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जैक मा को क्यों लगता है ऐसा, 'तबाह हो जाएंगे छाेटे कारोबारी'

व्यापार बंद होने पर कई बार शुरु हो जाता है युद्ध

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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप के सह संस्थापक और चेयरमैन जैक मा अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर को लेकर चिंतित हैं। विश्व व्यापार संगठन के सेमिनार में स्पीच देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच यह युद्ध तकरीबन 20 साल तक चलने की आशंका है और इसके परिणाम गंभीर होंगे। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ चीन और अमेरिका बल्कि कई देशों के छोटे कारोबारी तबाह हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इसका हल निकालना होगा वरना इससे सबको नुकसान होगा।

 

व्यापार नहीं होगा तो बनेगी युद्ध की स्थिति

जैक मा ने कहा कि जब व्यापार बंद हो जाता है तो कई बार युद्ध शुरू हो जाता है। इसलिए युद्ध को रोकने का तरीका है व्यापार करते रहना। व्यापार विश्वास बढ़ाने का तरीका है। यह एक-दूसरे से लड़ने का औजार नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापार को रेगुलेटर्स से बचाने की जरूरत है।

 

क्यों लड़ रहे हैं चीन-अमेरिका?

मैन्युफैक्चरिंग के मामले में चीन दुनिया में बेताज बादशाह है। छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी हर चीज को कम लागत में तैयार करने में चीन माहिर है। यही वजह है कि दुनियाभर के बाजारों में स्वदेशी उत्पादों की बजाय चीनी उत्पादों की बिक्री ज्यादा होती है। दूसरी तरफ अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है लेकिन, अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रंप अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी के लिए दोनों देशों के बीच व्यापार में असंतुलन को दोषी मानते हैं। यही वजह है कि मार्च में डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी उत्पादों पर अत्यधिक टैरिफ लागू किया। इसके जवाब में चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगा दिया।

 

आगे पढ़ें- क्या चाहता है अमेरिका

क्या चाहता है अमेरिका?

जुलाई में ट्रंप प्रशासन ने चीनी उत्पादों पर 34 अरब डॉलर का शुल्क लगा दिया। इन उत्पादों में फ्लैट स्क्रीन टीवी, एयरक्राफ्ट के पार्ट और मेडिकल डिवाइस शामिल हैं। शुल्क लगाए गए इन उत्पादों को अमेरिका में इंपोर्ट किए जाने पर 25 प्रतिशत बॉर्डर टैक्स देना पड़ रहा है। इसके पीछे अमेरिका की मंशा चीन को सबक सिखाने है। अगर चीनी उत्पाद इतने महंगे हो जाएंगे कि अमेरिकी ग्राहक उन्हें खरीद न सकें तो वे उन उत्पादों को कहीं और से खरीदेंगे। आखिरकार इसे चीनी उद्योग को नुकसान होगा।

 

आगे पढ़ें- चीन भी रहीं रहा पीछे 

 

चीन भी नहीं रहा पीछे

अमेरिका ने जैसे ही चीनी उत्पादों पर शुल्क लगाया तो चीन ने अमेरिका पर इतिहास की सबसे बड़ी ट्रेड वॉर शुरू करने का आरोप लगाया। जवाब में चीन ने सोयाबीन,ऑटोमोबाइल और लॉब्स्टर समेत 34 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों पर 25प्रतिशत टैरिफ लगा दिया।

 

आगे पढ़ें- बन सकते हैं गंभीर हालात 

 

बन सकते हैं गंभीर हालात

दो देशों के बीच व्यापार को लेकर तकरार होना सामान्य बात है। ऐसे मामले होते ही रहते हैं। इस मतभेद को दूर करने के लिए देश वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) की शरण में जाते हैं, जहां इस बात का फैसला होता है कि कौन सही है और कौन गलत। यहां दोनों देश सुलह के रास्ते देखते हैं या दोनों एक दूसरे के उत्पादों पर शुल्क लगा देते हैं। लेकिन यहां मामला थोड़ा गंभीर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप WTO को ही अनुचित मानते हैं। वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली को अपने हिसाब से ढ़ालने की मंशा रखते हैं। वे चीन के सभी उत्पादों पर टैरिफ लगाने के साथ यूरोपीय कार निर्माता कंपनियों से कर वसूलने और WTO छोड़ने की धमकी तक दे चुके हैं। दोनों देशों के बीच यह जंग दुनिया के कई देशों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। 

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