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फ्लि‍पकार्ट को मि‍ली बड़ी राहत, डि‍स्‍काउंट पर नहीं देना होगा कोई टैक्‍स

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लि‍पकार्ट को इनकम टैक्‍स अपेलैट ट्रि‍ब्‍यूनल (ITAT) की ओर से बड़ी राहत मि‍ली है।

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नई दि‍ल्‍ली. देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लि‍पकार्ट को इनकम टैक्‍स अपीली ट्रि‍ब्‍यूनल (ITAT) की ओर से बड़ी राहत मि‍ली है। सरकार ने फ्लि‍पकार्ट की ओर से दि‍ए जाने वाले डि‍स्‍काउंट्स को कैपि‍टल एक्‍सपेंडि‍चर के तौर पर मानने की अपील की थी, जि‍से ITAT ने खारि‍ज कर दि‍या है। वकीलों और टैक्‍स एनालि‍स्‍ट ने कहा कि‍ ट्रि‍ब्‍यूनल की बेंगलुरू बेंच ने टैक्‍स डि‍पार्टमेंट द्वारा फ्लि‍पकार्ट से 31 मार्च, 2016 को समाप्‍त फाइनेंशि‍यल ईयर के लि‍ए अति‍रि‍क्‍त 110 करोड़ रुपए के टैक्‍स की मांग को खारि‍ज कर दि‍या है।    

 

माना जा रहा था कि‍ सरकार के इस कदम से ऑनलाइन रि‍टेलर्स को टैक्‍स डि‍डक्‍शन का दांवा करने से रोका जा सकता है। हालांकि‍, ITAT के फैसले के बाद अब ई-कॉमर्स कंपनि‍यां प्रोडक्‍ट्स पर दि‍ए जाने वाले डि‍स्‍काउंट को टैक्‍स डि‍डक्‍टेबल एडवर्टाइजमेंट और मार्केटिंग एक्‍सपेंस के तौर पर दि‍खा सकती हैं।   

 

 

क्‍या है फ्लि‍पकार्ट का तर्क

 

फ्लि‍पकार्ट की दलील है कि‍ उनहें हर साल अपने प्रोडक्‍ट्स को बेचने और मार्केट में अपने शेयर को कायम करने के लि‍ए इस तरह के खर्च करने पड़ते हैं। ई-कॉमर्स कंपनियां कस्टमर्स को दिए जाने वाले डिस्‍काउंट और ऑफर्स समेत अन्‍य खर्च को मार्केटिंग खर्च मानती हैं। वहीं, आईटी डिपार्टमेंट इसे कैपिटल खर्च के तौर पर देखता है। 

 

 

टैक्‍स डि‍पार्टमेंट का क्‍या है कहना

 

टैक्‍स डि‍पार्टमेंट का कहना है कि‍ इस खर्च से वह अपना ब्रांड वैल्‍यू बनाती हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का मानना है कि डिस्‍काउंट और ऑफर्स को मार्केटिंग कॉस्‍ट नहीं माना जाना चाहिए बल्कि इसे भी कैपिटल खर्च के तौर पर देखा जाना चाहिए। इसके पीछे डिपार्टमेंट का तर्क है कि इन ऑफर्स और डिस्‍काउंट के जरिए कंपनियां प्रॉफिट कमा रही हैं और इससे उनका रेवेन्‍यू भी बढ़ रहा है। डिपार्टमेंट का कहना है कि इन कंपनियों को रेवेन्‍यू को कम करके नहीं दिखाना चाहिए।  

 

 

दोबारा कोर्ट जा सकता है टैक्‍स डि‍पार्टमेंट

 

ITAT ने अपना फैसला बुधवार को सुनाया है, हालांकि‍ अंति‍म आदेश अभी तक अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं कि‍या है। टैक्‍स डि‍पार्टमेंट के पास ऊपरी कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देने का वि‍कल्‍प है। टैक्‍स अधि‍कारि‍यों ने कहा कि‍ डि‍पार्टमेंट इस पर कोई टि‍प्‍पणी नहीं कर सकता है क्‍योंकि‍ अभी तक उनके पास आदेश नहीं पहुंचा है।

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