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Home » Industry » E-CommerceE-commerce companies removed thousands of products from site owing to new ecomm rules

नए नियम लागू होते ही e-commerce साइट्स से गायब हुए हजारों प्रोडक्ट्स, बंद हुई Amazon की यह बड़ी सेवा

कई जरूरी उत्पादों को न खरीद पाने से भारतीय परेशान होने लगे हैं

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नई दिल्ली.

1 फरवरी से सरकार की नई ई-कॉमर्स नीति के लागू होते ही ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनियां मुश्किल में आ गई हैं। उन्होंने अपनी साइट से हजारों की संख्या में प्रोडक्ट्स हटा दिए हैं। नए FDI नियमों का सबसे ज्यादा असर Amazon पर पड़ा है, जिसने अपने प्लेटफॉर्म से कई बड़ी सेवाएं हटा दी हैं। इसमें Amazon Pantry शामिल है। इस सेवा के बंद होते ही कई भारतीय परेशान होने लगे हैं। अमेजन के ट्विटर हैंडल पर जाकर लोग पूछ रहे हैं कि यह फिर से कब शुरू की जाएगी। ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म से बड़ी मात्रा में मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन समेत कई श्रेणियों के उत्पाद हटा दिए गए हैं।

न डिलीवरी जल्दी होगी न ऑफर्स मिलेंगे 

नए बदलावों के मुताबिक अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उन कंपनियों के प्रॉडक्ट नहीं बेच पाएंगे, जिनमें उनकी हिस्सेदारी है। साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अब किसी प्रॉडक्ट विशेष की एक्सक्लूसिव सेल भी नहीं चल पाएगी। शुक्रवार से लागू इस नियम के बाद अब ग्राहकों को ना तो उन्हें जल्दी डिलीवरी मिलेगी ना ही ऑफर। इस नए नियम के तहत ग्राहकों को सामान पहले के 1-2 दिन की तुलना में अब कम से कम 4-5 दिनों में मिलेगा। इतना ही नहीं इसके लिए ग्राहकों को कीमत भी पहले से अधिक चुकानी होगी।

 

Walmart और Amazon को हुआ घाटा

नई नीति लागू होने के बाद Amazon और Walmart को करीब 50 बिलियन डॉलर ( 3 लाख 50 हजार करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है। 2018 में दोनों कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भारत में निवेश किया था। अमेजन ने भारतीय बाजार में करीब 5 बिलियन डॉलर (35.7 हजार करोड़ रुपए) का निवेश किया था। वहीं, वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी 16 बिलियन डॉलर (1.14 लाख करोड़ रुपए) में खरीदी था।

 

 

क्यों लागू हुई नई नीति

सरकार ने दिसंबर महीने में ई-कॉमर्स में विदेशी निवेश के नियमों के संबंध में कहा था कि विदेशी निवेश लेने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म यानि वेबसाइट पर अपनी ही ग्रुप की कंपनियों या सहयोगी कंपनियों के सामान बेचने की इजाजत नहीं होगी। दरअसल अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियां जो सामान अपनी वेबसाइट पर बेचती हैं उसमें उनकी सहयोगी कंपनियों की ओर से सप्लाई किए जाने वाले प्रोडक्ट भी होते हैं, लिहाजा कई बार ये कंपनियां बेहद सस्ते दामों में प्रोडक्ट्स बेचती हैं। इसके चलते रिटेल व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि उनका माल कोई नहीं खरीदता। ऐसे में सरकार ने घरेलू दुकानदारों को राहत पहुंचाते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों के डिस्काउंट्स और ऑफर्स पर शिकंजा लगा दिया।

 

 

सरकार ने नहीं दी और मोहलत

विदेशी निवेश लेने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों की दलील थी कि उनकी सहयोगी कंपनियों के पास करीब 6 हजार करोड़ रुपए का माल है जिसकी एक महीने में बिक्री कर पाना संभव नहीं होगा। इसकी वजह से उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ेगा। इसलिए सरकार नियमों को लागू करने की समय सीमा 6 महीने बढ़ाए। लेकिन सरकार ने इस दलील को नकार दिया। अमेजन और वॉलमार्ट दोनों ने इस एक फरवरी की समयसीमा को बढ़ाने की मांग करते हुए कहा था कि इस नए नियमों को समझने के लिए उन्हें और समय की जरूरत है। अमेजन ने इसके लिए जहां एक जून तक समय मांगा था वहीं फ्लिपकार्ट ने छह महीने का और समय मांगा था। हालांकि सरकार ने एफडीआई के नियमों के लागू होने की समयसीमा नहीं बढ़ाई।

 

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