवाद उसके साथ जुड़ते गए। हाल ही में कंपनी का नाम भारती एयरटेल के साथ एक खास डील को लेकर विवादों में रहा। चर्चा थी कि कंपनी ने एयरटेल से ऐसा करार किया है कि उसके प्‍लेटफॉर्म पर फ्लिपकार्ट के ऐप को खास अहमियत मिलेगी। इस डील को नेट न्यूट्रैलिटी के नियम का उल्लंघन माना गया। बाद में कंपनी को इस संबंध में एयरटेल से अपनी डील तोड़नी पड़ी।

 

ट्वीटर पर चली वॉर

फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर और सीईओ सचिन बंसल ने ट्विटर पर अपनी प्रतिद्वंदी कंपनी स्नैपडील का नाम लिए बिना उस पर निशाना साधा। सचिन बंसल ने इस पर लिखा कि अगर आप अच्छे इंजीनियरों को नौकरी पर नहीं रख पा रहे हैं तो इसका दोष भारत पर मत मढ़ो। वे (अच्छे इंजीनियर) कल्चर और चुनौतियों को देखकर ज्वाइन करते हैं। बंसल के ट्वीट को अमेरिका के मशहूर अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' में छपे उस आर्टिकल का जवाब माना गया, जिसमें स्नैपडील के को-फाउंडर और सीओओ रोहित बंसल ने कहा था कि भारत में ऐसे प्रोग्रामर नहीं हैं, जिनकी जरूरत उनकी कंपनी को है।

 
 
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