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ई-कॉमर्स के लि‍ए सरकार बना रही है नेशनल पॉलि‍सी, अमेजन-फ्लि‍पकार्ट जैसी कंपनि‍यों पर नजर रखेगा स्‍पेशल विंग

FDI नि‍यमों के कि‍सी भी तहत के उल्‍लंघन को चेक करने के लि‍ए एक स्‍पेशल विंग बनाने का प्रस्‍ताव है।

Special wing to check amazon, flipkart FDI

नई दि‍ल्‍ली। ई-कॉमर्स कंपनि‍यों जैसे अमेजन, फ्लि‍पकार्ट और मिंत्रा द्वारा वि‍देशी नि‍वेश नीति‍ (FDI) के कि‍सी भी तहत के उल्‍लंघन को चेक करने के लि‍ए एक स्‍पेशल विंग बनाने का प्रस्‍ताव है। अलग से बनाए जाने वाले विंग में इंडस्‍ट्री डि‍पार्टमेंट और प्रवर्तन नि‍देशालय के अधि‍कारी होंगे जो दि‍शा-नि‍र्देशों के प्रवर्तन में कि‍सी भी तरह के उल्‍लंघन का निपटान करेंगे। यह विंग अस्‍थायी है क्‍योंकि‍ सरकार ई-कॉमर्स पर नेशनल पॉलि‍सी बना रही है ताकि‍ इस सेक्‍टर के रेग्‍युलेशन को सुधारा जा सके। 

 

सरकार उठा रही है कदम

 

एक अंतर मंत्रायल समूह ने तय कि‍या है कि‍ ई-कॉमर्स की परि‍भाषा को व्‍यापक कि‍या जाएगा। इसमें इलेक्‍ट्रॉनि‍क तरीके से की गई कोई भी खरीद, मार्केटिंग, डि‍स्‍ट्रि‍ब्‍यूशन और गुड्स एंड सर्वि‍सेज की डि‍लि‍वरी को शामि‍ल कि‍या जाएगा और इसे ई-कॉमर्स के लि‍ए बने एक सिंगल कानून में डाला जाएगा। 

 

अलग से बनी विंग प्रेस नोट 3 के लागू होने या उससे संबंधि‍त कि‍सी शि‍कायत और मौजूदा पॉलि‍सी का लागू करने का अस्‍थायी मापदंड बनाएगी। ई-कॉमर्स में वि‍देशी नि‍वेश के लि‍ए बने दि‍शा-नि‍र्देशों को प्रेस नोट 3 में दि‍या गया है। 

 

अस्‍पष्‍ट चीजों को हटाना है मकसद

 

इन बदलावों का मकसद दि‍शा-नि‍र्देंशों के आसपास मौजूद अस्‍पष्‍टता को हटाना है। रि‍लेटर्स का आरोप है कि‍ इनकी मदद से बि‍जनेस-टू-कंज्‍यूमर ई-कॉमर्स पॉलि‍सी में मार्केटप्‍लेस ऑपरेटर्स आसानी से काम कर रहे हैं। अमेजन इंडि‍या और फ्लि‍पकार्ट (वॉलमार्ट ने 16 अरब डॉलर में खरीदा) ने कि‍सी भी गलत काम से इनकार कि‍या है और कहा है कि‍ वह कानून के अनुरूप काम कर रहे हैं।  

 

रि‍टेलर्स का आरोप

 

रि‍टेलर्स का आरोप है कि‍ ई-कॉमर्स कंपनि‍यां अपने प्‍लेटफॉर्म पर कीमतों को प्रभावि‍त करते हुए नि‍यमों का उल्‍लंघन कर रही हैं। इसके अलावा, गैरकानूनी फंडिंग से अनुचि‍त डि‍स्काउंट्स दे रही हैं। पारंपरि‍क रि‍टेलर्स का यह भी कहना है कि‍ यहां एक समान कारोबार करने का मौका नहीं मि‍ल रहा है। ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म पर मौजूद ऑनलाइन वेंडर्स और मोबाइल फोन सेलर्स ने भी शि‍कायतें दर्ज की हैं।  

 

ई-कॉमर्स में FDI नि‍यम

 

भारत में मार्केटप्‍लेस मॉडल में 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी गई है और इंवेंटरी बेस्‍ड मॉडल में एफडीआई को मंजूरी नहीं है। मार्केटप्‍लेस ऑपरेटर्स अपने पास इंवेंटरी नहीं रख सकते हैं और अपने प्‍लेटफॉर्म पर प्रोडक्‍ट नहीं बेच सकते। वह केवल दूसरे वेंडर्स के लि‍ए प्रोसेस की सुवि‍धा दे सकते हैं। 

 

ऑनलाइन मार्केटप्‍लेस प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष तौर पर अपने प्लेटफॉर्म पर बि‍कने वाले प्रोडक्‍ट्स की कीमतों को प्रभावि‍त नहीं कर सकते। एक ई-कॉमर्स कंपनी एक वेंडर या उनकी ग्रुप कंपनि‍यों से अपने मार्केटप्‍लेस पर 25 फीसदी से ज्‍यादा की सेल्‍स नहीं कर सकती है।

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