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फ्लि‍पकार्ट-वालमार्ट की डील को मि‍ली CCI की मंजूरी, ट्रेंडर्स इसके वि‍रोध में जाएंगे कोर्ट

डील ऐलान होने के मात्र 3 माह के भीतर ही CCI ने ये मंजूरी दे दी है।

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नई दि‍ल्‍ली। फ्लि‍पकार्ट और अमेरि‍का की कंपनी वॉलमार्ट की डील को कंपीटि‍शन कमीशन ऑफ इंडि‍या (CCI) ने मंजूरी दे दी है। ऐसे में वालमार्ट की ओर से 16 अरब डॉलर में फ्लि‍पकार्ट में 77 फीसदी हि‍स्‍सेदारी लेने का रास्‍ता साफ हो गया है। CCI ने ट्वि‍टर पर बताया कि‍ @ CCI_India ने वालमार्ट इंटरनेशनल होल्‍डिंग इंक द्वारा फ्लि‍पकार्ट प्राइवेट लि‍. के प्रस्‍तावि‍त हि‍स्‍सेदारी खरीद को मंजूरी दे दी है। डील ऐलान होने के मात्र 3 माह के भीतर ही CCI ने ये मंजूरी दे दी है। डील को मंजूरी मि‍लने के बाद कारोबारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा है कि‍ वह इस फैसले के खि‍लाफ कोर्ट जाएगा।

 

12 पन्‍नों का है आदेश

 

CCI बेंच के तीन सदस्‍यों ने अपने 12 पन्‍नों के आदेश में ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म द्वारा भारी डि‍स्‍काउंट और चुनिंदा सेलर्स को खास तवज्‍जों देने से जुड़ी चिंताओं पर गौर कि‍या है। आदेश में कहा गया कि‍ कंपीटि‍शन के लिहाज से इसकी जांच हो सकती है लेकि‍न डील को नामंजूर करने के लि‍ए यह उचि‍त नहीं है। कारोबारी संगठन जैसे CAIT और स्‍वदेशी जागरण मंच की ओर से इस डील का लगातार वि‍रोध कि‍या जा रहा है।

 

ट्रेडर्स एसोसिएशन इसके खिलाफ जाएंगी कोर्ट

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को बताया कि ट्रेडर्स इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे। 19 अगस्त को देश भर की सभी ट्रेडर्स एसोसिएशन मीटिंग करेंगी जिसमें ट्रेडर्स इसके खिलाफ आंदोलन चलाए जाने पर चर्चा करेंगे। ट्रेडर्स जल्द ही इस डील के खिलाफ भारत बंद भी करेंगे।

 

आखिर ट्रेडर्स क्यों कर रहे हैं विरोध

 

भारतीय ट्रेडर्स का कहना है कि वॉलमार्ट भले ही देश में ऑनलाइन मार्केट के जरिए एंट्री कर रही है लेकिन आगे चलकर वह ऑफलाइन बाजार में आएगी ही आएगी। प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि ऐसी कंपनियां दुनिया में से कहीं से भी सामान लाएंगी और देश को डंपिंग ग्राउंड बना देंगी। भारतीय रिटेलर्स के लिए लेवल प्‍लेइंग फील्‍ड बराबर का नहीं रहेगा और वे कॉम्पिटीशन में पिछड़ जाएंगे। उनका बिजनेस बर्बाद हो जाएगा। उनका कहना है कि देश में इस वक्‍त लगभग 7 करोड़ रिटेलर्स हैं, जिनमें से लगभग 3 करोड़ रिटेलर्स को इस डील से सीधे तौर पर नुकसान होने वाला है।

 

क्‍या है वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील?

 

अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट भारत की ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट में 75 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदी है। फ्लिपकार्ट के बोर्ड ने इस डील को मंजूरी भी दे दी है। इस सौदे की कीमत करीब 1 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबि‍क, वॉलमार्ट के साथ गूगल-पेरेंट कंपनी अल्‍फाबेट इंक भी इस इन्‍वेस्‍टमेंट में हि‍स्‍सा ले सकती है।

 

क्‍यों यह सौदा करना चाहती है वॉलमार्ट?

 

ग्रेहाउंड रि‍सर्च के सीईओ संचि‍त गोगि‍या के मुताबिक वॉलमार्ट अमेरि‍का और दूसरे देशों में अमेजन को टक्‍कर देने का रास्‍ता ढूंढ रही है। भारत में वॉलमार्ट को रेग्‍युलेशन के कारण मुश्‍कि‍लों का सामना करना पड़ रहा है और फ्लि‍पकार्ट में इन्‍वेस्‍टमेंट उसे ऑनलाइन रि‍टेल मार्केट में बड़ी जगह दे देगा। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की रि‍पोर्ट के मुताबिक, इस वक्‍त फ्लिपकार्ट 43 फीसदी से ज्‍यादा मार्केट शेयर के साथ लीडर है। अनुमान है कि 2019 में उसकी हिस्‍सेदारी 44 फीसदी शेयर तक पहुंच जाएगी। वहीं, अमेजन का मार्केट शेयर 37 फीसदी और स्‍नैपडील का मार्केट शेयर मात्र 9 फीसदी रह जाएगा।

 

आगे पढ़ें - मंजूरी पर वालमार्ट ने क्या कहा..

 

 

वालमार्ट ने डील पर मंजूरी मिलने पर क्या कहा

 

वॉलमार्ट के कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन हेड रजनीश कुमार ने moneybhaskar.com को बताया कि इसका स्वागत करते हुए कहा कि वो छोटे किसानों, मैन्युफैक्चरर और रिटेल कंज्यूमर्स का समर्थन कर भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान देने को प्रतिबद्ध है। फ्लिपकार्ट के साथ उनकी पार्टनरशिप इस मार्केट के लिए काम करती रहेगी। फ्लिपकार्ट इंडिया में एक बड़ा और मजबूत प्लेयर है। फ्लिपकार्ट की लीडरशीप टीम वालमार्ट के कल्चर के साथ सही फिट होती है। इन दोनों कंपनियों की जोड़ी इकोनॉमिक ग्रोथ में मदद करेगी।

 

ट्रेडर्स को 5-6 लाख नौकरियां जाने का डर

 

खंडेलवाल का कहना है कि भारत के ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सेगमेंट के रिटेलर्स को मिलाकर कुल 40 लाख करोड़ रुपए सालाना का रिटेल कारोबार होता है और कम से कम 20 लाख करोड़ के बिजनेस को इससे नुकसान होने वाला है। जहां तक जॉब लॉस की बात है तो रिटेलर्स कां धंधा गिरने से वे लोगों को निकालेंगे ही, इससे 5-6 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा।

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