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दुनिया के सबसे अमीर शख्स को अंबानी से मिलेगी चुनौती, मोदी सरकार लेने जा रही ऐसा फैसला

नई ई-कॉमर्स पॉलिसी से लगेगा विदेशी कंपनियों को झटका

know how new e-commerce draft policy will benefit to mukesh ambani

नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स सेक्टर पर  बनी नई ड्राफ्ट पॉलिसी को आने वाले दिनों में अगर मोदी सरकार हू-ब-हू अम्लीजाना पहनाती है तो दुनिया के सबसे अमीर शख्स जेफ बोजोस को भारत में नई टक्कर मिल सकती है। रोचक बात यह है कि फि्लपकार्ट को खरीदने वाली वॉलमार्ट बेजोस को टक्कर नहीं देगी, बल्कि दुनिया के सबसे अमीर शख्स बेजोस का मुकाबला भारत के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी से होगा। 

 

मुकेश अंबानी को होगा फायदा 
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुतबिक, ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए बनी ड्रॉफ्ट पॉलिसी को अगर बिना किसी बदलाव के अगर कानून बनाया जाता है तो तेल से लेकर टेलिकॉम सेक्टर तक में धूम मचाने वाले मुकेश अंबानी अमेजन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरेंगे। 

 

क्या है असल पेंच 
दरअसल ड्रॉफ्ट पॉलिसी की सिफारिशों के मुताबिक, फॉरेन फंडेड कंपनियां को देश में अपनी इंवेंट्री रखने की इजाजत नहीं होगी। सीधी भाषा में कहें तो उन्हें अपना वेयर हाउस बनाने की इजाजत नहीं होगी। इस सिफारिश के चलते अमेजन को झटका लगेगा। क्यों ऐसे में वह अपनी सप्लाई चेन को पूरी ताकत के साथ ऑपरेट नहीं कर पाएगी। वेयरहाउस सिस्टम के चलते ही उसने अमेरिकी ई-कॉमर्स मार्केट में सफलता के झंडे गाड़े। 

 

मौजूदा मॉडल भी हो जाएगा बेकार 
यही नहीं नई ड्राफ्ट पॉलिसी में सेलर्स के जरिए इन्वेंट्री बनाए रखने पर भी लगाम लगा दी गई है। अभी तक अमेजन और फ्लिपकार्ट इसी मॉडल पर भारत में बिना सिरदर्द के बिजनेस करती रही हैं।  माना जा रहा है कि इसके चलते कंपनियां ग्राहकों को ज्यादा छूट का ऑफर नहीं पेश कर पाएंगी। 

 

अंबानी को होगा ऐसे फायदा 
वहीं दूसरी ओर आरआईएल जैसी भारतीय कंपनियों की ओर से चलाए जाने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को इसका एडवांटेज मिलना तय है। क्योंकि नए नियमों के चलते ये कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को ज्यादा बेहतर तरीके से मजबूत करने में सक्षम होंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अंबानी को यहां उनकी कंपनी जियो का सीधा सीधा फायदा मिलेगा।  

 

ट्रम्प प्रशासन पर दबाव बना रही अमेजन 
कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेजन इस बाबत ट्रम्प प्रशासन पर दबाव भी बना रही है कि वह मोदी सरकार के सामने यह मामला उठाए।   अमेजन को इस बात की उम्मीद थी कि इन नियमों को टाल दिया जाएगा। 

 

 

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