Home » Industry » E-Commerceइन कार्ड से होने वाले पेमेंट के डाटा को भारत में स्टोर करने के लिए कह रहा है आरबीआई

90 करोड़ डेबिट व क्रेडिट कार्ड पर अब भी आरबीआई की तलवार, नहीं मिली है राहत

आरबीआई ने अप्रैल में इन कंपनियों से कहा था कि वे भारत में ही डाटा स्टोर करने का प्रावधान करे।

इन कार्ड से होने वाले पेमेंट के डाटा को भारत में स्टोर करने के लिए कह रहा है आरबीआई

नई दिल्ली। डेबिट व क्रेडिट कार्ड कंपनियों को डाटा स्टोर के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से राहत नहीं मिली है। इन कंपनियों पर अब भी आरबीआई की तलवार लटक रही है। हालांकि इन कंपनियों ने वित्त मंत्रालय से इस मामले में राहत दिलवाने की मांग की है। आरबीआई ने अप्रैल में इन कंपनियों से कहा था कि वे भारत में ही डाटा स्टोर करने का प्रावधान करे। इन कंपनियों को भारत में डाटा स्टोरेज सुविधा शुरू करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया गया था। लेकिन डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी विदेशी कंपनियां ऐसा अभी नहीं कर पाई है। अब इन कंपनियों ने वित्त मंत्रालय से गुजारिश की है कि भारत में ही डाटा स्टोर करने की सुविधा शुरू करने के लिए उन्हें एक साल का समय दिलाया जाए। लेकिन सूत्रों के मुताबिक आरबीआई इस मामले में कोई ढील देने को तैयार नहीं है। हालांकि भारत में डाटा स्टोर की सुविधा नहीं शुरू करने पर इन कार्ड को फिलहाल बंद नहीं किया जा रहा है। पहले यह चर्चा थी कि भारत में 15 अक्टूबर से डाटा स्टोर नहीं करने वाली कंपनियों के डेबिट व क्रेडिट कार्ड को बैन कर दिया जाएगा। ऐसी 78 कंपनियां देश में काम कर रही हैं।  यदि कार्ड बंद हो गए तो इससे लगभग 90 करोड़ लोगों को  दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और इससे आगामी त्योहारी सीजन में भी लोगों को  परेशानी हो सकती है। 

 

कंपनियों ने की समय बढ़ाने की मांग
कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्रालय से कहा है कि उन्हें डाटा स्टोर करने के लिए पूरे 2 साल का समय लगेगा। आरबीआई ने सभी कंपनियों से डाटा स्टोर की कॉपी भी मांगी है। आरबीआई के फैसले को 62 कंपनियों ने मान लिया है। इनमें अमेजन, व्‍हाट्सऐप और अलीबाबा जैसी ई कॉमर्स कंपनियां शामिल हैं।


जुलाई में सौंपी गई थी डाटा सुरक्षा की रिपोर्ट
जिन कंपनियों ने भी आरबीआई के नियमों को मानने से इनकार किया है उनका कहना है कि डाटा स्टोरेज से भारत में न सिर्फ लागत बढ़ेगाी, बल्कि इसकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होंगे। आरबीआई इन कंपनियों को और समय देने के मूड में नहीं है। इन कंपनियों को पहले ही 6 माह का समय दिया जा चुका है। एक उच्च स्तरीय समिति ने डाटा सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट जुलाई में केंद्र सरकार को सौंपी थी। 

 

डाटा स्टोरेज से देश के आर्थिक विकास दर पर पड़ेगा गहरा असर: BIF
इस पर ब्राडबैंड इंडिया फोरम का कहना है कि डाटा स्टोरेज से देश के आर्थिक विकास दर पर काफी गहरा असर देखने को मिलेगा। BIF के मुताबिक, डाटा लोकलाइजेशन से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को इसमें उदारता का रुख दिखाना चाहिए।

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