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FY17 में OLA को 4897 करोड़ रु का घाटा, इनकम 70% बढ़ी

वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान राइड हेलिंग ऐप OLA का घाटा बढ़कर 4,897 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

Ola's losses widen to Rs 4,898 cr in FY'17

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान राइड हेलिंग ऐप ओला का घाटा बढ़कर 4,897 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, हालांकि उसकी कुल इनकम में 70 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। रेग्युलेटरी डॉक्यूमेंट्स से ये आंकड़े सामने आए हैं। भारत में मार्केट लीडरशिप के लिए अमेरिकी कंपनी उबर से भारी कॉम्पिटिशन का सामना कर रही ओला को वित्त वर्ष 2015-16 में 3,147.9 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

 

 

70% की बढ़ोत्तरी के साथ 1380.70 करोड़ रु की इनकम

इसी अवधि के दौरान ओला ब्रांड के तहत सेवाएं देने वाली एएनआई टेक्नोलॉजिज को कंसॉलिडेटेड कुल इनकम 70 फीसदी बढ़कर 1,380.70 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यानी वित्त वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 810.70 करोड़ रुपए रहा था। इस संंबंध में भेजे गए ईमेल पर ओला ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

 

1,000 करोड़ रु का हुआ एकमुश्त नुकसान

रिसर्च फर्म टॉफ्लर की को-फाउंडर अंचल अग्रवाल ने कहा, ‘1,000 करोड़ रुपए के एकमुश्त नुकसान से कंपनी के नतीजों पर खासा निगेटिव असर पड़ा। ई-कॉमर्स कंपनियों के नतीजों की तर्ज पर कंपनी का एडवर्टाइजिंग खर्च 35 फीसदी कम हुआ है।’

 

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) में फाइल किए गए डॉक्यूमेंट के मुताबिक, ओला को वित्त वर्ष 2017 के दौरान ‘मॉडिफिकेशन ऑफ फाइनेंशियल इंस्ट्रुमेंट’ के एवज में 1,095.3 करोड़ रुपए का एकमुश्त नुकसान हुआ।  

  

24% बढ़ा इम्प्लॉई खर्च

कंपनी का इम्प्लॉई से संबंधित खर्च 24 फीसदी बढ़कर 572.1 करोड़ रुपए हो गया, वहीं वहीं फाइनेंस कॉस्ट बढ़कर 28.7 करोड़ रुपए हो गई। ओला की सब्सिडियरीज में ओला फ्लीट टेक्नोलॉजिज (लीजिंग बिजनेस), जिपकैश कार्ड सर्विस (पेमेंट), ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ओला स्किलिंग शामिल हैं।

 

2011 में शुरू हुई थी कंपनी

2011 में भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी द्वारा स्थापित ओला 110 शहरों में सेवाएं देती है और कंपनी अपने साथ 10 लाख ड्राइवर-पार्टनर्स, ऑटो रिक्शा और टैक्सियों के जुड़े होने का दावा करती है।

 

इस साल की शुरुआत में कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया के बाजार में उतरने का ऐलान किया था और अब पर्थ, सिडनी व मेलबर्न सहित कई शहरों में सेवाएं देती है। यहां भी कंपनी को उबर से प्रतिस्पर्धा मिल रही है। दिलचस्प है कि दोनों ही कंपनियों में सॉफ्टबैंक बड़ी इन्वेस्टर है।

 

बीते साल ओला ने खरीदी थी फूडपांडा

इसके साथ ही दोनों कंपनियां भारत में फूड डिलिवरी स्पेस में भी प्रतिस्पर्धा करती हैं। बीते साल दिसंबर, 2017 में ओला ने फूडपांडा को खरीदने का ऐलान किया था। उबर पहले से इस सेक्टर में उबरईट्स के माध्यम से सेवाएं दे रही है।

 

 

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