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Amazon-Flipkart की हार बनेगी मुकेश अंबानी की जीत, ई-कॉमर्स के बनेंगे बेताज बादशाह

नई ई-काॅमर्स नीति लागू होने से फ्लिपकार्ट से नाता तोड़ सकती है Walmart

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नई दिल्ली. ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक फरवरी से लागू हुई नई FDI पॉलिसी ने अमेजन और फ्लिपकार्ट की नींद उड़ा दी है। कंपनियों की साइट से लाखों की संख्या में प्रोडक्ट्स गायब हो चुके हैं और अब से ग्राहकों को न तो डिस्काउंट्स मिलेंगे और न ही डिलीवरी जल्दी होगी। हालात को देखते हुए वॉल स्ट्रीट की दिग्गज फाइनेंशियल सर्विस कंपनी Morgan Stanley ने आशंका जताई है कि जल्द ही वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट से नाता तोड़कर भारत में अपना कारोबार बंद कर सकती है।

 

कंपनी का मानना है कि Walmart फ्लिपकार्ट को किसी दूसरे के हाथ में बेचकर भारतीय बाजार से बाहर निकल जाएगी। ऐसे हालात में अमेजन और फ्लिकार्ट की हार देश के सबसे अमीर बिजनेसमैन मुकेश अंबानी की जीत बन सकती है। मुकेश अंबानी अपना ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लाने की घोषणा कर ही चुके हैं। इन दोनों कंपनियों को होने वाले नुकसान से अंबानी देश में ई-कॉमर्स के भी सबसे बड़े खिलाड़ी बन सकते हैं।

 

सरकार कर रही है व्यापारियों को मनाने की कोशिश

व्यापारी वर्ग सरकार से लंबे अरसे से नाराज है। पहले नोटबंदी और फिर GST के चलते व्यापारी वर्ग को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। दूसरी तरफ ई-कॉमर्स साइट्स ने उनका धंधा चौपट कर दिया था। ऐसे में व्यापारी वर्ग सरकार से मांग कर रहा था कि FDI के नियमों में बदलाव किए जाएं जिससे वे व्यापार कर सकें। ऐसे में सरकार ने व्यापारी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए और चुनाव से पहले उन्हें मनाने के लिए नई ई-कॉमर्स पॉलिसी लागू कर दी है। अमेजन और वॉलमार्ट ने भारतीय ऑनलाइन रिटेल क्षेत्र में बादशाहत की जो योजना बनाई थी सरकार की चुनावी प्राथमिकताअों के आगे ध्वस्त हो गई।

 

 

 

क्या कहती है नई पॉलिसी

नई ई-कॉमर्स पॉलिसी के तहत ई-कॉमर्स कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म के लिए खुद की इन्वेंटरी नहीं रख पाएंगी। उन्हें सभी सेलर्स के साथ समान व्यवहार करना होगा। अब तक कंपनियां अपनी सहयोगी कंपनियों के प्रोडक्ट्स भी सेल करती थीं और उन पर भारी डिस्काउंट देती थीं जिससे ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके। इसके साथ ही ये कंपनियां किसी कंपनी का माल एक्सक्लूसिव बेचने के लिए भी डील नहीं कर पाएंगी, जिससे सीधे तौर पर भारी-भरकम डिस्काउंट्स पर रोक लगेगी।

 

 

मुकेश अंबानी बनेंगे ई-कॉमर्स के बेताज बादशाह

ग्रेहाउंड रिसर्च के सीईओ संचित वीर गोगिया का कहना है, 'मानें या न मानें लेकिन भारत में ई-रिटेलरों के लिए एफडीआई के सख्त नियम रिलायंस और रिटेल क्षेत्र में उनकी महत्वाकांक्षा के लिहाज से बड़ी जीत है।' दूरसंचार सहित अन्य क्षेत्रों में अपनी बादशाहत का लोहा मनवाने के बाद मुकेश अंबानी ने पिछले साल एक मॉडल के निर्माण के लिए योजना पेश की थी, जो रिलायंस के कंज्यूमर ऑफरिंग्स के लिए एक हाइब्रिड नया कॉमर्स प्लेटफॉर्म मुहैया कराता है।'

वहीं ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसका फायदा अंबानी के नए वेंचर के साथ ही घरेलू कंपनियों को होगा। यूबीएस एजी ने पिछले महीने कहा था कि अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पास भारत का सबसे बड़ा रिटेल चेन और तीसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है और इसमें ऐमजॉन और अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड का स्थानीय संस्करण बनने की अपार क्षमता है।

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